कविता और कहानी
जलना ही है तो सूरज की तरह जलो
जलना ही है तो सुरज की तरह जलो।रौशनी की तरह चमकोगे। जलना ही है तो जलते दिये की तरह जलो।रौशनी की तरह अंधेरे में भी चमकोगे। इंसान को देखकर इंसान से मत जलो।जल्द ही पतन होगा तुम्हारा। न पछताबे से कुछ हासिल होगा।न ही पैर किसी के खिंचने से। किसी से जलने से शून्य में…
हाइकु माला
नवीन वर्ष घी, शकर, चूरमा मां का आंगन उन्मन मन ठिठुरता बदन ठंडा है चूल्हा सिकुड़ती मां आंचल में संतान स्नेह उड़ेले बीता बरस खोजता प्रतिपल खुशी के पल देव समाज प्यार भरा आंगन भरे उमंग नवीन वर्ष विद्यालयों का द्वार न रहे बंद बांह पसारे करो शुभ-आरंभ नवीन वर्ष… 2022 डॉ. नीरू मोहन ‘…
‘सर्दी के दिनों में’ (कविता)
दिन छोटे, रातें लम्बी सूरज की रोशनी का कोई भरोसा नहीं, सर्द हवाओं के बीच कभी दिन में अँधेरा, तो कभी रोशनी। मौसम की इस आँख मिचौली में सर्दी के दिनों में सूरज धुँधले आसमां के किसी कोने से कभी झाँकता है सिर उठाकर, तो कभी छिप जाता है बादलों की आड़ में। ऋतु भी…
“छोटी बेटी”
श्रीमती आहूजा की आंखें बंद होने के साथ ही सुनीता को जीवन में अंधकार नज़र आने लगा था। एक अनाथ लड़की का एकमात्र सहारा उसकी मालकिन भी अब नहीं रही थी। उनके दोनों बच्चे विदेश से वापिस आ गए थे। क्रियाक्रम होने के बाद थोड़ी देर में ही सब लोग अपने अपने घर लौट गए…
तुझे वो किरदार होना पड़ेगा.
बकाया बहुत हैं मेरे सपने तुमपे,तुम्हें बेहिसाब होना पड़ेगा , रहोगे कब तक यूं दायरों में, अब तुम्हें आसमां होना पड़ेगा !! हर्फ-हर्फ लिखते रहे “क़िस्से”, जिसके हम अपनी सांसों पर , सब समेट लो संग अपने कि, अब तुम्हें किताब होना पड़ेगा !! सुनो, सरेआम शर्मसार न कर दें कहीं वो लोग, “हमारे खत”,…
हर बाधा को स्वीकार करें
हर बाधा को स्वीकार करें। लड़ कर भी उसे पार करें।। हर बाधा को स्वीकार करें…। यूँ ज़िन्दगी कहाँ आसान निकलती हैं। कहीं शोर तो कहीं शांत ही चलती हैं।। हर बाधा को स्वीकार करें…। संघर्ष को पार करके जो चलते हैं। फ़िर वो ही नर फलते औऱ फूलते हैं।। हर बाधा…
शेष होते वर्ष के अवशेष
निर्जीव खिलौनों से बहलते थे अब तक बच्चे इस जहान के रोबोटिक शिक्षा ने योग की उम्र में भोग भरा मन में इंसान के ✍️ स्वामी विवेकानंद जी का एक कथन है कि अगर किसी देश को उन्नति की राह पर लाना है तो उस देश के बचपन को शिक्षित कर दो।कितनी गहराई है इस…
नमन तुम्हें मेरा शत बार नमन
हे भारत के रत्न तुम्हे मेरा शत बार नमन मौन हो गयी चारो दिशाएँ, शान्त हो गयी सभी हवाये , उदय हुआ गहन उदासी ले सूर्य भी पर निस्तेज सा जैसे कही कुछ खो गया कोई बहुत अपना बस यही खो गया मौन हो चले सभी सुबह के कलरव बस छाई एक निस्तब्धता एक…
