कविता और कहानी
“करें नारी का सम्मान सभी जन”
नारी मानवता की पहचान , भरती है सबके अन्दर जान । होती सभी गुणों की खान , करें सभी उसका सम्मान ।। घर की इज्जत होती नारी , करती स्वीकार जिम्मेदारी । दिल दया-करुणा का सागर , भरें उसमे सब अपनी गागर ।। परीश्रम की होती प्रतिमूर्ति , तन-मन मे विद्धुत सी फूर्ति । कुछ …
राह की तालाश
आज दिवाली का त्यौहार था। चारों ओर पटाखे और आतिशबाजी की ध्वनि गूंज रही है,तभी अचानक आग की एक चिन्गारी पास की एक झोपड़ी पर गिर गयी,और वह चिंगारी आग की लपटों मे बदल गयी, धीरे-धीरे वह पास के एक घर तक पहुंच गई,जहा परिवार के सभी सदस्य बिराजमान थे, किसी तरह पिता और बेटा…
आपके आने के बाद
हो गये मौसम सुहाने, आपके आने के बाद, हो गई हर ऋतु बसंती,आपके आने के बाद। नींद कोसों दूर जाकर बैठ जाती आंखों से, ख्वाब सूखे पत्तों की मानिंद झड़ते शाखों से। हो गए सपने सलौने,आपके आने के बाद, नींद मीठी हो गई है,आपके आने के बाद।। मिट गई मीलों पुरानी दूरियां इन दिलों की,…
कैसे कैसे लोग
..दोपहर की तेज चिलचिलाती धूप में रीना बारबार पसीना पोंछती हुई रिक्शेवाले का इंतजार कर रही थी । सामने से ही बहुत सी साथी शिक्षिकाएं अपनी अपनी गाड़ियों से निकल रहीं थी पर सभी के रास्ते अलग अलग थे । तभी सामने एक गाड़ी रुकी । “अरे रीना जी कैसे खड़ी है ?”…
पहले जहाँ रोज करते थे
पहले जहाँ रोज करते थे लोग उसका पूजा बन्दन और विवाह के अवसर पर नई दुल्हन करती थी धूप ,प्रसाद का अर्पण। सूख गया वह पेड़ सुन तानो की आँधियाँ बिखर गए सारे दरख़्त और रस भरी पत्तियां नजर लगी कितनो की सहन न कर पायीं जो इनकी अटखेलियां। अबतो सुख ही सुख है दर्द…
शीर्षक : “वो सर्द रात”
वो सर्द हवाएं हो : वो काली घटाएं हो। वो शर्मीली निगाहे हो : वो सिसकती आहे हो। ठंड की कपन हो : थोड़ी सी अगन हो। थोड़ी सी लगन हो : साथ में सजन हो । बस फिर किया, हो बाहों में बाहें, हो हाथो में हाथ, फिर सदा याद आयेंगी=वो सर्द रात :…
व्यंग्य- बाबापंथी
आजकल बाबाओं का ट्रेंड चल गया है, एक गया तो छः महीने में दूसरा आना ही है लाइमलाइट में। देखते हैं इस बार वही हाल है या फिर बाबा कमाल है। कमाल से याद आया कि चाची 420 फ़िल्म की तरह किसी ने भी बाबा 420 फ़िल्म नहीं बनाई। मुंह में पान चबाते हुए एक…
