पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी
अल्पसंख्यक शिक्षा और सीबीएससी एजुकेशन के नाम पर भारत के शिक्षा व्यवस्था का नाश किया जा रहा। कई स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी शिक्षा के नाम पर धंधा कर रही और अब अल फलाह जैसी यूनिवर्सिटीयां डॉक्टर के नाम पर आतंकवादी तैयार करवा रही। माइंड वाश करने की पटकथा तो पाकिस्तानी मस्जिदों में तालिमों से शुरू हो जाती है जिसकी परनीति भारत में देखने को मिलती है।सूत्रों की माने तो भारत की तमाम यूनिवर्सिटियां कॉपी पेस्ट, पैसे कमाने और जाहिलियत फैलाने के अड्डे बन गए हैं। प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन के नाम पर कश्मीर, मुरादाबाद, सहारनपुर, गाजियाबाद के कुछ प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थाओं में आधे से अधिक कट्टर कश्मीरी अलगाववादी भरे हैं। अलीगढ़ मुश्लिम यूनिवर्सिटी हो चाहे जेएनयू यहां की पढ़ाई अब देशहित में होती नहीं दिखती। क्यूंकि यहां से अब जो नारे गढ़े जा रहें वह आतंकवाद, नक़्शलीज्म और देशद्रोह को बढ़ावा देते है। सरकार को अब ऐसी शिक्षण संस्थाओं पर एक्शन लेते हुए एक देश एक नियम एक किताब वाला कानून लागू करते हुए सभी यूनिवर्सिटी को केवल एक यूनिवर्सिटी में विलय करते हुए, प्राइवेट सीबीएससी और आईएससी बोर्ड खत्म कर देना चाहिए ताकि सबको एक समान सुलभ और हिंदी भाषाई शिक्षा मिले। यह अल फलाह यूनिवर्सिटी जो फरीदाबाद के धौज गांव में सत्तर एकड़ में बनी है। इसमें लैब कम किराए के आवास अधिक हैं। कश्मीरी मुसलमान छात्रों की संख्या आधी है और आधे में पैसा देकर डिग्री खरीदने वाले लोग शामिल हैं। इस यूनिवर्सिटी की साइट पर जाओ तो वहां सभी एक्सेस नहीं कर सकते हैं। जिनके पास एक्सेस करने का आईडी पासवर्ड है वहीं एक्सेस कर सकता है। इससे पता चलता है कि गोपनीयता केवल बुर्के से नहीं आईडी पासवर्ड से भी रखी जा सकती है। यह टेरर यू ही नहीं आती है।
फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी को नैक एक्रीडेशन में ए ग्रेड यानी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा देने का संस्थान माना गया है। आतंकवाद का अड्डा होना शिक्षा का एक प्रश्नपत्र नया जुड़ा होगा तभी इसे ए ग्रेड मिला। इससे साबित होता है कि पैसे लेकर जांच करने वाली संस्था बनी है नैक नहीं तो आतंक की फैक्ट्री वालों को ए ग्रेड का मानक असम्भव था जो इस संस्थान को दिया है। इस यूनिवर्सिटी में डॉक्टरो के आतंकवादी बनने पर आप अगर आश्चर्यचकित हो रहे हैं तो गूगल के अनुसार अमेरिका में बेहद शानदार जिंदगी जीने वाली दुनिया की सर्वोच्च संस्था मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी करके अमेरिका की न्यूक्लियर साइंस विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी करने वाली डॉक्टर आफिया सिद्दीकी अपने 5 बच्चों और पति को छोड़कर आतंकवादी बन गई थी। पाकिस्तानी मूल की एक लड़की आफिया सिद्दीकी पढ़ने में बहुत ब्रिलियंट थी। आगा खान ट्रस्ट के स्कॉलरशिप पर उसने प्रतिष्ठित एमआईटी से न्यूक्लियर साइंटिस्ट में मास्टर्स डिग्री लिया और फिर आगा खां ट्रस्ट के स्कॉलरशिप पर उसने अमेरिका में ही न्यूरो न्यूक्लियर साइंटिस्ट में पीएचडी किया। उसके बाद वह अमेरिका के न्यूक्लियर साइंस विभाग में बड़े पद पर काम करने लगी साथ ही साथ वह अमेरिका की दो यूनिवर्सिटी में पीएचडी और मास्टर्स डिग्री वाले बच्चों को न्यूक्लियर साइंस की प्रैक्टिकल नॉलेज भी पार्ट टाइम में देती थी वह अमेरिका की कुछ चुनिंदा लोगों में से थी जिसे यूरेनियम और कलपुर्जे ले जाने पर कोई रोक-टोक नहीं था। उसका पति भी बहुत बड़ा साइंटिस्ट था उसके 5 बच्चे थे कुछ समय के बाद वह बहुत कट्टर आतंकवादी बनने लगी। वह आतंकवादियों को परमाणु बम बनाने की ट्रेनिंग देने के फिराक में थी और उसने अपने घर पर इतना युरेनियम जमा कर लिया था जिससे एक छोटा मोटा परमाणु बम बनाया जा सके। इतना ही नहीं वह 9/11 के प्रमुख आतंकी खालिद शेख मोहम्मद के संपर्क में भी थी और उसने तीन आतंकवादियों को अपने घर पर पनाह भी दिया था वह इतनी ज्यादा कट्टरपंथी हो गई थी कि अपने वैज्ञानिक पति को तलाक देकर उसने आतंकी खालिद शेख मोहम्मद के आतंकी भतीजे से दूसरा निकाह कर लिया। आफिया सिद्दीकी अभी अमेरिका की एक जेल में बंद है वह पिछले कई सालों से जेल में है और अमेरिकी कानून ने उसे जब तक वह जिंदा रहेगी तब तक जेल में रखने का सजा सुनाया है।
