कविता और कहानी
पंच से पक्षकार
हरिप्रसाद और रामप्रसाद दोनों सगे भाई थे। उम्र के आखिरी पड़ाव तक दोनों के रिश्ते ठीक-ठाक थे। दोनों ने आपसी सहमति से रामनगर चौराहे वाली अपनी पैतृक जमीन पर दुकान बनाने का सोचा, ताकि उससे जो आय हो उससे उनका जीवन सुचारू रूप से चल सके। दुकान का काम चल ही रहा था…
शिक्षक दिवस (गुरु पर) पर विशेष
लाल बिहारी लाल बिना गुरु ज्ञान जग में,ले ना पाया कोय।गुरु का जो मान रखा, जग बैरी ना होय।1। गुरु को गुरु की तरह, माने आज इंसान।उसका मान सभी करे,हरी करे कल्याण।2। गुरु ज्ञान की खान है,ले लो जितनी चाह।भला करे बस हर घड़ी,लाल खुलेगा राह।3। गुरु बिन जग में कुछ भी,पाना नहीं असान।गुरु करे…
गुरुवर जलते दीप से
दूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करें, गुरुवर वो भगवान।। जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।। नानक, गौतम, द्रोण सँग, कौटिल्या, संदीप। अपने- अपने दौर के, मानवता के दीप।। चाहत को पर दे यही, स्वप्न करे साकार। शिक्षक अपने ज्ञान से, जीवन…
मौन मैं और मेरे शब्द हो जाओ तुम : नमिता नमन
मौन मैं और मेरे शब्द हो जाओ तुम प्रीति का एक प्रारब्ध हो जाओ तुम एक पावन शिला मन अहिल्या सा था तुम मुझे राम जैसी छुअन से मिले मुझको आकार साकार तुमसे मिला जैसे मीरा की भक्ति को मोहन मिले सूक्ष्मतम मैं रहूं श्रेष्ठतम तुम रहो प्राण तक मेरे प्रतिबद्ध हो जाओ तुम…
हिन्दी और नागरी लिपि
हिन्दी का परचम लहराएं! नागरी लिपि का मान बढ़ाएं!! हम हिन्दी दिवस- मनाते हैं भारत में प्रतिवर्ष, उत्साहित-उल्लसित हो कहते हिन्दी है निज भाषा, यही एकता सूत्र , यही है राष्ट्रीयता की पहचान, करें इसे मजबूत, इसी से होगा सबका उत्कर्ष, हम सब का कर्तव्य यही कि राष्ट्र- भाव से भरकर एक राग से…
कितनी कड़वी हैं सच्चाइयाँ
कितनी कड़वी हैं सच्चाइयाँ गिर रहीं नीचे ऊँचाइयाँ कोयलों के बाइक कंठस्वर चढ़ी नीलाम अमराइयाँ बद हुये मौसमों के चलन हुयीं गुमराह पुरवाइयाँ दिन ढले घर में अहसास के स्यापा करती हैं तनहाइयाँ आदमी कद में बकमतर हुआ बढ़ गयीं उसकी परछाइयाँ गिरना तय है जिधर जायेंगे उधर खंदक इधर खाइयाँ होश आयेगा ‘महरूम’ जब…
आजादी का अमृत महोत्सव : डॉक्टर राहुल
आओ हम मनाएं आजादी का अमृत महोत्सव! राष्ट्रोत्थान का लेकर नया संकल्प करें नवभारत का नवनिर्माण फहराएं तिरंगा… दिखाएं विश्व को जब मन में हो दृढ़ इच्छा-शक्ति सतत् आगे बढ़ने का अटल विश्वास तब परिस्थितियों की समाधि में चुप नहीं बैठता है मनोभावों का बीज फूट पड़ता है पाषाणों को तोड़कर पीपल के कत्थई कोपल…
ग़ज़ल : वो कभी मिलते नहीं हैं
वो कभी मिलते नहीं हैं पर हमें भूले नहीं हैं छू हमें महसूस भी कर देख हम सपने नहीं हैं कल इमारत भी बनेंगे हम फ़क़त नक़्शे नहीं हैं इब्तिदा हमसे हुई थी और हम पहले नहीं हैं क्या कहा है आपने जो हम अभी समझे नहीं हैं विज्ञान व्रत
सूरज की मौत,
सुस्त हो रहा सूरज आने वाली है प्रलय उत्तरी ध्रुव पर फटते ज्वाला पृथ्वी बनेगी आग का प्याला समुद्र में आयेगा तूफान पानी में डूबेगी दुनिया चारो ओर होगा समुद्र बर्फ गलने की बढ रही रफ्तार सालों में गल जायेगें उत्तरी-दक्षिणी ध्रुव आने वाली है जल प्रलय। ख़तरे में है दुनियां होगा विनाश,महा विनाश…
