कविता और कहानी
ऐसा मेरा भारत है
गीत- ऐसा मेरा भारत है अवतारों की जन्मभूमि है, वेदभूमि की ताकत है, कण-कण में ईश्वर बसते हैं हर जीवन शरणागत है मातृभूमि है, कर्मभूमि है, ऐसा मेरा भारत है। सप्त पुरी हैं चारधाम हैं, भिन्न-भिन्न संस्कृतियाँ हैं महाभारत रामायण वेद- पुराणों जैसी निधियाँ हैं, सर्वधर्म समभाव सहेजे, ऐसा मेरा भारत है । मस्तक है…
बधाईयां बधाईयां और केवल बधाईयां
डा.सर्वेश कुमार मिश्र सुबह से शाम हो गई किंतु कोई हलचल ना हुई कोई मनचल ना हुई कोई हिला भी नहीं कोई डुला भी नहीं कोई देखा भी नहीं कोई ताका भी नहीं। सच है खुद की लड़ाई खुद से लड़नी चाहिए बधाइयों के शहर में ना दुखड़े गाना चाहिए। खुद के मन की व्यथा…
ग़ज़ल
इस नये साल पर दें तुम्हें क्या बधाइयाँ। हर सिम्त हैं चीखें-पुकार, ग़म- रुलाइयाँ। हम जायें किधर इधर कुंआ, उधर खाइयाँ गुमराह हो गयी हैं हमारी अगुआइयाँ। काबिज़ हैं ओहदों पर तंग़ज़हन ताक़तें, हथिया रहीं सम्मान सभी अब मक्कारियाँ। ईमानदारियों की पूछ- परख है कहाँ, मेहनत को भी हासिल नहीं हैं कामयाबियां। माँ, बहन, बेटियों…
चेहरा उसका शगुफ़्ता सा गुलाब लगे है…
चेहरा उसका शगुफ़्ता सा गुलाब लगे है उजली शब का वो मुनव्वर माहताब लगे है l जब भी देखा है उसे तारीकियों से लड़ते वो फ़लक पर इक चमकता आफताब लगे है l क्या करें तारीफ़ हम उस जल्व ए जाना की सिर से पाँ तक जो ग़ज़ल की इक क़िताब लगे है l सब…
एकता,सरदार पटेल
वतन की दरदे नेहा की दवा है एकता गरीब कौम की हाजत रवा है एकता तमाम दहर की रूहे रवा है एकता वतन से मोहब्बत नहीवह क्या जाने क्या चीज़ है एकता क्या है अनेकता ******* दे रहा है ज़माना पैगामे पटेल अब न होगा फिर कब होगा सब मे मेल जाँ हथेली पे ले…
सरदार वल्लभभाई पटेल
नमन तुम्हें हम करते सरदार जन्म ले भारत भू पर पावन देश को किया देशहित नित्य कष्टों को झेला हवा जेल की कई बार खाई. ईमानदारी,देश प्रेम रग- रग में समाया किसानों के बने नायक सरदार कहलाए. नमन तुम्हे हम करते सरदार. हैदराबाद जूनागढ़ और कश्मीर के हठधर्मियों को सबक सिखाया. बिना खून बहाए, एकजुट…
गजल : देवेन्द्र पाठक महरूम
पुरखों के गांव खेत बाग वन उजाड़कर फैलाओ न बदबू गड़े मुर्दे उखाड़कर अमरौती तो खाकर नहीं आये हो तुम यहां जाओगे तुम भी आखिरी कपड़ा उतारकर हम हैं तबाह अपने भी हैं तुमसे परेशां हालात रख दिया जो बेतरह बिगाड़कर कैसी हमारी जिंदगी गांवों में आज भी दो दिन हमारे साथ देखना गुजारकर चुप…
भिखारी
भिखारी होनाआसान नहींरखना पड़ता है गिरवीअपना अहमअभिमानमान सम्मानको मिटाकर वाणी में रखनी पड़ती हैमिठास कुछ भी कहे लोगतब भी रखनी पड़ती हैदीनताशरीर में लानी पड़ती हैमालिनताआंखों में बेबसीलाचारी याकोई दैहिक अपंगता शरीर के साथ मनको भी अकर्मण्यबनाना पड़ता हैरखना पड़ता है भरोसाभाग्य पर कभी मिल जाता हैबहुत कुछकभी-कभीपड़ जाते हैं फाखेकभी हालात बना देते हैंदेते…
