कविता और कहानी
कोरोना को हराना है
चाहे छाये हर और सूनापन,मिलना हो जाये एक दूजे से कम। कितना भी मन घबराए,चाहे कितनी भी दहशत बढ़ती जाए। *करना है एक ही प्रण,किसी भी तरह कोरोना को हराया जाए।* व्यवसाय कैसे चल पाएंगे और अब कैसे बच्चे पढ़ पाएंगे। चाहे कितनी भी विपदाएं आये,घर मे मन कितना भी घबराए। *करना है एक ही…
कोरोना से मुक्ति के लिए जो सेवारत हैं.
Doctor Sudhir Singh कोरोना से मुक्ति के लिए जो सेवारत हैं,प्रभु उन सबों को सपरिवार स्वस्थ रखें.एक ही लक्ष्य रहे़;कोरोना मुक्त देश रहे,इसके लिए सब लोग सदा संघर्षरत रहें.‘सामाजिक – दूरी’ का पालन करते हुए,कोरोना के संक्रमण से बचकर रहना है.सबों को ‘लॉकडाउन’ सहर्ष मानते हुए,स्वयं और समाज को सुरक्षित रखना है.सबके सत्प्रयास से ही’कोरोना’…
भयभीत ‘कोरोना’ इंसान से कहता है.
Doctor Sudhir Singh भयभीत ‘कोरोना’ इंसान से कहता है,तेरे दृढ़-संकल्प के आगे ‘मैं’ हार गया.अनोखा ही संयम और प्रबंधन है तेरा,बोरिया-बिस्तर मुझे समेटना पड़ गया. सामाजिक-दूरी व लॉकडाउन केआगे,संक्रमण काआक्रमण नाकाम हो गया.गजब का धैर्य और एकता है तेरे पास,हमारा सब मनसूबा मिट्टी में मिल गया. अब इस दुनिया से ही विदा हो रहा हूँ,‘सामूहिक-शक्ति’…
हमारा जीवन हमारे कर्मों की आधारशिला है
This is the Universal Truth. यह एक सार्वभौमिक सत्य है हम जो ब्रह्मांड को देते हैं वही लौटकर हमारे पास आता हैl हम जो बोते हैं हमें वहीं काटना पड़ता है lआज की इन परिस्थितियों में संत कबीर के दोहे एकदम सटीक प्रतीत हो रहे हैं ….. “करता था सो क्यों किया अब कर…
कोरोना, तुम पर हम भारी हैं….
कोरोना, तुम पर हम भारी हैं…. ज़ंग अभी जारी है, आई ये महामारी है घबराओ नहीं, अपनी भी पूरी तैयारी है थोड़ी सावधानी, सबकी जिम्मेदारी है ये.. ये कोरोना! तुम पर हम भारी है..। ” वसुधैव कुटुम्बकम ” के हम पुजारी सतत करते हम जिसकी पहरेदारी हम हितकारी उपकारी कल्याणकारी हैं ये.. ये कोरोना! तुम …
किसी महासमर से ‘कॉरोना’ है कम नहीं
Doctor Sudhir Singh किसी महासमर से’कोरोना’ है कम नहीं,संपूर्ण मानव-जाति को उससे लड़ना है.पुरुषार्थी योद्धा को संयम और युक्ति से,महायुद्ध कोअब जीतकर ही दम लेना है.दुनिया का प्रत्येक इंसान महान योद्घा है,युद्ध के कौशल से कोई नहीं अनजान है.कंधा से कंधा मिलाकर कर लड़ लेने से,‘कोरोना’ को हराना बिल्कुल आसान है.जाति-धर्म-सरहद का भेद-भाव भूल कर,आइए!महामारी…
प्रेमगीत: कोरोना
संकटकाल निकल जाए तो। तुमको जीभर प्यार करूँगा।। अभी तो छूने में भी डर है, मन में कोरोना का घर है। बीतेगा तो पुनः मिलेंगे, बुरा समय तो ये पलभर है।। बाहों का आलिंगन होगा। तुमसे आँखे चार करूँगा।। संकटकाल निकल जाए तो। तुमको जीभर प्यार करूँगा।। कितने ख़्वाब अधूरे-पूरे, जिनको तुमने रोज़ सजाया। एक-एक…
उम्मीद के दीप
माना रात घनी है,घोर तमस से भरी है। उजियारी भौंर के सामने कई चुनौतियाँ धरी हैं। तुम सूरज पर एतबार बनाए रखना। उम्मीदों के दीपक जलाए रखना। मंजिल बहुत दूर हो,दर्द बेहिसाब हो। सबसे मेरा रश़्क हो,उजड़े हुए मेहताब हो। जुगनुओं से इल्तिफात तुम बनाए रखना। उम्मीदों के दीपक जलाए रखना। मंज़र-ए-नदीश में कष्ट इफरात…
लॉक है पर डाउन नहीं
कोरोना महामारी विश्व पीड़ित हाहाकार चहुँ और एक से अनेक , कब कब हज़ार से लाख हुए पता ही नहीं चला किसकी चाल , फिर देखेंगे पहले कोरोना से दो चार कर लें भारत भी अछूता नहीं अब सभी भयभीत इससे २१ दिन का लॉक डाउन पूर्ण होने को है अनेकता में एकता पहचान हमारी…
