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भाजपा का चमत्कार : सांसद को प्रदेश अध्यक्ष और  विधायक को बनाया राष्ट्रीय अध्यक्ष

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार,

केराकत, जौनपुर यूपी

जातिगत दबाव कहें, समीकरण कहें, पीडीए का डर कहें या रणनीति कहें पर यह भाजपा का थिंक टैंक और भाजपा की राजनीती जो ब्राह्मण – ठाकुरों  की राजनीति से चलती रही है आज दो  पिछड़े नेताओं की 2014 के बाद से सत्ता पर काबिज होने के बाद से लगातार सवर्णो को भाजपा से किनारे लगाने का अंदरूनी  कार्य करती नजर आई है। विरोध के स्वर भी उठे है और स्वर कुचले भी गए है पर किसी को भनक तक नहीं लगी। यही क़ाम कभी इंदिरा के समय कांग्रेस नें भी शुरू किया था और आपको याद होगा तब कांग्रेस भी पीक पर थी और दूसरे दल पीडीए की राजनीति को लेकर आगे बढ़ रहें थे बस पीडीए की डर से कांग्रेस नें सवर्णो को ठिकाने लगा दिया और आज उसका हश्र जगविदित है। भाजपा भी इसी राह पर चल निकली है खैर अभी कुछ बदलाव के नाम पर मोदी – शाह खुद को डिफेंड करेंगे पर यह सत्य है की शीर्ष नेतृत्व उलट – पुलट के नाम पर बस सवर्णो की बलि लें रही और लगातार ओबीसी वर्ग को ही भाजपा बना रही जिसमें संघ की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है राजनीतिक विश्लेषको को। संघ की या तो चल नहीं पा रही ठीक से या फिर संघ लापरवाह बना बैठा है। खैर तरीका देखें तो उत्तर प्रदेश मे संगठन पर्व के नाम पर चुना गया नाम बहुत प्रभावी नहीं क्यूंकि इस बार नंबर था किसी ब्राह्मण चेहरे का जबकि  बिहार में प्रेस नोट से चुना गया कार्यकारी अध्यक्ष भी अब तक बहुत फिट नहीं लगा क्यूंकि वो विधायक है मतलब  यह एक चमत्कार है की सांसद को प्रदेश अध्यक्ष और  विधायक को बना दिया राष्ट्रीय अध्यक्ष। ऐसा लोकतंत्र केवल भाजपा में ही हो सकता है की सांसद को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया जाए और विधायक को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए। उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी 7 बार के सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री हैं। उत्तर प्रदेश में अध्यक्ष बनाने के जातीय और क्षेत्र के तमाम समीकरण देखे। संघ संगठन सभी से पूछा गया। बिहार में राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए कोई कवायद नहीं हुई। अंधेरे में एक प्रेस नोट से काम हो गया।  भाजपा के नए कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन 4 बार के एमएलए और नीतीश सरकार में मंत्री है । उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष को चुनने के लिए लंबी कवायद हुई दूसरी तरफ़ राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने का काम भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड ने एक प्रेस नोट के माध्यम से ही कर लिया।

             बहुत लम्बी प्रतीक्षा के बाद भाजपा ने बिहार के नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। 45 वर्षीय नितिन 5 बार के विधायक हैं , 12वीं पास हैं , वर्तमान में नीतीश सरकार में मंत्री हैं। दो साल लम्बी प्रतीक्षा तथा इतने बड़े बड़े नामों और चेहरों को छोड़कर नितिन नबीन जैसे तीसरी चौथी पीढ़ी के अनाम से नेता में बीजेपी आलाकमान ने ऐसे कौनसे गुण देख लिए , यह सोचकर आश्चर्य होता है

शाह मोदी निरन्तर चौंकाते रहे हैं यह सच है लेकिन शिवराज सिंह चौहान , मनोहरलाल खट्टर , सुधांशु त्रिवेदी , देवेंद्र फडणवीस आदि अनेक बड़े बड़े नाम उछालकर नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष पद पर लाना कुछ जमा नहीं। आखिर बीजेपी देश दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है , कोई मजाक नहीं ! आलाकमान उन्हें ही भविष्य में पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाएगी या कोई और लाएगी , यह देखना बाकी है। वैसे एकदम नए नाम को इस उम्र में सामने लाना सचमुच आश्चर्य का विषय है ? नितिन नबीन बिहार की राजनीति के अनुभवी नेता हैं। वे पांच बार विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2006 में पिता के निधन के बाद उन्होंने उपचुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। इसके बाद 2010, 2015, 2020 और अब 2025 में भी उन्होंने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की। 9 फरवरी 2021 को नीतीश कुमार सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में नितिन नबीन को पहली बार पथ निर्माण मंत्री बनाया गया था।

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