Latest Updates

राष्ट्रभक्ति का प्रतीक ‘‘वंदे मातरम्’’

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

चुनाव के पहले पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर की तनातनी देखने को मिलने लगी है । उत्तर प्रदेश की एक बाबरी मस्जिद की जंग शदियों तक चली अब दूसरी बाबरी मस्जिद की जंग प्रारंभ हो गई है । राजनीति अपनी जगह है पर देश का सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की मानसिकता अपनी जगह है जो गलत है । यह माना जा सकता है कि हर एक सम्प्रदाय के अनुयायियों को अपना धार्मिक स्थल बनाने की स्वतंत्रता है तो मस्जिद बनायें पर उसे बाबरी मस्जिद का नाम देना तो साम्प्रदायिक सद्भाव को जानबूझकर तोड़ने की मानसिकता ही मासना जा सकता है । अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए बहुत सारे मुद्दे हैं पर जरूरी नहीं कि उसे साम्प्रदायिक रंग ही दिया जाए । पश्चिम बंगाल में चुनाव होना है तो एक सम्प्रदाय के वोट पाने के लिए इस तरह के कृत्य किया जाना तो उतिच नहीं माना जा सकता । जिस हुमांयुखान ने बाबरी मस्जिद बनाने का कार्य अपने हाथों में लिया वह ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का विधायक भी रहा है यह अलग बात है कि उसे पार्टी से निकाल दिया गया । वैसे यह बेहतर कमद था टीएमसी का ऐसे लोगों को राजनीतिक सरंक्षण मिलना ही नहीं चाहिए । पश्चिम बंगाल की राजनीति अन्य राज्यों की अपेक्षा बिल्कुल अलग है, इस प्रदेश को मुस्लिम बाहुल्य प्रदेश माना जाता है । मुस्लिम वो भी बंगलादेश से आए हुए घुसपैठियों के विशेशण से पहचानें जाते हैं । पर इससे अलग इस प्रदेश में मॉ काली की विशाल और अनोखी मूर्ति भी है यही कारण है कि यहां दुर्गा पूजन उत्सव बहुत धार्मिकता से मनाया जाता है । हिन्दुओं की संख्या कम नहीं है, यही कारण है की भाजपा हिन्दुओं को जाग्रत करने और वर्तमान ारकार से उनको मोह भंग करने की योजना में विगत तीन चुनावों से लगी हुई है, अभी तक तो उसे सफलता नहीं मिली है पर इस बार वह ज्यादा ही आशान्वित है । धीरे-धीरे कर पश्चिम बंगाल का हिन्दु भाजपा के बैनर तले इकट्ठा भी हो रहा है । हिन्दुओं के इकट्ठा होने से सरकार का विरोध भी अब दमदार दिखाई देने लगा है । मस्जिद बनाने की घोशणा के बाद वहां एक दिवसीय गीता पाठ का आयोजन भी किया गया जिसमें देश के जाने पहचाने मूर्धन्य साधु-सन्यासी भी इकट्ठा हुए आसैर करीब पांच लाख लोगों की उपस्थिति में गीता का पाठ किया । अब इस राज्य में दो धड़े साफ दिखाई देने लगे हें एक हिन्दु और दूसरा मुस्लिम । भाजपा यदि हिन्दुओं की पोशक पार्टी मानी जाती है तो टीएमसी मुस्लिम पोशक के रूप् में चर्चाओं में है, यह अलग बात है कि ममता बनर्जी इसे धर्मनिरपेक्षता के रूप् में प्रस्तुत करती हैं । वे मंदिर भी जाती हैं और मस्जिद भी । भाजपा के लिए पहश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी को हटाना बहुत सरल नहीं लग रहा है पर वे अब इसे संभव मानने लगे हैं । बाबरी मस्जिद बनाने के प्रयास ने पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं को और संगठित कर दिया है जो भाजपा के बैनर तले इसका विररेघ कर रहे हैं वहीं मुस्लिम भी बाबरी मस्जिद के नाम पर इकट्ठा होने लगे हैं । जिस दिन बाबरी मस्जिद की नींव रखी गई उस दिन लाखों मुस्लिम लोग जुटे भी और खुले हाथों से चंदा भी दिया । इस समर्थन से ही मस्जिद की नींव रखने वाले हुमांयु के हौसले बुलन्द होने लगे हैं और अब वे नई पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने की बात कहने लगे हें जाहिर है कि वे बाबरी मस्जिद को मिले समर्थन को भुंजा लेना चाहते हैं । मस्जिद बनाने में किसी को कोई आपत्ति नहीं है ऐसा कहा जाने लगा है पर बाबरी के नाम से विरोध करने वालों को नाराजी है । हिन्दुओं के लिए बाबर एक आतातायी शासक था जिसने न केवल मंदिरों का विध्वंस किया बल्कि हिन्दुओं के साथ भी अत्याचार किए । इतिहास के पन्ना में दर्ज उसके हिन्ुद विरोधी कृत्यों के कारण ही आम हिन्दु बाबर से नफरत करता है । मुस्लिम कोई भी हो यदि उन्होने ने भी बाबर का इतिहरस पढ़ा है तो उसे भी उससे नफरत होने चाहिए क्योंकि मुस्लम धर्म में भी किसी के साथ भी अत्याचार करने को गुनाह माना गया है । सम्प्रदाय की विविधिता से परे भारत में रहने वाला हर एक भारतीय है और उसे भारतीयों की श्रेणी में ही माना जाता है तो फिर बाबर के अत्याचार का वो समर्थन कैसे कर सकते हैं ? हुमांयु यदि केवल मस्जिद बनाये तो उनके विरोध का कोई कारण नहीं होगा और न ही उनके सम्प्रदाय के लोगों के समर्थन में कमी आएगी तो फिर उन्हें बाबरी शब्द को अलग कर देना चाहिए ताकि इसके निर्माण का प्रारंभ हुआ विरोध ज्यादा न बढे और साम्प्रदायिक माहौल भी न बिगड़े ? पर वे ऐसा कर नहीं रहे हैं, उन्हें साम्प्रदायिक माहौल से ज्यादा जरूरी आगामी विधान सभा के चुनाव लग रहे हैं । वे ऐसा करेगें नहीं और भाजपा इसे मुद्दा बनाकर पश्चिम बंगाल के हिन्दुओं को एकजुट कर चुनाव में अपनी विजय को सुनिश्चत करने का प्रयास करेगी । ममता बनर्जी के लिए यह सारा कुछ कठिन परीक्षा की भांति ही होगा । चुनाव उन्हें भी जीतना है तो वे न हिन्दुओं को अपने से दूर कर सकती हें और न ही मुस्लिमों को । भाजपा तो ममता बनर्जी पर ही मस्जिद निर्माण का इल्जाम लगा रही है, यह इल्जाम चुनावी माहौल में और बढ़ेगा और ममता बनर्जी को हिन्दु विरोधी घोशित कर हिन्दुओं को उनकी पार्टी को वोट देने से रोकने का काम करेगा । निश्चत ही ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें बढ़ेगी ही । यूं भी भाजपा ने पिछले पांच सालों में छोटे से छोटे मुद्दों को बड़ा कर ममता जी को घेरने का कार्य किया है और हर एक मुद्दे को राश्टीय मुद्दा बना है । ममता बनर्ज को भाजपा ने चेन से नहीं बैठने दिया है और अब तो चुनाव नजदीक हैं तो भाजपा निश्चत ही ममता बनीर्ज को कई आरोपों के घेरे में लेगी जिनका जबाव आम मतदाता सुनना भी चाहेगा । पश्चिम बंगाल वह प्रदेश है जहां के एक महान कवि वंकिमचन्द्र चट्टोपाध ने ‘‘वंदे मातरम्’ गीत को लिखा जो भारत की आजादी में किसी वेद मंत्र की भांति गाया जाता रहा है । वंदेमातरम गाने पर ही अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को जेल की हवा खानी पड़ी है । भारत की आजादी के महत्वपूर्ण पचास साल जिसमें भारत की स्वतंत्रता का आन्दोलन गरमाया और तात्कालीन अंग्रजी सरकार की रातों की नहींद हराम कर दी । अंग्रेज शासकों के पास भारत के राजवंशों से लड़ने की पर्याप् क्षमता थी और उन्होने इसका उपयोग कर भारत के कई राजवंशा को अपनी पराधीनता में ले भी लिया था पर वे आमजन को उतनी हेकड़ी के साथा अपने साथ नहीं मिला पाए । आम आदमी छोटा हो, गरीब हो, श्रमिक हो, पढ़ा-लिखा हो, बैरिस्टर हो सभी कें मन में भारत को आजादी कराने की भावाना थी और वे इसे ‘‘वंदे मारतम्’’ गीत गाकर अपने अंदर और जाग्रत करते थे । अंग्रेज सरकार को भी इस गीत से भय लगता था । एक निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी झंडा हाथ में लेकर वंदेमातरम गाता हुआ अंग्रेज सिपाहियों क सामने सीना तनकर खड़ा हो जाता था । इस वंदेमातरम गीत के एक सौ पचास साल पूरे हाने पर लोकसभा में विशेश चर्चा की गई । चर्चा को गैर राजनीतिक ढंग से प्रस्तुत कि जान था पर वह राजनीतिक होती चली गई और स्वतंत्र भारत की राजनीति से प्रारंभ होकर वर्तमान राजनीति तक पहुंच गई । ऐसा आरोप लगा गया कि इस गीत के कुछ बंध अलग कर दिए गए जिससे गीत के पूर्ण भाव अभिव्यक्त नहीं हो पाए । गीत के कुछ भागों को कम तो किया गया हे ऐसा हमारे राश्ट गान के साथ भी हुआ, उसके भ्ी कुछ बंध कम किए गए पर इसके पीछे की मानसिकता को नहीं समझा गया । हालंकि समय परिस्थितियों के अनुसार संशोधन किए ही जाते हैं और विगत के निर्णयों पर आज मंथन कर उसे गलत ठहराया जाना शाय उचित नहीं होगा । बहरहाल वंदेमातरम को लेकर दस घंटे की चर्चा लोकसभा और राज्यसभा दोनों में हुई सभी राजनीतिक दलों के सांसदों ने इसमें भाग लिया और अपनी-अपनी बात रखी । वंदंमातरम को आमजन तक पहुंचा गया खासकर नई पीढ़ी को जिसके सामने भारत के स्वतंत्रता की लड़ाई के केवल किस्से ही सामने आए हैं । इस चर्चा के माध्यम से उसने एक बार फिर भारत के स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के बारे में सुना और महसूस किया कि उन्होने जिस स्वतंत्र भारत में अपनी जन्म लिया है वह कितना दुर्लभ है । स्वछंदता और स्वतंत्रता के बीच फर्क करने का अवसर भी उन्हें मिला । हमारे इतिहास में अत्याचार, अनाचार, दासता और सीना तानकर खड़े होने वाले वीर योद्धओं की कहानियां है जो अमरत्व को प्रदान हो चुके हें । वंदेमातम गीत उनको ही समर्पित है और भारत की स्वतंत्रता के बाद इसे संविधान में भी स्थान मिला है । लोकसभा में चुनाव प्रणाली में सुधार को लेकर भी चर्चा हुई । विपक्ष इसको लेकर हंगामा कर रहा था । बहस में विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरने का प्रयास किया और कई सुधार की बातें सामने रखीं । सरकार ने भी जबाव दिया अब देखना है कि इस मंथन से क्या मिलने वाला है । वैसे चुनाव आयोग विपक्ष के निशाने पर तो है ही । विपक्ष  एसआइआर से लेकर वोट चोरी के मामलों में भी चुनाव आयोग को घेरता रहा है । एसआईआर का कार्य निर्धारित राज्यों में चल भी रहा है । शनै-शनैः उसकी अंतिम तिथ बढ़ाई जा रही है वैसे कई राज्यों के कई जिलों में यह कार्य शत-प्रतिशत पूरा भी हो चुका हे पर जो अभी पूरा नहीं कर पाए है उन्हें मौका दिया जा रहा है । वैसे अगर यही अवसर पूर्व में भी दे दिया गया होता तो काम के बोझ से घबराकर जिनके बीएलओ का आकस्मिक निधन हुआ है तो शायद वे बच जाते । हर बार जब भी किसी बीएलओ की मौत हुई है उसे एसआइआर के कार्य का दबाब ही घोशित किया गया । अधिकारियों ने समय पर काम पूरा हो जाए इस चक्कर में अपने बीएलओ पर दबाव बनाया और यही दबाव उनकी मौत का कारण भी बना ।  चुनाव आयोग यदि पूर्व में ही इस सर्वे के लिए पर्याप्त समय दे देता तो काम आराम से बगैर कियी दबाव के हो जाता । बीएलओ की मौत के लिए वे अधिकारी ज्यादा जिम्मेदार है जो आफिस में बैठकर बीएलओ को दबाव बनाकर प्रताड़ित करते रहे । वैसे एसआइआर सर्वे एक महत्वपूर्ण कार्य है जो बारह राज्यों में पूर्णता की ओर है बाकी राज्यों में भी इसे किया जाना है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *