Special Article
महाराणा प्रताप: स्वाभिमान का प्रतीक और स्वतंत्रता का अमर सेनानी
महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि भारतीय आत्मगौरव के प्रतीक थे। जब सारे राजपूत मुग़ल दरबार में झुक गए, तब प्रताप ने जंगल में रहना स्वीकार किया लेकिन दासता को नहीं। हल्दीघाटी की मिट्टी आज भी उनके पराक्रम की गवाह है। उनका जीवन सिखाता है कि स्वतंत्रता सुविधाओं से नहीं, संकल्प और त्याग से…
बेलगाम आतंकवाद एक वैश्विक समस्या बन जाएगी
पाकिस्तान के घरेलू आतंकवाद के बारे में सबूतों की कोई कमी नहीं है। इसने IC-814 का अपहरण करने वालों का साथ दिया, 26/11 मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों को पनाह दी, दुनिया के सबसे वांछित आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को अपनी सैन्य अकादमी से एक मील से भी कम दूरी पर एक सुरक्षित पनाहगाह…
आज के दिन ही उगा था हिंदी मीडिया का सूरज
(हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दी का सफर) 19 वीं सदी के कलकत्ता की चहल-पहल भरी गलियों में, घोड़ों की गाड़ियों के शोर और ताज़ी चाय की खुशबू के बीच, एक शांत क्रांति आकार ले रही थी। 30 मई, 1826 को उदंत मार्तंड नामक एक मामूली साप्ताहिक का प्रकाशन शुरू हुआ था-जिसका अर्थ है “उगता हुआ…
आतंकवाद के जड़मूल नाश से पूर्व यह’ ऑपरेशन सिन्दूर’ रुकेगा नहीं : मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक)
22 अप्रैल को हुआ पहलगाम (जम्मू कश्मीर में) हमला जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। उन परिवारों को या कहें पूरे देशवासियों को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया जो जीवन भर दर्द का अहसास कराता रहेगा किन्तु उन परिवारों के साथ पूरे देश की जनता की आवाज एक सुर में उठने…
पत्रकारिता : चुनौती एवं भविष्य : विजय गर्ग
हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर यदि सामाजिक सरोकार रखने वाली निष्पक्ष पत्रकारिता तथा पीत पत्रकारिता के बारे में बात न हो,तो हिंदी पत्रकारिता दिवस की महत्वत्ता का आंकलन नही किया जा सकता। वर्तमान परिदृश्य में पीत पत्रकारिता की प्रबलता और स्वार्थसाधनी राजनीति निजी महत्वकांक्षा के चलते पत्रकारिता मिशन न रहकर व्यवसाय बन चुका है।…
भारतीय शौर्य के आगे झुका पाकिस्तान, पीओके वापिस देने का बढ़ा दबाव …! पंकज सीबी मिश्रा
पंकज सीबी मिश्रा / पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक जौनपुर यूपी भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ आतंक के विरुद्ध जारी युद्ध को फिलहाल अमरीकी हस्तक्षेप के बाद अस्थाई तौर पर रोक दिया है। भारतीय सोशल मीडिया पर भारत के लोगो का गुस्सा स्पष्ट देखा जा सकता है । भारत ने केवल तीन दिन में पाकिस्तान…
कब तक बचोगो पाकिस्तान……: कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
राजनीतिक सफरनामा बच गया पाकिस्तान, लगता है उसकी किस्तम ही अच्छी थी, वरना अब तक तो वहां तिरंगा लहरा रहा होता । हम तो पूरी तरह तैयार भी थे आम लोगों ने भी मानसिकता बना ली थी कि रोज-रोज की झंझट से अच्छा है कि एक बार में ही निपटा लो । हम भारतवासी…
हिंसा की दीमक के खिलाफ लड़ना ही हमारा मूल उद्देश्य होना चाहिए
कश्मीर और हिमालय हैं भारत के अभिन्न अंग कश्मीर जाना भारत के किसी भी अन्य राज्य अथवा शहर की तुलना में जाने से बहुत अलग तरह का अनुभव है। पर्यटकों और उनके कश्मीरी मेजबानों के बीच एक गहरा रिश्ता है और उनके बीच एक गंभीर अंतर भी होता है। पर्यटकों का स्वागत करते हुए, घाटी…
मजदूर दिवस: एक दिन सम्मान, साल भर अपमान
मजदूर दिवस: एक दिन सम्मान, साल भर अपमान मजदूर दिवस केवल एक तारीख नहीं, श्रमिकों की मेहनत, संघर्ष और हक की पहचान है। 1 मई को मनाया जाने वाला यह दिन उस आंदोलन की याद है जिसने काम के सीमित घंटे, सम्मानजनक वेतन और श्रम अधिकारों की लड़ाई लड़ी। लेकिन भारत जैसे देशों में मजदूर…
“पहलगाम में आतंकी हमला: राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय”
“पहलगाम में आतंकी हमला: राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय” प्रश्न पूछने के अवसर भी आएँगे, अभी राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय है। राष्ट्र सर्वोपरि। हाल की पहलगाम घटना में एक हिंदू पर्यटक को आतंकवादियों ने धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि भारत की…
