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अ से ज्ञ अलंकृत अनुप्रास  

‌अरुणोदय लालिमा अम्बर पथ  सोहे
अवनि अंशुमय अंर्तमन मोहे |

आभूषित आभामंडल आकाशदीप राशि में
आध्यात्मिक मन आनंदित आलोकित काशी में |

इन्दु रश्मिमयी धरा पुलकित इन्दिवर मन मोहे
ईश पूजन चली सखियां इंगुर श्रृंगार सोहे |

उषाकाल लालिमा भरी क्षितिपथ धरणी उमंग
उदित भानु उत्पल खिला उद्यान पुष्प बहुरंग |

ऋत्विक ऋजु मनिषी श्रेष्ठ सर्वदा
ऋषि तप भूमि तट नर्मदा |

 एकाग्रता एकान्त ध्यान मन ज्ञान पाये
औदार्यता ओजस्विता जीवन मान बढ़ाये |

अंकुरित अंभोज अंभ तल
अ: पुलकित धरा उत्पल |

कुमकुम कुमुदिनी कुसुमित कंज
केसर केतकी भरी सुगंध |

खाद्यान्न भरे खेत भरे सभी खलियान
खनिज खनन को चले खनिजों से भरी खान ।

गाऊं मंगल गीत गिरिजा सुत गणेश
घिरी घटा सावन जय घोष गौरी महेश |

चहचहाती चिड़ियां चंपा फूल छाये
चमेली सुगंधित चित को लुभाये |

छम छम पायलिया छवि सुंदर लागे
छटा सावन की मोहक रूप साजे |

जय जय जय गणपति जय जय गौरीनाथ
जय जय जनक नंदिनी जय जय जगन्नाथ |

झमझम वर्षा झील किनारे
झींगुर झुरमुट झीं झीं करें सारे |

टेसू नारंगी टहनियां फूल भरी
टिकुली माथे सजी मांग टीका सिंदूरी |

ठुमक ठुमक चले ठाकुर जी नंदलाल
ठुमरी गाये  सखा नाचे सखी गोपाल |

डेरा डाले डाल पर पंछी नाचे गायें
ढमढम बजी ढोलकी होली के रंग छाए |

तरणि तट तरुवर तितलियां तिरंगी
थमती थिरकती  पराग पुष्प बहुरंगी |

थिरक थिरक मयूर मोरनी संग थिरकता
दमकती दामिनी दादुर फुदक फिरकता |

दिनकर दिव्य दर्शन से दीप्तमन
धरा धवलमयी धृतिमय धनी सुजन |

धेनु क्षीर धरा भरी
धन धान्य सदा हरी |

नव निकेत नदिया तट निर्मल
नंदित मन निरुपम नीलोत्पल |

निर्मल नदियां प्रातः नित नहायें ध्यायें
नव ज्ञान से निखरित मन‌ सदा पायें |

पावनमयी धरा पट बसन्ती नवरंग
पुलकित फाल्गुन फूल खिला श्रृंगारित बसन्त |

बोरी भरी कनक धान बाजरा बहु अन्न
भवन भरे भंडारे धन से हुए धन्य |

भोर में भ्रामरी भ्रमर गीत कुंजो में
भूषित भांति भाति पुष्प पुलकित पुंजो में |

मुदित हुआ मन मोहक मंजुल मुखड़ा मोहे
मयंक पूर्ण महि पर मयूख बिखेरे सोहे |

यथार्थ ज्ञान से युग परिवर्तन
योग ध्यान सुकृत यशवर्धन |

रश्मिमाली  उदित रमण रथ
रमणीय तट रत्नाकर रजत |

लुप्त हुआ तिमिर भोर चिड़ियां चहचहाती
लावण्यता लालिमा क्षिति लहर लहराती |

विद्यादायिनी वन्दन वन्दन वीणावादिनी
वन्दे वांग्मयी वंदे विपुल वरदायिनी |

षष्ठी कात्यायनी सुतदायिनी  वरदायिनी
षडानन माता गौरी सर्व सुख प्रदायिनी |

शारदे शुक्लांबरा श्वेत पद्मासनी
वंदे शुभ्रा सुकीर्ति शुचिमति प्रदायिनी |

श्रीधर मुरलीधर दर्शन को
श्रद्धालु चले श्रीखंड अर्पण को |

सरसिज सरोजिनी पुलकित सरोवर
सुवासित सुमन सर्वांग  सुंदर |

हृदय हरिप्रिया हरि हरि ध्यान
भक्त हनुमंत भजे हरे हरे राम |

क्षमा प्रार्थना त्रिलोकनाथ शिव त्रिनेत्रधारी

ज्ञान वैराग्य सिद्धि अन्नपूर्णे जगध्दात्री |

क्षमा प्रार्थना क्षीराभिषेक त्र्यंबकेश्वर त्रिलोकनाथ

ज्ञानदायिनी शारदे करो कृपा रमा गौरी काशीनाथ |

सीमा धूपर, जबलपुर

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