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“दुकानदारी”

सज्जन सिंह शहर में कोई    बड़ा नाम तो नहीं था लेकिन विश्वास का नाम था। उनकी एक छोटी सी दुकान हुआ करती थी। खूब चलती थी। कोई सामान शहर की बड़ी से बड़ी दुकान पर नहीं मिलता तो सज्जन सिंह की दुकान पर मिल जाता। यही वजह थी कि सारा शहर उन्हे जनता था। सज्जन…

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कभी मौन भी : पूनम पाठक

कभी मौन भी हो सकता है बेअसरभले स्वर अनोखा भाषा अलगमौन रहकर भी देखा है कभीक्योंकि इसकी प्रज्ञा प्रखरआंखों की भी जुबां होती हैफिर भी मौनी पर होता प्रहारकब तक मौन रह सकता है कोईभला आधुनिक दुनिया मेंपल-पल सहता रहे कष्टमहसूस ना हो किसी को तनिकआखिर कब तक ऐसा करे कोईमौन रहने पर दिल टूटता…

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विश्व कीर्तिमान हेतु भारतरत्न काव्य अनुष्ठान में किया 301 कवियों ने कविता पाठ

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होगा गाजियाबाद,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य एवं संस्कृति के लिए समर्पित संस्थान के द्वारा 21 नवम्बर को ऑनलाइन कविता का महाकुम्भ आयोजित किया जिसमें भारत सहित विश्व के बीस देशों के रचनाकारों ने डुबकी लगाई।इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के संयोजक एवं संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डॉ राजीव कुमार पाण्डेय ने…

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पिता

मैं सातवीं कक्षा में था, आम लड़कों की तरह खेलता, पढ़ता और मस्त रहता था, बहुत मित्र थे मेरे, इस गली से उस गली तक , फिर पूरे शहर तक मैं जहाँ भी जाता, लोग मुझे जानते थे और मैं उन्हें, मन में एक अजीब सी मस्ती छाई  रहती थी. एक दिन मैं स्कूल से…

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कौन जिम्मेदार?

ये धुआं दिवाली के बाद का  मुझे तड़पा रहा प्रदूषण चरम पर  सांसे अटके बार-बार इन पटाखों के शोर ने धुआं- धुआं कर दिया  ना दिखे  चांद ना दिखे सितारे प्रकृति की सुंदरता गायब  बनावटी पटाखों से किसी के हाथ में लगे  किसी की आंखों में लगी  ये पटाखों की लौ  पशु- पक्षी छिप रहे…

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जनहित में जो अब जरूरी हो गया है

डॉक्टर सुधीर सिंह जनहित में जोअब जरूरी हो गया है आदमी का आचरण ही बदल गया है, खून का रिश्ता भी  पराया हो गया है। जिनको लोग कल अपना समझते थे, वही छिपकर  आघात  करने लगा है। घर-बाहर जालसाजों  का  जमावड़ा, ईमानदारी  का  मजाक उड़ा  रहा है। चरित्रवान  पर  व्यंग्य-वाण छोड़ कर, खुलेआम उनको  घायल …

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गुरुर ब्रहमा गुरुर विष्णु

जहाँ सिर श्रृद्धा से झुक जाते है अपने शिक्षक सभी याद आते हैं माँ मेरी प्रथम शिक्षिका है मेरी जीवन की वही रचियेता है पिता से धेर्य सीखा और सीखी स्थिरता चुपचाप जिम्मेदारी वहन करना और मधुरता दादी दादा नानी नाना से सीखा मिलजुल रहना प्यार बाटना पडता जीवन में हर हाल में पाठ सिखाया…

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“स्वर्ग का द्वार”

स्कूल कई महीनों से बंद थे। बच्चे घर में रह कर परेशान हो गए थे। यही कारण था कि घर में दिन भर कोहराम मचा रहता। दिन भर चीखना चिल्लाना, मारना पीटना, रोना धोना बस यही हो रहा था। गांव से दादाजी आए तो उन्हें यह सब देखकर बहुत दुख हुआ। उन्होंने बच्चों को बुलाकर…

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हृदय परिवर्तन

“अच्छा माँ, मैं चलता हूं ऑफिस को लेट हो रहा है। शाम को थोड़ा लेट आऊंगा आप और पापा टाइम से डिनर कर लेना।” अंकित ने ऑफिस का बैग हाथ में पकड़ते हुए कहा।          “ठीक है बेटा, घर आते टाइम कुछ सामान भी लेते आना। समान के लिस्ट की पर्ची तुम्हारे बैग में रख…

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राष्ट्रीय एकता दिवस

सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारत के लोह पुरुष के नाम से जाना जाते हैं ।सरदार वल्लभ भाई पटेल जी भारत के पहले उपराष्ट्रपति और गृहमंत्री थे। उन्हीं के जन्मदिवस  के उपलक्ष में प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।  भारत को राष्ट्र बनाने में सरदार जी की…

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