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हर युग में बापू आप है जरूरी

राजनीति ने हमको सरहद की लकीरों में बांटा,हिंसा के जानवरों ने हमको बुरी तरह काटा,आज के हैवानों ने आदर्शों के मुंह पर मारा चांटा,बापू आपकी कमी कोई नहीं कर सकता है पूरी,हर युग में बापू आप है जरूरी।तोड़ा आपने हमेशा जाति का बंधन,इश्वर एक है तुम करो उसका वंदन,आपने लगाया हर इंसान को प्यार का…

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“नव्य भारत”

 ये गण का तंत्र, कैसा हो गया मन का मंत्र, हरेक जप रहा नव्य भारत ऐसा  हो कि सारा गणतंत्र जागरूक… अन्तर्मन दहके ज्वाला सा मुख मचा हाहाकर.. सेंध लगा नियमों में लोकतंत्र के नाम मजाक  बनाया समेटा था बहुत जा रहा बिखर – बिखर हर कोई सोच रहा अपनी – अपनी… नव्य भारत ऐसा…

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पावन गणतंत्र

पावन यह गणतंत्र हमारा,         कर्तव्यों को भी निभाते हैं।.. मिलकर आओ जग में हम,         भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं।…. जब आजादी की अलख जगी,            वीरों ने प्राण गवाये थे। पावन मातृभूमि की रक्षा को,            वे बलिदानी कहलाये थे।। मातृभूमि की चरण धूलि हम,           सदा ही शीश लगाते हैं। पावन यह…

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पहचान : शशि महाजन

आज मेरा पहला उपन्यास छप कर आया है , इसे मैंने पापा को समर्पित किया है , जो हूँ आज उन्हीं की वजह से हूँ। यूँ तो कुछ साल पहले तक मैं उनसे नफरत करता था , उन्हें पापा भी नहीं कहता था , कोशिश करता था कि उनसे बात ही न करनी पड़े ,…

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अब के ऐसा वसंत खिले आर्गेनिक हर निगाह रहे

कविता मल्होत्रा (स्तंभकार, संरक्षक ) हर साल प्रतीकों के आधार पर हम सभी कुछ राष्ट्रीय और कुछ अँतर्राष्ट्रीय दिवस, कुछ वैश्विक और कुछ प्रतीकात्मक दिवस मनाकर अपने दायित्वों की इति श्री समझ लेते हैं।जिस भारतीय संस्कृति पर समूचा विश्व गर्वित होकर हमारे पारिवारिक संस्कारों के प्रति सम्मोहित होने लगा है, हम सभी उस संस्कृति की…

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वर्ष 2022 संकल्प : क्या करें?… क्या न करें?…

डॉ. नीरू मोहन ‘वागीश्वरी’ वर्ष आते हैं और चले जाते हैं परन्तु अपने साथ बहुत-सी दुखद और सुखद यादों के अनुभव छोड़ जाते हैं; जिनको याद करके मन कभी खुश हो जाता है और कभी दुखी। मुझे लगता है सभी को अपने आने वाले समय का इंतज़ार रहता है मगर वह कैसा बीतेगा इसका एहसास…

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जलना ही है तो सूरज की तरह जलो

जलना ही है तो सुरज की तरह जलो।रौशनी की तरह चमकोगे। जलना ही है तो जलते दिये की तरह जलो।रौशनी की तरह अंधेरे में भी चमकोगे। इंसान को देखकर इंसान से मत जलो।जल्द ही पतन होगा तुम्हारा। न पछताबे से कुछ हासिल होगा।न ही पैर किसी के खिंचने से। किसी से जलने से शून्य में…

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हाइकु माला

नवीन वर्ष घी, शकर, चूरमा मां का आंगन उन्मन मन ठिठुरता बदन ठंडा है चूल्हा सिकुड़ती मां आंचल में संतान स्नेह उड़ेले बीता बरस खोजता प्रतिपल खुशी के पल देव समाज प्यार भरा आंगन भरे उमंग नवीन वर्ष विद्यालयों का द्वार न रहे बंद बांह पसारे करो शुभ-आरंभ नवीन वर्ष… 2022 डॉ. नीरू मोहन ‘…

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जीवन पथ

अरे जीवन पथ के पथिक विश्राम कर ले तनिक कहां भागा जा रहा अंधी दौड़ प्रतियोगिता तूने ही तो मारी अपने पांव कुल्हाड़ी मालूम तो था न जीवन है चार दिना ईट पत्थर से बनाए पहाड़ हरी-भरी वसुधा उजाड़ क्यों फैलाया आडंबर वनों को काटकर लुप्त चील गिद्धों के परिवार मृत पशु था उनकाआहार चूस…

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हौसले

अड़चने हों हजारों राह में तेरे साथी हौसलों को कभी कम नहीं होने देना। काटकर गिरि को राहें बनाई हैं तुमने बाँध सागर को जग को दिखाया कभी। चाँद मंगल की सरहद भी लांघा तुमने गहराई पयोधर की भी है नापा सभी। देव दानव सभी करते तेरी ही बड़ाई दुष्करों से आँखें नम तू नहीं…

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