हालात की सौग़ात : आरती परीख
बिमल खिड़की के पास बैठा बाहर झाँक रहा था। हवा धीरे-धीरे परदों से खेल रही थी। आसमान पर बिखरे बादल धूप को ढक रहे थे, जैसे कोई अनकही चुप्पी घर पर फैल गई हो। लेकिन बिमल का मन इस चुप्पी से ज़्यादा भारी था— कल रात से भीतर उमड़ा तूफ़ान अब भी थमा नहीं था।…
