कविता और कहानी
खुराक (कहानी)
गर्मी की चिलचिलाती धूप में, खड़ी दोपहरी में चरवाहे किसी पेड़ के नीचे बैठ जाते ,अपनी अपनी पोटली खोलते खाना खाते तथा वहीं पास के किसी कुएँ या तालाब का पानी पीकर कुछ देर आराम करते थे।उनके आसपास ही पेड़ों की छाया में उनके गाय ,बछड़े, भैंस भी वहीं पास में आज्ञाकारी बच्चे की तरह…
रंग गालो पे कत्थई लगाना
अबके सावन में ओ रे पियाभीग जाने दो कोरी चुनरियामीठी मीठी सी बाली उमरियाभीग जाने दो कोरी चुनरिया हम को मिल ना सकेंतेरे रहमो करमसात रंगों में डूबे सातो जन्मरंग गालो पे कत्थई लगानाधीमे धीमें से खोलो किवडियाभीग जाने दो कोरी चुनरिया रंग प्रीत का धानी बहुत हैये नशा भी बहुत ही सुहानाएसे अल्हड से…
नारी स्वाभिमान
तूने अपने घूंघट को आसमां बना लियाऊँची थी उड़ाने पर घूंघट में थाम लियापलके झुकी और हुनर को हाथों में सजा लियाऔर अपने सपनों का आसमां खुद ही बना लिया। अकेले नही सबको साथ लेकर चली वोस्त्रीत्व का मकसद सबको समझा दिया।आई थी मुसीबत,राह में अनेकोदेख तेरा ओज उन्होने ठिकाना बदल लिया। बना ली है…
खुशी की तलाश
खुशी शब्द ही खुशी का एहसास कराता है,चेहरे पर मन्द मुस्कान,मन में उमंग सीमहसूस होती है। खुशी की तो हर किसी को तलाश रहती है,खुशी तो हमारे अंदर से ही तो उपजती है बस हर परिस्थिति में अपने आप को सयंम के साथ सब्र रखते हुए मन की गहराइयों से अनुभव करना है,कुछ न कुछ…
यादे यूँ भी पुरानी चली आईं (गीत)
मन की बाते बताये तुम्हें क्याहै ये पहली मुहब्बत हमारीभले दिन थे वो गुजरे जमानेमीठी मीठी सी अग्न लगाई हम तो डरते हैं नजदीक आकेजान ले लो – ऐ जान हमारीकब से बैठे दबाये लबो कोकब से यारी है गम से हमारी चढगयी सर आसमाँ तकये नशीली रात खुमारीबजते घुघरू से आवाज आईदेखो कैसी चली…
योगासन बनाम दामासन
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव मौसम में भले ही अभी गर्मी न आई हो पर पेट्रोल और डीजल की रोज बढ़ती कीमतों ने हाय-तौबा तो मचा ही रखी है । रोज दाम बढ़ रहे हैं । सुबह उठते ही सबसे पहिले यह पता करो कि ‘‘भैया आज पेट्रोल का भाव बिक रहा है..’’ । ऐसा तो नहीं कह…
रब की रज़ा में राज़ी रहना आ जाए तो हर पल विशेष है
क़ुदरत के करिश्मों पे स्वामित्व जताता राख का अवशेष है ईश्वर की रज़ा में राज़ी रहना आ जाए तो हर पल विशेष है ✍️ आज हर तरफ अशाँति और अफ़रा तफ़री का माहौल है, क्यूँकि हर कोई अस्थायी संपत्ति और संबंधों पर अपना स्वामित्व जता कर खुद को महान साबित करने पर तुला है।महानता तो…
महिला -दिवस
जमाने के साथ चले चलना तो कोई बात नही, आकाश की ऊँचाइयों को छुओ तो कोई बात बने। कोमल बनो तो बनो कोई बात नहीं, चट्टानों से टकराने की ताकत हो तो कोई बात बने। महिला दिवस मनाओ तो मनाया ही करो, हर दिवस को ये दिवस बनाओ तो कोई बात बने । सजे रहना…
” रास्तों से मंज़िल तक”
ज़िन्दगी के दामन में फूल ही फूल नहीं हैं, कांटे भी हैं। यह मालूम तो था लेकिन जाना आज ही है। ख़्वाब देखना आसान है। किन्तु उस ख़्वाब को हकीकत बनाकर ज़मीन पर उतरना मुश्किल है। मैंने हिम्मत करके यह काम अपने हाथों में ले लिया। हर कीमत पर उसे पूरा करने की चेष्टा मेरे…
