राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
बिहार के चुनाव भले ही अभी घोषित नहीं किए गए हें पर बिहार में माहौल चुनावी रंग में ढल चुका है । चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट संशोधन से जागी राजनीतिक पार्टियां अब इसके सहारे ही वैतरणी पार करने की मानसिकता बना चुकी हैं । वैसे तो चुनाव आयोग के एसआर के पूर्व विपक्षी पार्टियां बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार जी को घेर रहीं थीं और कमजोर मुख्यमंत्री कहकर चुनावी जंग में कूद रही थीं पर चुनावा आयोग ने उन्हें नया मुद्दा दे दिया अब नीतिश कुमार को सभी भूल चुके हें और राजनीति सारी चुनाव आयोग के बहाने केन्द्र सरकार पर आकर टिक गई हैं । वैसे भी चुनाव किसी भी राज्य की विधानसभा का हो चुनाव के केन्द्र में भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी जी ही रहते हैं और ऐसा माना भी जाता है कि चुनाव केवल मोदी जी के नाम पर ही लड़ा जाता है और जीता भी जाता है । राज्य का कोई चेहरा सामने नहीं होता तो यह भी कहना कठिन होता है कि वहां चुनाव जीतने पर मुख्यमंत्री कौन होगा । भाजपा या प्रधानमंत्री मोदी जी मुख्यमंत्री के लिए नए चेहरे पर दांव लगाते हैं । बिहार में भी अमूमन यह ही स्थिति है । अभी तो भले ही यह कहा जा रहा हो कि मुख्यमंत्री नीतिश कुमार होगें पर ऐसा ही होगा इस पर संदेह है । बहरहाल बिहार की राजनीति गर्म है और इसको गर्म कर रहे हैं राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जो बिहार में ‘‘वोटर अधिकार यात्रा’’ निकाल रहे हैं । यात्रा में बिहार की इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियां भी शामिल हैं और इंडिया गठबंधन से जुड़ी अन्य पार्टियों के प्रमुख भी आ-आकर इसमें अपनी सहभागिता निभा रहे हैं । प्रियंका गांधी ने भी यात्रा में अपनी सहभागिता दी है । कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और आजेडी के नेता तेजस्वी यादव की यह रैली बिहार के चुनाव में रंग भर रहे हैं और रंग एक ही है कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर मतदाताओं से मत का अधिकार छीन रहे हैं । चुनावा आयोग और राहुल गांधी की सीधी टक्कर भी देखने को मिल रही है । परंपराओं से हटकर चुनाव आयोग इसका जबाव भी दे रहा है और राहुल गांधी आम मतदाता के मन में इस बात को बैठाने का प्रयास कर रहे हैं कि मतदाता को मतदान की प्रक्रिया से दूर करने की साजिश की जा रही है । बिहार में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए हैं जिसके आधार विभिन्न हैं ऐसा चुनाव आयोग बता भी चुका है तो मतदाता को शायद यह लगे कि वाकई चुनाव आयोग और भाजपा मिलकर उसे मताधिकार से वंचित करने में लगे हुए हैं । फिलहाल भाजपा के पास इसका कोई सार्थक जबाव नहीं है । बिहार में दो मंत्रियों के साथ अलग-अलग घटनाओं में आमजन द्वारा की गई अभद्रता की घटना भी सामने आ चुकी हैं । एक मंत्री मंगल पांडे और दूसरे मंत्री श्रवण कुमार के प्रति आमजनता ने अभद्र ढंग से अपनी नाराजगी दिखाई । तो क्या यह मान लिया जाए कि बिहार में सरकार के प्रति विरोध बढ़ रहा है ? एक बात और हुई कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा में जुट रही भीड़ के चलते विगत तीन-चार सालों से मेहनत कर रहे जनसुराज पार्टी के प्रशांत कुमार की भी नींद उड़ा कर रख दी है । वे इस गठबंधन में शामिल नहीं हैं तो वे अलग-थलग पड़ते दिखाई देने लगे हैं । प्रशांत कुमार को चुना रणनीति बनाने का मास्टर माना जाता रहा है । कभी नीतिश कुमार के खसमखास रहे प्रशांत कुमार चुनावी गणित बता भी रहे हैं । उनके अनुसार यदि 60 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता और 20 प्रतिशत हिन्दु मतदाता उन्हें वोट दे दें तो वे बिहार में चुनाव जीत सकते हैं । उनके पास गणित तो अच्छा है पर वे इसे कैसे प्राप्त कर पायेगें यह कहना कठिन है । बिहार में मुस्लिम मतदाता कांग्रेस और आरजेडी के साथ तो दिखाई देता ही है साथ ही में ओबेसी की पार्टी के साथ भी वो खड़ा दिखाई देने लगा है जिसके चलते प्रशांत कुमार को 60 प्रतिशत मतदाता मत देगें यह संभावना कम ही दिखाई दे रही है । बिहार की वोटर अधिकार यात्रा के हंगामं के साथ ही साथ अमेंरिकी राष्ट्रपति टं्रप का हंगामा भी चल रहा है । उनके पास केवल एक ही हथियार है वो है टेरिफ जिसका वो भय दिखाकर सारी दुनिया को अपने वश में कर लेना चाहते हें । भारत को भी उन्होने टेरिफ के जाल में फंसाया है । 25 प्रतिशत टेरिफ तो वे पहले ही लगा चुके थे अब 25 प्रतिशत टेरिफ और बढ़ा दिया है याने अब कुल 50 प्रतिशत टेरिफ भारत पर लगाया जा चुका है । अमेंरिकी राष्ट्रपति टं्रप को यह भरोसा था कि भारत उनके इस कदम से भयभीत हो जाएगा और उनके सामने गिड़गिड़ायेगा पर भारत ने ऐसा नहीं किया । यह सही है कि टेरफि से भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी पर तब भी किसी के सामने झुकना भारत ने नहीं सीखा है । भारत वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करने लगा है और स्वनिर्मित पर जोर देने लगा है । इसमें समय जरूर लगेगा पर जब भी यह कार्य पूरा हो जाएगा तब भारत आत्मनिर्भर हो जाएगा, तब अमेरिका जैसा कोई भी देश भारत को झुकाने की कल्पना भी नहीं कर पाएगा । भारत से निर्यात होने वाले सामान के लिए दूसरे बाजार तलाशने प्रारंभ कर दिए गए हैं । यदि भारत को दूसरा बाजार मिल गया तो यहां से निर्यात होने वाले सामान बनाने वालों को इस टेरिफ का कोई असर नहीं होगा । एक और संभावना है कि अमेरिका में भारत के बने बहुत सारे सामानो की मांग बहुत हैं टेरिफ के कारण यह सामान अमेरिकावासियों कसे भी मंहगा ही मिलेगा तब हो सकता है कि अमंरिका मंहगाई की चपेट में आ जाए और वहां के नागरिक ही अमेंरिकी राष्ट्रपति टं्रप के खिलाफ लामबंद हो जाएं । बहरहाल अभी तो भारत के टेरिफ के कारण बढ़ने वाली मंहगाई की पूर्ति अन्य देशों से हो रही है जिन्हें एक बना बनाया बाजार मिल गया है और ये वे देश हैं जो भारत के विरोधी है जिनमें पाकिस्तान, बंगादेश, तुर्की भी शामिल हैं । जाहिर हे कि इन देशों की अर्थव्यवस्था टेरिफ के कारण बेहतर होती जायेगी क्योंकि इन देशों के लिए कम टेरिफ प्लान लगाया गया है और अमेरिका का बाजार इनके माध्यम से भारत के सामनों का विकल्प मानने के लिए मजबूर है । भारत मेंटेरिफ का असर दिखाई देगा यह सच है और ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे मांग कम होगी तो उत्पादन भी प्रभावित होगा, उत्पादन कम होगा तो कर्मचारियों की नौकरी पर भी खतरा होगा । भारत में वैसे भी बेरोजगारी दर चरम पर है उस पर यदि लाखों नए बेरोजगार सामने आ गए तो स्थिति और खराब हो सकती है । बेरोजगारों के पास प्राइवेट सेक्टर ही रोजगार के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं, सरकार सेक्टर में नौकरियां वैसे भी कम हैं । हर साल जितने नए बेरोजगार सामने आते हें उसके केवल अनुमानतः 25 प्रतिशत बेरोजगार ही रोजगार में लग पाते हें याने हर साल बेरोगारों की संख्या बढ़ ही रही है । अमेरिका को टेरिफ प्लान भी नौकरियां छीनेगा ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है तो भारत में बेरोजगारों की संख्या बढ़ने वाली है ऐसा माना जा सकता है । इसके बावजूद भी हर भारतीय चाहता है कि भारत अमेरिका के टेरिफ के खिलाफ न झुके और उसे पूरी दृढ़ता के साथ जबाव दे । भारत को भ अमेरिकी सामान पर टेरिफ बढ़ाना चाहिए साथ ही भारतवासी अमेरकी उत्पाद का बहिष्कार करें । भारत में अमेरिका में बने सामानों का बड़ा बाजार है । भारत ने जब चीन के सामानों का बहिष्कार किया था तो चीन की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई थी तो हो सकता है कि भारतवासी यदि एक बार फिर दृढ़ निश्चय कर लें और अमेरिका में बने सामानों का बहिष्कार करें तो वहां का बाजार भी प्रभावित होगा और वहां की अर्थव्यवस्था भी ।
