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राष्ट्रमुकुट की प्रतीक्षा

कर कर के युग प्रतीक्षा थक जाऊंगी। क्या पता राष्ट्रभाषा कब बन पाऊंगी। मेरी आत्मा से वे चलचित्र बनाते, मेरे वाक्यों से अरबों रोज कमाते, मेरा अधरों पर नाम तक नहीं लाते, उस फिरंगिनी बोली को गले लगाते। सब देशों की प्रिय भाषा बन जाऊंगी, क्या पता राष्ट्रभाषा कब बन पाऊंगी। शिशुओं की मुझसे दूरी…

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मेरा मन

छाया चंहुं ओर अंधेरा है  जन-जन को भय ने घेरा है  धुआं धुआं सा तन मेरा धधक रहा है मेरा मन। माता की छाती छलनी है पापा की पगड़ी उछली है राक्षसों ने नोच-नोच खाया कह रहा भारत मां का क्रंदन। रोता है मेरा रोम रोम चीत्कार करें पृथ्वी व्योम हे धरती मां तू फिर…

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भारत वन्दना

हे जन्मभूमि भारत वन्दन करूंगा तेरा, है कर्मभूमि भारत वन्दन  करूंगा तेरा।          तू चेतना  की  देवी          तू कर्मणा की  देवी          तू भावना की  देवी          तू साधना  की देवी हे कर्षभूमि भारत  वन्दन करूंगा तेरा, हे धर्मभूमि भारत  वन्दन करूंगा तेरा।           तू  एकता  सिखाती           तू  नेकता   दिखाती           तू  नीति  …

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आत्महत्या कोई विकल्प नहीं

नीट की परीक्षा उत्तीर्ण ना कर पाने के कारण स्वाति बहुत उदास हो गई थी। कुछ नंबर की ही कमी रह गई वरना पेपर निकल जाता। यह उसका तीसरा प्रयास था उसे पूरी उम्मीद थी कि इस बार क्वालीफाई कर लेगी। ऊपर से समाचारों में नीट की पारदर्शिता पर उठे सवालों से उसका मन और…

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“कलबूत” – वंदना गर्ग

अरे वाह! आ गई आपवेलकम! वेलकम!कुशन की टेक लगाकर आराम से बैठीऐ (मनोवैज्ञानिक ने मुस्कुराते हुए आदर भाव से कहा)मैं चाय वाय का इंतजाम करती हूं, मौसम भी अच्छा हुआ है,सच्च पूछो तो मॉनसून की बात ही अलग होती है, है ना!क्या कहती हैं आप?हां बिलकुल , ठीक कहा!हर मौसम का लुत्फ ही अलग होता…

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 रेशमा 

रेशमा एक बहुत ही सीधी-सादी लड़की थी । जहां उसके साथ की लड़कियां फ़ैशन ,टीवी और मोबाइल में लगी रहती थी वहीं वह उम्र से पहले ही बड़ी हो चुकी थी। रेशमा का पिता शराबी था वह दर्जी का काम किया करता था परन्तु सारी की सारी कमाई अय्याशी और शराब पर लुटा दिया करता…

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सच्ची तस्वीर

अपने सपनों का इक महल बनाया है मैंने। उसको ख्यालों के फूलों से सजाया है मैंने।। कागज की कश्ती, बारिश का पानी, सब पुरानी बातें हैं। डिजिटल  दुनिया के साथ अपना कदम बढ़ाया है मैंने।। इस शोर मचाती दुनिया में खूबसूरत खामोशी को अपनाया है मैंने। जब-तब संगीत सुना है सागर की लहरों से खूब…

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हरा भरा खेत

बारिश हुई झम झमाझम , मेढ़क टर्र टर्र टर्रा रहे हैं । झींगुर बजा रहे शहनाई , केंचुए मिट्टी ये खा रहे हैं ।। पहले जो पड़े हुए थे श्वेत , आज हुए हरे भरे ये खेत । कह रहा है हर्षित बादल , चल किसान अब तो चेत ।। पड़े जो अब तक विरान…

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जुगनू इन रातों के : अनिल भारद्वाज एडवोकेट

शीतल नहीं चांदनी रातें, उमस भरा सारा दिन, जाने कहां छिपी वर्षा ऋतु,कहां खो गया सावन। फूलों के मौसम में जिसने ढेरों स्वप्न संजोए, बिना आंसुओं के वो क्यारी चुपके चुपके रोए। सूख रहे हैं पुष्प लताऐं, प्यासी है अमराई, किसी पेड़ की छाया में,जाकर लेटी पुरवाई, जाने कहां जा बसे वे दिन,रिमझिम बरसातों के,…

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गीतों के होठों पर

फिर वही यादों की बारिश,वही गम का मौसम। जाने कब झूम के आएगा प्यार का मौसम। ख्वाबों के ताजमहल, रोज बना करते हैं, वादों के शीश महल, चूर हुआ करते हैं। फिर वही टूटी उम्मीदों के खंडहर सा मौसम, जाने कब झूम के आएगा प्यार का मौसम। चांदनी आती नहीं, चांद भी नहीं आता, तारों…

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