सत्य घटनाओं पर आधारित फिल्म ‘धुरंधर’
बेहद शानदार फिल्म है।
सभी पात्रों ने बखूबी अपना -अपना पात्र निभाया है।
कुछ दृश्य हदृय विदारक भी हैं।
धुरंधर देखकर मन में एक ही ख्याल आया कि धन्य हैं, वे वीर जो अपने वतन की सुरक्षा में न जाने कितने घाव अपने शरीर और मन पर झेलते हैं।उन वीरों के बारे में सोचकर मन श्रद्धा से भर उठता है जो गोपनीय तरीके से देश के दुश्मनों को पलटवार दे रहे हैं और मातृभूमि के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।
इस फिल्म के कुछ डायलॉग मुझे बेहद पसंद आए जैसे _ ‘किस्मत की सबसे खूबसूरत बात है कि ये वक्त आने पर बदलती है, तब तक नजर और सब्र’, हिंदुस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन खुद हिंदुस्तान है’,
‘घायल हूं इसलिए घातक हूं’।
फिल्म के अगले पाठ का इंतजार रहेगा।
अंत में बस यही कहूंगी कि वैसे हम उन महान वीरों का कर्ज कभी भी नहीं चुका सकते जिनकी वजह से हम अपने -अपने घरों में सुरक्षित बैठे हैं और हमारा देश सुरक्षित है।
पर फिर भी हदृयतल से धन्यवाद उन धुरंधरों को जो हमारे लिए अपनी कुर्बानी देते हैं।
जय हिन्द, जय भारत।
अंकिता जैन अवनी (लेखिका/कवयित्री)
