Latest Updates

हिंदी के मनीषी विद्वान् आचार्य निशांतकेतु का निधन

17 अगस्त, 2025 

लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार, बहुभाषाविद्, उपन्यासकार, कहानीकार, कवि, आलोचक, निबंधकार, कोशग्रंथों एवं धर्म-अध्यात्म विषयक ग्रंथों के रचयिता आचार्य निशांतकेतु का निधन 90 वर्ष की आयु में गुरुग्राम के पालम विहार‌ में हो गया। वे विगत दिनों से अस्वस्थ थे। वे पत्नी प्रो. सुखदा पांडेय, पुत्रियांँ प्रो. रचना सुचिन्मयी, डॉ. शैली भाषांजलि, पुत्र अभिषेक दिनमान और अभिषेक प्रतिमान सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। पटना कॉलेज, पटना के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष आचार्य निशांतकेतु ने पटना विश्वविद्यालय से आई.ए, बी.ए. एवं एम्.ए. (हिंदी) की शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने  सन् 1960 से 1997 तक सैंतीस वर्षों तक अध्यापन का कार्य किया। साहित्यसेवा में तल्लीन आचार्य निशांतकेतु ने शताधिक पुस्तकों का लेखन एवं संपादन कार्य संपन्न किया। उनकी 100  कहानियांँ ‘दर्द का दायरा’, ‘आखिरी हँसी’, ‘तीसरे आदमी की शिनाख्त’, ‘माटी टीला’, ‘जख़्म और चीख़’, ‘अंधघाटी के टीले’, ‘निशांतकेतु की प्रतिनिधि कहानियाँ’ (संपादकद्वय : डाॅ. जितेंद्र वत्स एवं डाॅ. अशोक कुमार ज्योति) ‘प्रताड़ित पुरुषों की कहानियाँ’ (संपादक : डाॅ. जितेंद्र वत्स), ‘नारी-उत्पीड़न की कहानियाँ’ (संपादक : डाॅ. किरणबाला), ‘उत्तर शती कथाकुंभक’ (कुल 100 कहानियाँ, संपादक : डाॅ. जितेंद्र वत्स), ‘निशांतकेतु की दलित चेतना की कहानियाँ'(संपादक : डाॅ. अशोक कुमार ज्योति), ‘निशांतकेतु की चयनित कहानियाँ’ (एनबीटी से प्रकाशित) पुस्तकों में संगृहीत हैं। उन्होंने 7 कविता-संग्रहों  ‘रेत की उर्वर शिलाएँ’, ‘समव्यथी’, ‘ज्वालामुखी पुरुषवाक्’, ‘संगतराश’, ‘त्वचा पर जो लिखे आखर’, ‘जीवेम शरदः शतम्’, ‘नदी की बहती हुई निरंतरता’), 3 उपन्यासों  ‘ज़िंदा ज़ख़्म’, ‘योषाग्नि’, ‘सागर लहरी’ , 1 लघुकथा संग्रह ‘जिस्म के छिलके’  के साथ-साथ ‘रुद्राक्ष धारण और जपयोग’, ‘गद्य गगनांचल’, ‘अंक प्रतीक कोश’, ‘स्मृति के अक्षर’ (तीन भागों में), ‘नाटक और मंच’, ‘सुगम तंत्रागम’, ‘विश्व के शिखर सन्न्यासी महर्षि याज्ञवल्क्य’, ‘जंगल, जानवर और आदमी’, ‘राजनीति का सुदर्शन चक्र’, ‘वागर्थ अनुशीलन’, ‘सचल सवाक् शब्द’, ‘वर्तनी’, ‘ललित लेख’ जैसी 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की। 23  मार्च, 1935 को  वैशाली, बिहार में जनमे आचार्य निशांतकेतु सेवानिवृत्ति के पश्चात् स्थायी रूप से गुरुग्राम में निवास करते थे।  उन्होंने ‘सूत्र’, ‘भारती’, ‘इतरतेर’, ‘परि-भाषा’, ‘अर्चना’ के साथ साथ ‘चक्रवाक्’ और ‘सुलभ इंडिया’ जैसी महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं का संपादन-कार्य भी किया। देश की सरकारी और अनेक निजी संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित एवं पुरस्कृत करके उनके साहित्यिक योगदानों को रेखांकित किया। वे सुलभ साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के दो दशकों तक अध्यक्ष भी रहे। 

देश के कई विश्वविद्यालयों में उनपर शोधकार्य हुए हैं। बिहार के कई विश्वविद्यालयों एवं बिहार टेक्स्ट बुक कमिटी से संबद्ध पाठ्यक्रमों एवं शिवाजी विद्यापीठ, कोल्हापुर के पाठ्यक्रम में उनकी रचनाएँ सम्मिलित हैं।

आचार्य निशांतकेतु ने पार्क हॉस्पिटल, पालम विहार, गुरुग्राम में 17 अगस्त को प्रातः 05:30 बजे अंतिम साँस ली। वे पिछले कुछ महीनों से गंभीर बीमारियों से ग्रस्त थे। विगत सोमवार से अस्पताल के आई.सी.यू. में भर्ती थे। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क के श्मशान घाट में हुआ। मुखाग्नि ज्येष्ठ पुत्र अभिषेक दिनमान ने दी।

उनका निधन साहित्यिक क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। आचार्य जी के निधन से अध्यापन, लेखन एवं संपादन की दुनिया में एक शून्यता आ गई है। वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री राम बहादुर राय, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी चौबे, डॉ. गंगेश गुंजन, डॉ. विनोद बब्बर, सविता चड्ढा, डॉ. कल्पना पांडेय, प्रो. राकेश पांडेय, डॉ. शिवशंकर अवस्थी, पंडित सुरेश नीरव, डॉ. अजय अनुराग, प्रभा शर्मा भार्गव, प्रदीप भार्गव, डॉ. अशोक कुमार ज्योति, डॉ. अनुज्ञा, राजू शर्मा, डॉ. रवींद्र, डॉ. प्रभा शर्मा, प्रदीप कुमार, जयप्रकाश विलक्षण, डॉ. प्रियंका, मोनिका जायसवाल, सुशांत कुमार पांडेय, अमित कुमार, दीपिका दास, भूपेंद्र कुमार भगत, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के अनेक कार्यकर्तागण, भारतीय शिक्षण मंडल, हरियाणा प्रांत के कार्यकर्तागण, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, हरियाणा प्रांत से संबद्ध साहित्यकार, युवा कहानीकार रवि झा, उपनंद, शुभम कुमार, पंकज कुमार, राधा देवी, हरीन्द्र यादव, गुरुग्राम, वार्ड-2 के पार्षद राकेश कुमार, पूर्व पार्षद शकुंतला यादव आदि ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *