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आस मधुरतम

प्रिये! तुम विराट और मैं लघु गात,          अभिलषित तेरे उर सिंधु की। मद्धम होता उर प्रज्वाल जब,       बुझती चिर प्यास इस बिंदु की। अश्रु बिंदु मेरे अनुनय के,       जाते जब करुणा में हिलमिल। नेह सिंचित हो दीपक फिर,       जल उठता मुग्ध सा झिलमिल। लास उल्लास रहित जीवन,         यह पल-पल का…

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कटी पतंग

एक एहसास लिए मोनू से मिलने गई थी मैं ,लेकिन जब वापस जाने के लिए निकली तो अपने आप को कटी पतंग सी महसूस कर रही थी।अपने ही बोझ से ढह रही थी में क्योंकि प्यार की पतंग को मिलता  हवा का सहारा आज खत्म हो चुका था।गिरते गिरते कहां पहुंचाया था प्यार के इस…

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बुर्खा और घूँघट प्रथा —-एक सामाजिक बुराई

कभी तो देखे अपनी माँ को, जो बुर्खा मुख पर ओढ़े थी , कभी बोलती बिना जुबां के, माँ कब तू मुख खोलेगी ! क्या मेरी जवानी और बुढ़ापा तेरी तरह ही गुजरेगा , जो तेरे था साथ हुआ, क्या वो सब मुझपर बीतेगा ! कैसे गर्मी धूप में भी तू, सर ढक कर के…

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उधम सिंह सरदार: एक गोली, सौ सालों की गूंज

उधम सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि एक विचार थे—संयम, संकल्प और सत्य का प्रतीक। जलियांवाला बाग़ के नरसंहार का प्रत्यक्षदर्शी यह वीर 21 वर्षों तक चुपचाप अपने मिशन की तैयारी करता रहा और लंदन जाकर ओ’डायर को गोली मारकर भारत का प्रतिशोध पूरा किया। उनकी चुप्पी न्याय की गर्जना थी, जो आज भी…

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बदलते ज़माने की रंग बदलती होली

आज हम जो होली मनाते हैं, वह पहले की होली से काफ़ी अलग है। पहले, यह त्यौहार लोगों के बीच अपार ख़ुशी और एकता लेकर आता था। उस समय प्यार की सच्ची भावना होती थी और दुश्मनी कहीं नहीं दिखती थी। परिवार और दोस्त मिलकर रंगों और हंसी-मजाक के साथ जश्न मनाते थे।  जैसे-जैसे समय…

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लाॅकडाउन

                 इलाहाबाद यानी प्रयागराज अपने आप में एक सम्पूर्ण और गौरवशाली नगरी रही है। महानगरों की तुलना में बिल्कुल शांत शहर मगर शिक्षा के क्षेत्र में उनसे कहीं आगे।यह शहर प्रतिभाओं की नगरी भी कहा जाता है। किसी समय यहां बाहरी लोग भी यदि पानी मांग लें तो उन्हें पानी के साथ साथ कुछ मीठा…

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सावन में

मिला सानिध्य शिव जी का हमें उपहार सावन में   चले हैं आज मिल सारे लिए मनुहार सावन में।।   सुनो जी आज बम लहरी रही है गूंँज धरती पर।   चली कांँवड़ लिए टोली करे जयकार सावन में।।   बहुत भोले हमारे शिव यही कहते सभी ज्ञानी।   चला जो पास है जाता करें…

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यादे यूँ भी पुरानी चली आईं (गीत)

मन की बाते बताये तुम्हें क्याहै ये पहली मुहब्बत हमारीभले दिन थे वो गुजरे जमानेमीठी मीठी सी अग्न लगाई हम तो डरते हैं नजदीक आकेजान ले लो – ऐ जान हमारीकब से बैठे दबाये लबो कोकब से यारी है गम से हमारी चढगयी सर आसमाँ तकये नशीली रात खुमारीबजते घुघरू से आवाज आईदेखो कैसी चली…

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काम के वक्त मोबाइल से दूरी है जरूरी

 डॉ. नन्दकिशोर साह (स्वतंत्र पत्रकार) कई बार आप सोचते होंगे कि आज आपने दिनभर ऑफिस में काम किया उसके बावजूद काम पूरा कैसे नहीं हुआ? आज आपने दिन भर पढ़ाई की लेकिन फिर भी अध्याय खत्म क्यों नहीं हुआ? इसकी वजह यह है कि हमने सिर्फ दिखावे के लिए पढ़ाई या वह काम किया। हमारा…

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ये हितैषी बच्चियों के

                      भगवती प्रसाद गेहलोत अलसुबह कड़कड़ाती ठंड में धुंध अपनी चादर समेटने की मशक्कत कर रही थी ।  मैले-कुचले  कपड़े व  अधफटे चप्पल  बिखरे बाल लिए दो बच्चियाँ अपने डेरे से सीधे उठकर झोला लिए बस स्टैंड आती है रात्री को भजन संध्या में फैंके गए झूठन वाले कचरे के ढेर से पन्नियाँ, प्लास्टिक, कुछ…

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