Latest Updates

आसमान पर उड़ें, पर जमीन से जुड़ें : मनमोहन शर्मा ‘शरण’

सर्वप्रथम आप सभी को दशहरा पावन पर्व  की बहुत बहुत बधाई  एवं अनन्त शुभकामनाएं ।  प्रत्येक वर्ष अपने पर्व–त्यौहारों को श्रद्धापूर्वक हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं ।  अच्छी बात है किन्तु ज्यादा जरूरी यह है हमारे लिए कि पर्वों–त्यौहारों को मनाएँ पर उसके महत्त्व–महिमा को समझने का प्रयास करें और अपनी जीवन शैली में आत्मसात…

Read More

आस मधुरतम

प्रिये! तुम विराट और मैं लघु गात,          अभिलषित तेरे उर सिंधु की। मद्धम होता उर प्रज्वाल जब,       बुझती चिर प्यास इस बिंदु की। अश्रु बिंदु मेरे अनुनय के,       जाते जब करुणा में हिलमिल। नेह सिंचित हो दीपक फिर,       जल उठता मुग्ध सा झिलमिल। लास उल्लास रहित जीवन,         यह पल-पल का…

Read More

हिन्दी दिवस (गीत)

बाज उठी होठों पर, आज मेरी हिन्दी। ममता के ऑचल में, माथे की बिन्दी। गाती है गली गली ,सावनी सुहानी। फागुनी हवा में ,रंग घोल रही पानी। सरमाते अगहन की, मुस्कान मंदी।                बाज उठी———— छायी मायुसी में ,रंग भर देती है। रूठे हुए नैनों में,ठंढ भर देती है। बहके हुए मन में,प्यार की कालिंदी।…

Read More

‘जीवन’ का दुरूपयोग‌

एक तरफ तो हम कहते हैं कि जल ही जीवन है और तो वही दुसरी तरफ हम अपने दैनिक जीवन में निरंतर जल संसाधनों का दुरूपयोग कर उनका दोहन करते जा रहे हैं। जल सभी के लिए अति आवश्यक है। जैसे मानव जीव जंतु पशु पक्षी पेड़ पौधे  फसल उत्पादन आदि सभी के लिए अति…

Read More

मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देकर भगाएंगे अवसाद !

मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां ,कार्यस्थल पर तनाव निवारण कार्यक्रम, हिंसा निवारण कार्यक्रम इत्यादि को संचालित कर के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं । इससे एक शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त व्यक्ति का निर्माण एवं एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता हैं ।  एक शारीरिक एवं मानसिक रूप…

Read More

गंतव्य संस्थान द्वारा वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान समारोह आयोजित किया

मकर सक्रांति (15 01 2024 ) के शुभ अवसर पर गंतव्य संस्थान द्वारा वरिष्ठ नागरिक सम्मान समारोह  का आयोजन संस्थान के मुख्यालय 368, प्रधान मार्ग , निरंकारी कालोनी, दिल्ली- 9 पर किया गया जिसमे धीरपुर क्षेत्र के 50 महिला व पुरूष बुजुर्गों को सम्मानित किया गया । धर्मगुरु परम् श्रधेय पं चन्द्र वल्लभ बुडाकोटी जी…

Read More

लव आजकल

कविता मल्होत्रा (स्तंभकार उत्कर्ष मेल) यदि किसी बच्चे को जन्म के तुरँत बाद केवल ऊपरी ख़ुराक पर किसी हिंसक व्यक्ति के सान्निध्य में पाला जाए तो उसका व्यक्तित्व कैसा होगा?  बिन माँ के बच्चे जैसा ही होगा ना?  लेकिन हम सब तो भारत माता के बच्चे हैं फिर हमारे वजूदों में इतनी व्याधियाँ कहाँ से…

Read More

दीवाने हो दीवाने सा व्यवहार करते हो

सताते हो कभी मृदुल-मनुहार करते हो- दीवाने हो दीवाने सा व्यवहार करते हो.. नज़रिया कातिलाना अदाएं हैं निराली- अपनी बातों से दिल पर प्रहार करते हो.. लड़ते-झगड़ते हो पर साथ मेरा देते हो- लगे हरकतों से जैसे मुझे प्यार करते हो.. तेरी शरारत और चाहत मुझको भाती- मन पर जवां इश्क के आसार करते हो…..

Read More

नफरतों की क्यों खड़ी दीवार

नफरतों की क्यों खड़ी दीवार तेरे शहर में। ढूँढता मैं फिर रहा हूँ प्यार तेरे शहर में। गाँव जैसी बात होती ही नहीं है आपसी हो गया हूँ मैं तो बस लाचार तेरे शहर में। देखता हूँ मांगते हैं सब दुआ ही या दवा हैं सभी ही लग रहा बीमार तेरे शहर में। चीज़ हर…

Read More

💐 जिन्दगी-अनबूझ पहेली 💐

जिन्दगी इतनी सरल तो कभी भी नहीं थी,कठिनया ऋजु भी रही।लोगों के लिये तो यह ऐसी पहेली जिसको सब ने अपने अपने ढंग से हल करना चाहा,पर वो बिना हल हुएफिसलती रही,मचलती रही।जिन्दगी के अर्थ कोजिसने भी सिर्फ अर्थ में ही ढूंढना चाहा,उसकी जिन्दगी अर्थहीन हो कररह गई।जिन्दगी के अर्थ का वास्तविक मज़ा तोसन्तुष्टि में…

Read More