कविता और कहानी
मेरा हिन्दुस्तान
आसमान से ऊंचे कद का भारत मां का गौरवशीशे पे जिसके कश्मीर और दिल में सुन्दर वैभवजनजन के होठों पे खिलती वीरो की गाथा होकदमों में गंगा हो – लहराता तिरंगा हो पाँच तत्व से बन जाती है इसकी शौर्य कहानीअग्नि जल पृथ्वी आकाश और हवा अभिमानीभगत सुभाष गांधी के संग लक्ष्मी की गाथा होकदमों…
भारत के वीर पुत्र को नमन हमारा है
जय माँ भारती , माँ भारती, जय माँ भारती….. (1)माँ भारती का लाल जब सरहद पर लड़ने जाता है।उड़ उड़ के मिट्टी बदन को चूमे दुश्मन भी थर्राता है।ऐसे भारत के वीर पुत्र को नमन हमारा है…… (2)सीना तान के माँ मस्तक पर शौर्य तिलक करती है।वीर सिपाही जब घर से विजय पताका लेके चलता…
गणतन्त्र दिवस
ले कर पैगाम आज़ादी गणतन्त्र दिवस आया आजजाता रहा वतन के चेहरे से गुहन आजसच हो के रहा बापू का सपना आजहै सामने मन्जिलकल से भी कठिन आजजायज़ नही आपस मेदिलो की शिकन आजसंगम यह हैगंगा जमना का मिलन आजअब हर तरफ दिवाली के दीपकचमके आजईद की खुशी से हर चेहरे दमके आजवह जौहर,आज़ाद,सुभाषऔर पटेलजिनके…
दो-दो हिन्दुस्तान
लाज तिरंगें की रहे, बस इतना अरमान ।मरते दम तक मैं रखूँ, दिल में हिन्दुस्तान ।।●●●बच पाए कैसे भला, अपना हिन्दुस्तान ।बेच रहे हैं खेत को, आये रोज किसान ।।●●●आधा भूखा है मरे, आधा ले पकवान ।एक देश में देखिये, दो-दो हिन्दुस्तान ।।●●●सरहद पर जांबाज़ जब, जागे सारी रात ।सो पाते हम चैन से, रह…
हर युग में बापू आप है जरूरी
राजनीति ने हमको सरहद की लकीरों में बांटा,हिंसा के जानवरों ने हमको बुरी तरह काटा,आज के हैवानों ने आदर्शों के मुंह पर मारा चांटा,बापू आपकी कमी कोई नहीं कर सकता है पूरी,हर युग में बापू आप है जरूरी।तोड़ा आपने हमेशा जाति का बंधन,इश्वर एक है तुम करो उसका वंदन,आपने लगाया हर इंसान को प्यार का…
“नव्य भारत”
ये गण का तंत्र, कैसा हो गया मन का मंत्र, हरेक जप रहा नव्य भारत ऐसा हो कि सारा गणतंत्र जागरूक… अन्तर्मन दहके ज्वाला सा मुख मचा हाहाकर.. सेंध लगा नियमों में लोकतंत्र के नाम मजाक बनाया समेटा था बहुत जा रहा बिखर – बिखर हर कोई सोच रहा अपनी – अपनी… नव्य भारत ऐसा…
पावन गणतंत्र
पावन यह गणतंत्र हमारा, कर्तव्यों को भी निभाते हैं।.. मिलकर आओ जग में हम, भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं।…. जब आजादी की अलख जगी, वीरों ने प्राण गवाये थे। पावन मातृभूमि की रक्षा को, वे बलिदानी कहलाये थे।। मातृभूमि की चरण धूलि हम, सदा ही शीश लगाते हैं। पावन यह…
पहचान : शशि महाजन
आज मेरा पहला उपन्यास छप कर आया है , इसे मैंने पापा को समर्पित किया है , जो हूँ आज उन्हीं की वजह से हूँ। यूँ तो कुछ साल पहले तक मैं उनसे नफरत करता था , उन्हें पापा भी नहीं कहता था , कोशिश करता था कि उनसे बात ही न करनी पड़े ,…
अब के ऐसा वसंत खिले आर्गेनिक हर निगाह रहे
कविता मल्होत्रा (स्तंभकार, संरक्षक ) हर साल प्रतीकों के आधार पर हम सभी कुछ राष्ट्रीय और कुछ अँतर्राष्ट्रीय दिवस, कुछ वैश्विक और कुछ प्रतीकात्मक दिवस मनाकर अपने दायित्वों की इति श्री समझ लेते हैं।जिस भारतीय संस्कृति पर समूचा विश्व गर्वित होकर हमारे पारिवारिक संस्कारों के प्रति सम्मोहित होने लगा है, हम सभी उस संस्कृति की…
वर्ष 2022 संकल्प : क्या करें?… क्या न करें?…
डॉ. नीरू मोहन ‘वागीश्वरी’ वर्ष आते हैं और चले जाते हैं परन्तु अपने साथ बहुत-सी दुखद और सुखद यादों के अनुभव छोड़ जाते हैं; जिनको याद करके मन कभी खुश हो जाता है और कभी दुखी। मुझे लगता है सभी को अपने आने वाले समय का इंतज़ार रहता है मगर वह कैसा बीतेगा इसका एहसास…
