मिला सानिध्य शिव जी का हमें उपहार सावन में
चले हैं आज मिल सारे लिए मनुहार सावन में।।
सुनो जी आज बम लहरी रही है गूंँज धरती पर।
चली कांँवड़ लिए टोली करे जयकार सावन में।।
बहुत भोले हमारे शिव यही कहते सभी ज्ञानी।
चला जो पास है जाता करें उद्धार सावन में।।
चढ़ाकर बेल पत्ते को करें सब अर्चना उन की।
लगे वे आज आये हैं सहज साकार सावन में।।
सभीको आस उनसे है करें विनती झुकाए सिर।
लगा दो पार ये नैया करो उपकार सावन में।।
कहें हम पीर ये अपनी हमारे एक तुम ही हो।
सदा रटते यही सारे सुनो सरकार सावन में।।
चले सब आस ये लेकर करोगे आप सब पूरा।
करो विनती हमारी पूर्ण अबकी बार सावन में।।
डॉ सरला सिंह “स्निग्धा”
दिल्ली
