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आर्य समाज मधुबनी बिहार का शताब्दी समारोह

साधना पथ , (प्रथम भाग) पुस्तक का विमोचन         निर्णय ग्रंथों के प्रणेता, मिथिला विभूति, आर्य समाज के प्रकांड विद्वान् पण्डित शिव शंकर शर्मा काव्य तीर्थ जी से  प्रभावित होकर दरभंगा जिले के कमतौल ग्राम में आर्य समाज की स्थापना हुई थी। आर्य समाज कमतौल के प्रधान जी मधुबनी जिले के श्री त्रिवेणी लाल जी के…

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वृद्धाश्रम नहीं, सम्मानाश्रम चाहिए

लेखक : विजय गर्ग समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुज़ुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है। आज जब जीवन की गति तेज़ हो गई है, रिश्तों में व्यावहारिकता ने भावनाओं की जगह ले ली है, तब हमारे सामने एक दर्दनाक सच्चाई उभरकर आई है — वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या।…

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रोजगार संकट :भारत के आईटी क्षेत्र में छंटनी की लहर

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव से भारत के सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में गहरे संरचनात्मक परिवर्तन, पर क्या तैयार है देश का श्रमबल? भारत के आईटी क्षेत्र में हाल की छँटनियाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वचालन के दौर की अनिवार्य वास्तविकता हैं। यह केवल रोजगार संकट नहीं, बल्कि कौशल और तकनीक के पुनर्संतुलन की प्रक्रिया है। सरकार,…

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आतंक की फैक्ट्री बनते शिक्षण संस्थान, अल फलाह जैसे और ना जाने कितने…!

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी अल्पसंख्यक शिक्षा और सीबीएससी एजुकेशन के नाम पर भारत के शिक्षा व्यवस्था का नाश किया जा रहा। कई स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी शिक्षा के नाम पर धंधा कर रही और अब अल फलाह जैसी यूनिवर्सिटीयां डॉक्टर के नाम पर आतंकवादी तैयार करवा रही। माइंड वाश करने की…

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दिल्ली धमाका से दहशत में  लोग

राजनीतिक सफरनामा दिल्ली धमाका से दहशत में  लोग :   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव दिल्ली धमाके ने दहशत का माहौल बना दिया । विगत अनेक वर्शो से दिल्ली ऐसे धमाकों से दूर थी । इससे भी ज्यादा हैरान करने वाला आतंकवादियों को वह माड्यूल है जिसमें पढ़े-लिखे डाक्टर शामिल हैं । पूरी गैंग डाक्टरों की ही है…

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जिग्मे सिंगये वांगचुक : भूटान के आधुनिक निर्माण और भारत-भूटान मित्रता के शिल्पकार

भूटान के पूर्व राजा जिग्मे सिंगये वांगचुक (K4) ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व से देश को आधुनिकता, लोकतंत्र और सांस्कृतिक संरक्षण के संतुलन पर खड़ा किया। उन्होंने सकल राष्ट्रीय सुख को विकास का मूल दर्शन बनाया और भारत के साथ जलविद्युत कूटनीति के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी। भारत-भूटान संबंधों को उन्होंने पारस्परिक विश्वास…

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‘चालीस रुपये’

            “सीमा आज स्कू्ल नहीं गयी ?”      “नहीं चाची ,आज काम करते देर हो गयी।”      सीमा ने कुछ सकुचाते हुए बंगालिन चाची को जवाब दिया ।         बंगालिन चाची सारे बच्चों के लिए उनका यही नाम था। वे एक लम्बी सांँवली-सी महिला थीं लेकिन उनका चेहरा अनायास आकर्षित करता हुआ था। धर्म से…

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फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ: नौकरशाही, सत्ता और संवेदनहीनता

जब शासन सेवा से अधिक अहंकार बन जाए — फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ, सत्ता का चेहरा संवेदना का शून्य बनकर, लोकतंत्र को मशीन बना देता है जहाँ नियम ज़्यादा हैं और रिश्ते कम। – डॉ. सत्यवान सौरभ हमारे समय की सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं है कि समाज अन्याय से भर गया है, बल्कि…

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शिक्षित वर्ग में जातीय पूर्वाग्रह का स्थायित्व

संविधान ने समानता और सामाजिक न्याय के आदर्शों को स्थापित किया, परंतु भारतीय समाज में जाति चेतना अभी भी गहराई से विद्यमान है। शिक्षित और शहरी वर्गों में यह चेतना प्रत्यक्ष भेदभाव के बजाय सूक्ष्म रूपों में प्रकट होती है—जैसे रोजगार, विवाह और सामाजिक नेटवर्क में। आर्थिक प्रगति और आधुनिकता ने जाति को कमजोर किया…

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बिहार चुनाव : कब मिलेगी बिहार को अराजकता से आजादी…

पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषण एवं पत्रकार जौनपुर यूपी बिहार को अराजकता से आज़ादी कब ! यह प्रश्न हर उस व्यक्ति के जहन में है जो लालूराज का बिहार देखा है। आज यह आजादी जैसा महत्वपूर्ण स्लोगन किस बुनियाद पर बना है और कहां, जो आज लगभग बहुत से जगह पर इस्तेमाल होता है।…

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