कविता और कहानी
खुलेआम जनमत की खिल्ली उड़ रही है
संसद के अंदर जब शोर-शराबा होता है, अनर्गल ही घात-प्रतिघात होने लगता है। मेहनती जनता की कमाई की बर्बादी पर, जनप्रतिनिधियों का ध्यान नहीं जाता है। संसद में एक मिनट के बहस में व्यय, सुनते हैं उनत्तीस हजार रुपये हो जाता है। सुविधाभोगी जननेता ईमानदारी से सोचें, खर्च होने वाला सब धन कहां से आता…
अँधेरे और उजाले
गंगा के किनारे, यूँ हीं नहीं लगी है भीड़ साहब। लोगों ने पाप किये होंगे शायद बेहिसाब।। और वो कहता है मुझको, आओ कभी मेरे भी द्वार। गर करते हो मुझे से प्यार, बिना किसी दरकार।। काश! वो तो, मेरी हैसियत ना पूछता। अच्छा होता, गर वो मेरी खैरियत को पूछता।। उनका पैग़ाम नफ़रत था,…
“धर्म ताकत या सियासत ?”
हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि चुनाव की सरगर्मी के साथ साथ धर्म के नाम पर सियासत तेज हो जाती है। सर्वधर्म समभाव का पालन करने वाले इस देश की आत्मा को हिंदू मुसलमान के नाम पर बांटने की कोशिशें रुकने का नाम नहीं लेती हैं। देश कोरोना से लड़ रहा है, कितने…
कोख का बंटवारा
रामनरायण के दो बेटों का नाम रमेश और सुरेश है। युवा अवस्था में रामनारायण के मृत्यु होने के बाद उनकी पत्नी रमादेवी ने रामनारायण के जमा पूंजी और पूर्वजों से मिली संपत्ति से दोनों बेटों का परिवरिश किया। रमादेवी का बड़ा बेटा रमेश पढ़ लिखकर शहर में सरकारी विभाग पर बड़े बाबू के पद पर…
पितृदिवस पर कनाडा से “मनस्विनी” समूह के सभी सदस्यों के सहयोग से स्वरचित पंक्तियां
न मेरी आंख ही फड़कीन ही हिचकियाँ आईंमगर फिर भी यें लगता हैंकि कोई याद करता हैं….वो ओर कोई नहीं मेरे पापा…पापा की दुलारी,थोड़ी बिगड़ी, थोड़ी प्यारीसुबह जल्दी जगाते हैं पापा,नौ बजे रात मैं बत्ती बुझाते हैसदैव याद में आतेमेरे प्यारे पापाउनकी दिलचस्प बातेंज्ञान से भरी नसीहतेंउनकी किताबों का भंडारअनुशासन में छिपा प्यारमेरे प्यारे पापापापा…
गुरु महिमा
हे गुरुदेव! प्रथम वंदन आपको साक्षात दण्डवत प्रणाम , बिना गुरु के ज्ञान अधूरा , फिर -फिर गोता खाय, गुरु मंत्र को आत्मसात कर , भव सागर पार कर जाय। गुरुदेव मानव को नवजीवन देते , गुरुदेव मानव का तिमिर मिटाते, गुरुदेव मानव को प्रकाशवान बनाते , गुरुदेव हृदय में ज्ञान दीप जलाते, गुरुदेव ही…
हर धड़कन हो आरती वँदन
कविता मल्होत्रा (संरक्षक – स्तंभकार, उत्कर्ष मेल) मीरा सा अरमान बनें, सब नई उम्मीदों का आसमान बनें विषपन करके भी सोचें यही, हर साँस का इस्तेमाल कैसे हो ✍️ लगभग दो वर्ष पूरे होने को आए, लॉकडाऊन का शाब्दिक अनुवाद नई सदी को परिभाषित करने लगा है।लेकिन तमाम महकमों की तालाबंदी के बावजूद भी अँतर…
“समर्पण से मिलती है राह।”
समर्पण का अर्थ है “समस्त अर्पण” उस सर्वशक्तिमान के समक्ष जिसने हमें बनाया है। किसी निर्धारित उद्देश्य से हर प्राणी को पृथ्वी पर भेजा है। जब आप समर्पण भाव से जीवन को बिताते हैं तो सभी मुसीबतों से अपना नाता तोड लेते हैं। जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार कर लेते हैं। ईश्वर के…
