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“बैंक मैनेजर का चरित्र”

पंजाब नेशनल बैंक के चीफ मैनेजर बरियार साहब अनुशासन के मामले में कोई, किसी प्रकार से समझौता नही कर सकते थे या नहीं करते थे।अनुशासन के पक्के होने के कारण पूरे राज्य के सभी बैंक के लोग(कर्मी)उन्हें जानते थे।किसी भी शाखा में पदस्थापना होने पर उनके योगदान करने से पूर्व ही उस बैंक के सभी…

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“महाप्रलय मचाओ माँ”

बस बहुत हो चुका हलवा- पूरी कन्या पूजन भी बहुत हुआ अब नहीं सुरक्षित कहीं बेटियां सब कर रहे कर- बद्ध प्रार्थना  नवरात्रों में भोग लगाने अब घर- घर मत आओ माँ कितनी निर्भया और बलि चढ़ेंगी ? आज हमें बतलाओ  माँ मैया सीता तो  निष्कलंक थी क्यूंकि लंका में  रावण था जनक नंदिनी निष्कलंक…

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करो मेरा उद्धार (दोहे )

1.कमल आसना शारदा, करो मेरा उद्धार। विद्वजनों में मान हो,लेखन में हो धार।। 2. विद्या दान महा दान , समझो रे नादान। किसी को शिक्षित न किया,तो कैसे विद्वान।। 3. विद्यावान बनें सभी,करें राष्ट्र निर्माण । बेटा बेटी सब पढ़ें,तब ही हो उत्थान।। 4. बेटी को पढ़ाने में क्यूँ आती है लाज । बेटा भविष्य…

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पुनर्वास

खूबसूरती लिपटी मिली हर निगाह के त्रास में बेवजह तलाशा करते हैं लोग जिस्म ए लिबास में ✍️ कोरोना काल के दौरान कितने ही लोग बेरोज़गार हुए, कितने ही ज़रूरतों के चलते अपनी ही निगाह में शर्मसार हुए। सच है किसी के आगे हाथ फैलाना एक साथ कई मौतें मरने के बराबर है।अपनी आत्मा को…

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गुल्ली”

 जानकीनाथ जी के घर आज सुबह से ही चहल-पहल हो रही थी।उनकी पत्नी ने एक पुत्र रत्न को जन्म दिया था। कई वर्षों की भगवान के पूजा पाठ तथा विनती के बाद अब जाकर भगवान ने उनकी प्रार्थना सुनी थी।पूरे गांव भर में मिठाई बंटवाई जा रही थी। तभी एक गिल्ली छिटकर जानकीनाथ के पिता…

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” उपहार”

सुमित्रा देवी आज दादी बन गई थी। उनकी पुत्रवधू ने एक परी जैसी बेटी को जन्म दिया था। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। घर में सभी खुश थे लेकिन उनकी खुशी सबसे बढ़कर थी। पोती के जन्म लेते ही उन्हें महसूस हुआ जैसे उनका अकेलापन दूर करने वाले फरिश्ते ने घर में पैर रखा…

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फिल्मी बुतों के विसर्जन का अवसर

यशपाल सिंह यश ‌आजकल बॉलीवुड चर्चा में है। बॉलीवुड हमेशा ही चर्चा में रहा है । जब से बच्चा जवान होना शुरू होता है फिल्मी सितारे उसके स्वप्नलोक का हिस्सा बन जाते हैं । उन्हें देखना अच्छा लगता है, उन्हें सुनना अच्छा लगता है, उनकी बातें करना अच्छा लगता है। विज्ञापनदाता इस बात को खूब…

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घर वही,जहाँ बुढ़ापा खिलखिलाये

किसी ने सच ही कहा है कि जिस घर मे बुजुर्ग सन्तुष्ट व प्रसन्नचित्त रहते हैं,वह घर धरती पर स्वर्ग के समान है,परन्तु आज आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में रिश्तों में उत्पन्न व्यवहारिकता व आपसी सामंजस्य व  घटती सम्मान की भावना के कारण ऐसा स्वर्ग अब अपवाद का रूप लेता जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में…

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बिन बेटी सब सून !

जीवन में आनंद का, बेटी मंतर मूल ! इसे गर्भ में मारकर, कर ना देना भूल !! बेटी कम मत आंकिये, गहरे इसके अर्थ ! कहीं लगे बेटी बिना, तुझे सृष्टि व्यर्थ !! बेटी होती प्रेम की, सागर सदा अथाह ! मूरत होती मात की, इसको मिले पनाह !! छोटी-मोटी बात को, कभी न देती…

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