Latest Updates

फिर हंगामे की भेंट चढ़ गया ससंद का सत्र : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

राजनीतिक सफरनामा
एक बार फिर बाबरी मस्जिद का भूत बाहर निकल आया है । संभवतः हुमायुं कबीर ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए बाबरी मस्जिद के नाम से एक नई मस्जिद बनाने के लिए नींव रख दी है । विगत छै महिनों से इसको लेकर चर्चा चल रही थी…….उसने भी इस पूरी प्रक्रिया को लेकर लोगों को इकट्ठा किया और फिर उसकी नींव रखी । सभी जानते और समझते हैं कि यह धर्म की जंग नहीं बल्कि सियासी जंग है । अपने आपको हाइलाइट करने और वोट पाने के लिए किए जा रहे इन कदमों से सांप्रदायिक माहौल ही बिगड़ता है जो बिगड़ भी रहा है । वैसा यह तो सच है कि वो अपनी धार्मिक आस्था के लिए मस्जिद बना सकते हैं पर सच यह भी है कि उस मस्जिद का जो नामकरण किया गया वह बहुसंख्यक लोगों के लिए नापसंद है और उसका कोई औचित्य भी समझ में नहीं आता । अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद को बाबर ने बनवाया था ऐसा इतिहासकार बताते हैं इसलिए उसका सम्बोधन बाबरी मस्जिद किया जाता रहा है…….यह कोई विशेष नामकरण नहीं था जिस किसी को धार्मिक रूप से कोई फायदा हो……..फिर नई मस्जिद बनाने का कार्य किया जाना तो समझ के परे हे ही…….यूं भी अयोध्या में रामलला के संबंध में निर्णय देते समय माननीय उच्च् न्यायालय ने नई मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में जगह आवंटित करने का निर्देश दिया था……जिसके अनुसार अयोध्या में मस्जिद निर्माण हेतु जगह दे भी दी गई है….तो वहां मस्जिद बनती और उसका नामकरण बाबरी मस्जिद कर दिया जाता तो थोड़ बहुत जायज कहलाया भी जा सकता था…….पर पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाना…….किस औचित्य को इंगित करता है……इसका उत्तर अभी तक नहीं मिला और न ही मिलेगा । अयोया में सरकार द्वारा दी गई जमीन अीी यूं ही पड़ी है, मतलब वहां काम प्रारंभ करने में किसी ने कोई रूचि नहीं ली पर अचानक पश्चिम बंगाल में मस्जिद बनने लगी । बहुत सारे लोगों को बुलाकर भूमि पूजन किया गया फिर बहुत सारे लोगों को बुलाकर उसका निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया । समुदाय विशेष के लोगों ने पैसा भी दिया और आवश्यक सामग्री भी भेंट की । भारत के लोग बाबार को लुटरा अपराधी मानते हें……उसने भारत को बहुत लूटा भी है और यहां के मंदिरों को भी तोड़ा है….तो स्वाभाविक है कि कोई भी भारतीय बाबर के प्रति सदभाव तो रखेगा नहीं, यही कारण है कि केवल नाम के कारण इस मस्जिद का विरोध हो रहा है । पर हुमायु कबीर तो शायद बखेड़ा ही खड़ा करना चाहते हैं तो कर रहे हें, उनको लगता हे कि इससे वे सुर्खियों में बने रहेगें। पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव से इसे जोड़ कर देखा जाना गलत भी नहीं है । हुमांयु कबीर जो इस मस्जिद बनाने के लिए पहल कर रहे हैं और इसका नेतृत्व भी कर रहे हें…..वो तो राजनीतिक व्यकि् हैं हीं……टीएमसी के विधायक रहे इसके पहले वे भाजपा से भी जुड़े रहे और कांग्रेस से भी । राजनीति में महत्वाकांक्षाएं बढ़ती हें तो कुछ भी करने की मानसिकता को बल मिलता है और यही हुमांयु कबीर कर रहे हैं । पश्चिम बंगाल में चुनाव होने वाले हैं…….सभी राजनीतिक दल इसकी तैयारी में लगे हैं और हुमांयु कबीर ने भी नई राजनीतिक पार्टी बना ली है वो भी चुनाव लड़ेगें और अपने समर्थकों को चुनाव लड़वायेंगें । इससे किस को फारयदा मिलेगा और किसे नुकसान होगा इस पर भी चर्चायें होने लगीं हैं । भारत में अमूमन मुस्लिम समाज की वोट कांग्रेस को मिलती रही है…..पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का यह वोट बैंक खिसकर ममता बनर्जी की पार्टी को मिलने लगा, पश्चिम  बंगाल में करीब सौ सीटों पर मुस्लिम समाज निर्णायक भूमिका में होते हैं…..जो अभी तक टीएमसी को वोट देते रहे हैं…..पर हुमांयु कबीर की पार्टी के सामने आ जाने के बाद क्या वह वोट टीएमसी के पास ही रहेगा अथवा वह खिसकर कर हुमांयु कबीर को मिलेगा……..यदि हुमायं कबीर के पास यह वोट बैंक खिसक गया तो टीएमसी को मुश्किल हो जायेगी । भाजपा हिन्दु वोट बैंक को समेटने में पहले से ही लगी हुई है और लगातार प्रयास के बाद ऐसा लगने भी लगा हे कि हिन्दु वोट बैंक पर उसकी पकड़ मजबूत हो चुकी है तब ठीएमसी के पास कौन सा वोट बैंक रहेगा ? नुकसान तो कांग्रेस को भी होगा……भले ही पश्चिम बंगाल में उसका जनाधार कम हुआ हो पर जितना भी है उसमें बड़ी भूमिका इस वोट बैंके की ही है…..तो उसके पास भी क्या बचेगा…….प्रश्न यह भी है कि हुमांय कबीर मुस्लिम वोट बैंक पर कब्जा कर भी लें तो क्या वो वहां बेहतर प्रदर्शन कर पायेगें…..यदि नहीं कर पाए तो इसका फायदा किसको होगा…..जाहिर है कि भाजपा को ही होगा । पर भाजपा इसे ममता बनर्जी का नाटक बता रही है और बाकी राजनीतिक दल इसे भाजपा का अजंडा बता रहे हैं और हुमांयु कबीर को भाजपा का ऐजेन्ट बताया जाने लगा है……वहीं भाजपा इसे ममता बनर्जी का किया कराया बता रहे हैं । हुमायुं कबीर सभी राजनीतिक दलों की ओंखों में खटकने लगे हैं । कौन किसका ऐजेन्ट है यह तो समय बताएगा पर हुमायुं कबीर की उपस्थिति ने पश्चिम बंगाल के माहौल को अस्त-व्यस्त अवश्य कर दिया है । अस्त -व्यस्त तो लोकसभा का सत्र भी हो चुका है । पिछले अनेक सत्रों से यह देखने को मिलता रहा है कि लोकसभा प्रारंभ होती है और विपक्ष हंगामा करता है……फिर लोकसभा स्थिगित हो जाती है । लगभग पूरा सत्र ऐसे ही चलता रहता है । ससंद के बाहर प्रदर्शन और संसद के अंदर हंगामा । कोई न कोई मुद्दा विपक्ष के पास होता ही है वह उनको हंगमा करने के लिए पर्याप्त होता है । विपक्ष के नेता राहुल गाध्ां ने बहुत सारे मुद्दे लोकसभा में उठाए……आरोप लगाए…..आरोप की सत्यता को लेकर खींचतान हुई । विपक्ष तो यह बोलता ही रहा है कि उसे ससंद में बोलने नहीं दिया जाता और पक्षपात किया जाता है । लोकसभा के अध्यक्ष ओमप्रकाश बिरला इसे गलत बताते हैं……वे ससंद के नियमों का हवाला देते हैं…..विपक्ष हंगामा करता है । इस बार विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है । यह तो सभी जानते हैं कि लोकसभा में सत्तारूढ़ पार्टी एनडीए के पास र्प्याप्त बहुमत है तो अविश्वास प्रस्ताव पारित हो ही नहीं सकता…..पर विपक्ष इसके बहाने सत्ता पक्ष को घेरने की योजना बनाता है । वैसे किसी के भी खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आना यह उनके लिए कठिन तो होता ही है और इतिहास का बिन्दु भी बनता है । ओम बिड़ला के खिलाफ दिया गया यह नोटिस भले ही पारित न हो पाए पर यह सही तो नहीं माना जाएगा । विपक्ष का यह कदम अब पूरे सत्र को हंगामेदार बनायेगा । विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे जी की किताब में लिखा कुछ बातों को लेकर हंगामा किया । सरकार उस किताब के प्रकाशित न होने का हवाला देकर उन्हें रोकती रही वहीं राहुल गांधी न केवल उस किताब की प्रकाशित प्रति को दिखाते रहे वरन से कोड भी करती रहे ।  इस बात को लेकर बहुत हंगामा हुआ । अब इस बात को लेकर भी सस्पेंश बना हुआ है कि क्या वाकई किताब छप चुकी है और बिक्री के लिए उपलब्ध भी है अथवा नहीं । किताब के प्रकाशक ने तो साफ मना कर दिया है कि किताब अभी रक्षा मंत्रालय की अनुमति के लिए भेजी गई है पर छपी नहीं है…..पर इसमें कुछ तो झमेला है । प्रकाशक के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर जांच की जा रही है और जो पता चला है उसमें तो यह लग रहा है कि किताब को पहले ही विदेशों में उपलब्ध करा दी गई है । तो क्या यह भी कोई विदेशी साजिश का हिस्सा है ? कई सारे प्रश्न हैं, पहले तो किताब के प्रकाशन को लेकर प्रश्न हैं फिर उसमें जो लिखा है उसको लेकर प्रश्न सामने आयेगें । मतलब साफ है कि यह सब कुद अीी नहीं सिमटने वाला । भोपाल के गांधी मेडिकल कालेज की एक छात्रा ने आत्म हत्या कर ली । छात्रों द्वारा लगातार आत्महत्या करने के मामले सामने आते जा रहे हें, जो चिन्तनीय हैं । विगत कुछ सालों से छात्रों की आत्महत्या के मामलों में वृद्धि महसूस की गई है । आईसी 3 इंस्ट्यूट द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट ‘‘स्टूडेन्ट सुसाइड इन एपिमेडेमिक स्वीपिंग इंडिया’’ के अनुसार भारत में पढ़नेवाले छात्र-छात्राओं द्वारा आत्महत्या करने की दर बढ़ रही है और यह दर कुल आत्महत्या प्रवृतियों और जनसंख्या वृद्धि की दर से कहीं ज्यादा है । रिपोर्ट बताती है कि इसमें प्रतिवर्ष दो प्रतिशत की वृद्धि हो रही है । आत्महत्या की बढ़ती दर पर अब चिन्तन करने का समय आ चुका है । आखिर क्यों छात्र कर रहे हैं आत्म हत्या ? क्या पढ़ाई का दबाव है या प्रतिस्पर्धा की संभावित असफलता की संभावना पर आधारित है । यह भी सच है कि माता-पिता की अपेक्षा अपने पढ़ने वालें बच्चों के प्रति ज्यादा बढ़ चुकी हैं तो यह भी मानसिक दबाव का कारण बनती है, वहीं उच्च शिक्षा का बढ़ता खर्च भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है । जो भी हो इसको लेकर आम जगारूकता पैदा करना अब जरूरी हो गया है । बच्चों को निराशा के भावों से बाहर निकालना जरूरी है । 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *