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कॉकरोच आंदोलन: गांधीवाद की छाया या डिजिटल युग का नया प्रतिरोध?

– डॉ. प्रियंका सौरभ भारत में जब भी कोई नया जन-आंदोलन उभरता है, उसे पुराने वैचारिक फ्रेमों में समझने की कोशिश होती है। कॉकरोच आंदोलन के साथ भी यही हुआ है। कुछ लोग इसे युवाओं के असंतोष की नई अभिव्यक्ति मानते हैं, तो कुछ इसे गांधीवादी परंपरा की छाया में पढ़ने का प्रयास कर रहे…

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दोहों के मनके

अपना अपना ज्ञान है,सब जग रहा बखान। माने खुद को ही बड़ा,दें न किसी को मान।। देखो सजा बजार है , दुनिया में सब ओर। अपना अपना ज्ञान वे , बेच रहे पुरजोर ।।  ज्ञानी सब बनते फिरें , सच से होकर दूर।  अपना अपना ज्ञान ले, फिरते मद में चूर ।।  राम और रहमान…

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कोरोना को हराना है

चाहे छाये हर और सूनापन,मिलना हो जाये एक दूजे से कम। कितना भी मन घबराए,चाहे कितनी भी दहशत बढ़ती जाए।  *करना है एक ही प्रण,किसी भी तरह कोरोना को हराया जाए।*  व्यवसाय कैसे चल पाएंगे और अब कैसे बच्चे पढ़ पाएंगे। चाहे कितनी भी विपदाएं आये,घर मे मन कितना भी घबराए।  *करना है एक ही…

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सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है,

डॉक्टर सुधीर सिंह सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है, पाकिस्तान तब थड़थड़ाने लगता है। भारत का सामना पाक कैसे करेगा? जो भीख  मांगकर  भूख मिटाता है। जिसकी आदत  भिक्षाटन करने की, हिंदुस्तान को वह आंख दिखाता है। भीख की झोली खाली देख भिक्षुक, भूख से तब वह मिमियाने लगता है। दुनिया की नजर में  बेनकाब…

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सिद्ध बहुत तन की गुफा  (दोहे)

साधे तो सधता सभी, योग बड़ा विज्ञान | मन की इच्छा पूर्ण हो, आ जाये संज्ञान || मन की आंखें खोल तो, देख जगह संसार | वरना सब कुछ सो रहा, जो तेरा अधिकार || सांसों में है भेद सब, सब सांसों का सार | भार समर्पित भाव यह, जीवन का आधार || योग चेतन…

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अब नहीं रही

घुमंतु परिवार में भीख के रोजगार में, वह चलने से लाचार टांगें  अब नहीं रहीं। रीते घड़े की पहेलियां दाना खोजती उंगलियां,  वह पेट की पीड़ाएं अब नहीं रहीं। दिन में लकड़ी बीनना रात के लिए सहेजना,  वो आग तापती रातें  अब नहीं रहीं। कलुआ कई दिनों से आया नहीं शहर से,  वो बेटे को…

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चांदनी मुस्कराई तुम्हारे लिए,

चांदनी मुस्कराई तुम्हारे लिए, वर्णमाला गुनगुनाई तुम्हारे लिए, तुम्हारे आगमन पर सखें, मेरे हृदय की बधाई तुम्हारे लिए। चांद बन तुम जियो, नेह की नूतन छुवन बन जियो, भावना से भरे इस हृदय में, तुम हमारे नयन में सुमन बन जियो। मेरे परिचय बन तुम जियो, मेरा मुकाम बन तुम जियो, जिंदगी अपनी पूरी सफल…

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मासूमियत से मशरूफियत

इस दुनिया में मासूमियत से जब हम- मशरूफियत की और बढ़ते हैं लगता है हर रिश्ते के मायने बदल जाते हैं पहले ज़रा सी चोट लगने पर भी रोते थे अब दिल पे ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराते हैं यारो संग उठना बैठना और खाना पीना , जश्न में हंसना नाचना और गाना बजाना अब…

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अबकी बार हुए न पार

जी हाँ, अबकी बार 400 पार का नारा इतनी पहले से और आखिरी वोटिंग तक दिया जाता रहा मेन मीडिया जिसको कुछ लोगों द्वारा गोदी मीडिया भी कहा जाने लगा है, ने भी बढ़ चढ़कर समर्थन किया और नारे की आवाज को बुलन्द करने में अपनी भूमिका निभाई। समाचार चैनलों की वार्ता में, ज्योतिषीय विश्लेषण…

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राम भजन- जा ये कबुतर,कहना प्रभु श्रीराम से

 गीतकार-लाल बिहारी लाल, जा ये कबुतर धाम अयोध्या, कहना प्रभु श्रीराम से । हम आयेंगे चरण में तेरे, सेवक बन हनुमान से। जा ये कबुतर धाम…….. बरसों बरस के बाद बना है, भव्य मंदिर  श्रीराम  का । जगह जगह अब चर्चा है , मेरे प्रभु जी श्रीराम  का। घर-घर गाओं महिमा सुनाओं अयोध्या पावन धाम …

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