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नया सवेरा

         स्टेशन से निकल कर जैसे ही रामू थोड़ा आगे बढ़ा की तेज बारिश चालू हो गयी । पीछे से आ रहे जुगनू ने बिना सोचे समझे अपनी छतरी उसके सिर पर भी कर दी।रामू ने चौंककर उसकी ओर देखा और जुगनू की आँखों में पता नही क्या नजर आया दोनों ही हँसकर साथ साथ…

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तितली

बस पीछे पीछे दौड़ा जाता पंखों को पकड़ने रंग विरंगे; कटिले वृंत-कुंजों में जाता कोशिश के पाँव रहते नंगे। पीली पंखों वाली तितली हाथों में पीले रंग भुरकती; पंख फड़फड़ा सूंड हिला उड़ भागने खूब मचलती। नीली,बैगनी,गुलाब रंग की जैसे परीलोक से थी आई; लाख कोशिश कर हारा मैं सदा रही वह भागती-पराई। कितनी भूखी…

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पायल

कहीं सीमा का बंधन देखो कहीं रात अलबेली है  पैरों की पायल है मेरी  या जंजीर की बेडी है रुके रुके कदमों से देखो अठखेली ये करती है  रुनझुन रुनझुन करते करते  सांझ सलोनी कटती है छम छम करता बचपन बीता  झनक झनक करते यौवन छनक छनक सी बीती उमरिया खनक खनक बरसे बादल  एक…

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संस्मरण : यादगार बोहाग बिहू

बैशाख का महीना असम के लिए खास होता है। बैशाख जिसे असमिया में बोहाग कहते है, इस महीने में बोहाग बिहू मनाया जाता है। यह रोंगाली बिहू और भोगाली बिहू के नाम से भी जाना जाता है। गांवों में घर धन-धान्य से भरे होते है। भोग करने के साधन होते हैं और फल-फूल से भरे…

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घमासान

क्यों हो रहीं हैं घुटन क्यों डर रहा हैं मन कहीं तो हो रहा हैं इंसानियत पर जुल्म घुट घुट के मार रहें हैं लोग या मर मर के जी रहे हैं लोग मासूमों के हाल बुरे हैं सपने देखने वाले सो कहां पा रहें हैं आग सैलाब की लपटों में जुलसे जा रहें हैं…

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कुछ बेबसी ऐसी भी

          आज पहली बार आभास हुआ कि कुछ विवाहित महिलाएं कितनी वेबस और लाचार होती हैं। चाहे वे नौकरी करने वाली हों या घरेलू  महिलाएं दोनों के ही साथ बहुत सारी पाबन्दियां जुड़ी होती हैं।अभी कल की ही तो बात है मिसेज शर्मा पति के दो शर्ट पैंट लेकर गली गली प्रेस वाले की दुकान…

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सभी का भला हो सभी का भला हो

प्रभो!सद्बुद्धि दो उनको सभी का हो भला जग में। न कोई  विघ्न – बाधाएं   कभी आएं  मेरे   मग   में।।        जगत  के  जितने  प्राणी हैं                               सभी   को    आसरा   तेरा,        तुम्हीं  ने  एक  ही   पल में                               बिगड़ते   भाग्य  को   फेरा,         तुम्हारी  ही   कृपा  से सब                               जगत  का  काम  होता   है,        …

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रिश्ता आत्मा का-(चूड़ीवाला)

कहानी बहुत पुरानी है———। –मईयाँ—–मईयाँ—-। यह स्वर सुनते ही सुधा दौड़कर दरवाजे पर गयी।उसका हृदय खुशी से भर गया। दृष्टि हाथों की कलाईयों पर जा पड़ी। यह स्वर चूड़ीवाले काथा। माथे पर चूड़ियों कीटोकरी।कमर में चारखाने की रंगीन  लुंगीलपेटे वह दरवाजे पर आकर हाँक लगा रहा था।उसकी कमीज सफेद थी जिसकी पूरी बाहों को उसने…

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गर्मी की कुण्डलियाँ

अजय कुमार पाण्डेय 1 दिन सारा जलता लगे, लगे सुलगती शाम  रवि को कुछ इसके सिवा, और नहीं है काम और नहीं है काम, धूप में लगा तपाने बरसा के फिर आग, लगा औकात दिखाने न विद्युत है न नीर, जी रहे दिन गिन गिन सब प्राणी बेचैन, कठिन अब गर्मी के दिन। 2 जल…

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भावों को उकेरती हूँ मैं कवयित्री हूँ

युवा कवयित्री सरिता त्रिपाठी जी के फेसबुक पटल पर मैं कवयित्री हूँ शीर्षक पर आधारित काव्य गोष्ठी के चार एपिसोड का आयोजन सफल हुआ। जिसमे दिए हुए शीर्षक पर सभी प्रतिभाग करने वाली कवयित्रियों ने स्वरचित रचनाओं का अपनी वाणी में लाजबाब प्रस्तुति देकर सभी दर्शको का मन मोह लिया। एक ही शीर्षक पर जब…

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