जीवन का आनँद होने न पाए मँद
(कविता मल्होत्रा) दिशाहीन दौड़ मत दौड़ोअपनों का हाथ मत छोड़ो✍️जैसे-जैसे लॉकडाऊन खुलने लगा है, वैसे-वैसे मार-काट, चोरी-डकैती और आपसी भेदभाव के सर्प सर उठाने लगे हैं।कोरोना-काल के इतने बड़े बवंडर के बाद भी लोगों को अराधना का साफ आसमान दिखाई नहीं पड़ रहा है।क्या दीप जला कर मंत्रोच्चारण करने से ही ईश्वर की अराधना संपूर्ण…
