Latest Updates

” दीपोत्सव”

रघु मिट्टी के खिलौने और बर्तन बनाने वाला एक कुम्हार था। उसके बनाए सामान की खूब बिक्री होती थी। हर साल दिवाली पर रघु दिए और खिलौने बनाता था। मिट्टी के दियों को जोड़कर अलग अलग दिखने वाले झूमर भी बनाता था। त्यौहार पास आता तो उसके पास बिल्कुल भी समय नहीं होता था। रात…

Read More

दीप जलाना

दीप पर्व पर, एक काम यह करना सब हर हाल में। उनके नाम भी दीप जलाना जो बुझे कोरोनाकाल में।। स्वस्थ सुरक्षित रहे सभी जन, इसके हित बस काम किये। सभी चिकित्सक जुटे रहे बस नाममात्र आराम किये। और चिकित्सा करते करते जो जीवन हो गये बलिदान। दीपक उनके निमित्त जलाकर दे हम सब उनको…

Read More

इमरती बड़ी चुलबुली… (बाल-कविता )

इमरती है बड़ी चुलबुली सोनपपड़ी अकड़ी अकड़ी कलाकंद दे रहा आनंद बरफी बिफरे करे फंद रसगुल्ला कर रहे हल्ला लड्डू ने झाड़ा है पल्ला मक्खनबड़ा रहते हैं मौन खीरमोहन की चली पौन जलेबी रस में डूबी पड़ी रबड़ी बात करे तगड़ी मोहनभोग लगे अच्छे गूँजी दे रही है गच्चे घर अंदर इनके हाँके हैं बाहर…

Read More

दिव्य दृष्टि के दीप जलाएँ

कविता मल्होत्रा बाल दिवस और दीपोत्सव, एक ही दिन आने वाले, आत्मा को आनँदित करते दोनों उत्सव, भारत के प्रत्येक नागरिक को, दोहरी भूमिका निभाने के लिए, सत्यम शिवम् सुँदरम की भावना के प्रति फिर एक बार आगाह कर रहे हैं। हमारे देश के मौजूदा हालातों, और बाज़ारू चकाचौंध के प्रति आकर्षित होता, मासूम बच्चों…

Read More

आखिर क्यों बदल रहे हैं मनोभाव और टूट रहे परिवार?

भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते घरों की ऊँची दीवारों ने आपसी वार्तालाप को लुप्त कर दिया है. पत्थर होते हर आंगन में फ़ूट-कलह का नंगा नाच हो रहा है. आपसी मतभेदों ने गहरे मन भेद कर दिए है. बड़े-बुजुर्गों की…

Read More

ज़िन्दगी के रंग

ज़िन्दगी एक पहेली सी लगती है, दुखो की छाव एक सहेली सी लगती है । हम तो बैठे थे इक आशा की किरण थामे पर अब आशा करना एक नादानी सी लगती है । ज़ख्म जैसे भी हो हमेशा दर्द ही देते है , अब तो ख़ुशी महसूस करना भी , इक बात पुरानी लगती…

Read More

“बैंक मैनेजर का चरित्र”

पंजाब नेशनल बैंक के चीफ मैनेजर बरियार साहब अनुशासन के मामले में कोई, किसी प्रकार से समझौता नही कर सकते थे या नहीं करते थे।अनुशासन के पक्के होने के कारण पूरे राज्य के सभी बैंक के लोग(कर्मी)उन्हें जानते थे।किसी भी शाखा में पदस्थापना होने पर उनके योगदान करने से पूर्व ही उस बैंक के सभी…

Read More

“महाप्रलय मचाओ माँ”

बस बहुत हो चुका हलवा- पूरी कन्या पूजन भी बहुत हुआ अब नहीं सुरक्षित कहीं बेटियां सब कर रहे कर- बद्ध प्रार्थना  नवरात्रों में भोग लगाने अब घर- घर मत आओ माँ कितनी निर्भया और बलि चढ़ेंगी ? आज हमें बतलाओ  माँ मैया सीता तो  निष्कलंक थी क्यूंकि लंका में  रावण था जनक नंदिनी निष्कलंक…

Read More

करो मेरा उद्धार (दोहे )

1.कमल आसना शारदा, करो मेरा उद्धार। विद्वजनों में मान हो,लेखन में हो धार।। 2. विद्या दान महा दान , समझो रे नादान। किसी को शिक्षित न किया,तो कैसे विद्वान।। 3. विद्यावान बनें सभी,करें राष्ट्र निर्माण । बेटा बेटी सब पढ़ें,तब ही हो उत्थान।। 4. बेटी को पढ़ाने में क्यूँ आती है लाज । बेटा भविष्य…

Read More

पुनर्वास

खूबसूरती लिपटी मिली हर निगाह के त्रास में बेवजह तलाशा करते हैं लोग जिस्म ए लिबास में ✍️ कोरोना काल के दौरान कितने ही लोग बेरोज़गार हुए, कितने ही ज़रूरतों के चलते अपनी ही निगाह में शर्मसार हुए। सच है किसी के आगे हाथ फैलाना एक साथ कई मौतें मरने के बराबर है।अपनी आत्मा को…

Read More