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भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार बन गया शिष्टाचार भुखमरी-गरीबी का गरम बाजार सरकारी योजनाओं का व्यापार लालफीताशाही का अत्याचार जनतंत्र बन गया आज मजाक, संसद में जा बैठे चोर हजार कुर्सी की खींचतान में नेताओं ने प्यारे भारत की अवाम दी मार हे! सुभाष,भगत, बिस्मिल, असफाक कब होगा भारत भू पर सच्चा उजियार फैला साम्राज्य पाश्चात्य संस्कृति का भारतीय…

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दीपावली की शुभकामनाएँ”

कविता मल्होत्रा (संरक्षक उत्कर्ष मेल) बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी का त्योहार समूचे भारतवर्ष में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। लेकिन सदियों से रावण वध की रस्में पूरी करता ये समाज आज तक रामराज्य लौटा लाने में सफल नहीं हो पाया। हम सभी जानते हैं कि एक हृदय से दूसरे हृदय तक…

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मगर….

खफा हो गए मुझसे मेरे ही शब्द बहुत सोचा मगर कुछ लिख पाया नहीं। एक नगमा था जो गाती थी कभी मैं आज बहुत सोचा मगर याद कुछ आया नहीं। ये जो बदली थी न ये कल भी थी बरसी बहुत टूटकर मगर मेरे मन को भिगाया नहीं। ये जो राह गुजर रही है आना…

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बूढ़ा-बुजुर्ग जब वृद्धाश्रम में बस जाता है

सिर पर बोझ जब भीअसह्य हो जाता है, आदमी तुरंत  उसे उतार कर रख देता है. इस भरी  दुनिया में  सिर्फ माता-पिता ही, संतान की जिम्मेवारी जीवन भर ढोता है. फूल समान लगता है सबों का बोझ उसे, माँ-बाप  मुस्कुराकर उसे उठाता रहता है. खुद के बुढ़ापा का बोझ  भूल  जाता वह, गदहे की तरह…

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एक खुशी यह भी

हल्की हल्की बारिश हो रही थी और हवा भी सर्द थी । रजाई में ही बैठे बैठे थोड़ी सी गर्म चाय मिल जाती तो कितना अच्छा होता पर नहीं ऐसा नहीं हो सकता था। घर में गहमागहमी का मौसम पसरा पड़ा था क्योंकी दादी जी की हालत ख़राब थी । कुछ समय बाद उनको नीचे…

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एक सौ पचासवीं जयन्ती पर

एक सौ पचासवीं जयन्ती मना रहा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की, पक्ष/विपक्ष मित्र/शत्रु सभी दिखते हैं गांधी के विचारों पर एकमत, आज भी प्रासंगिक हैं उनके विचार/ शिक्षाएँ, तभी तो हुनर को मिलने लगा सम्मान स्वच्छता मन/तन की घर/बाहर/आसपास की ईमानदारी की शर्त अपने लिए सबसे पहले यही तो कहते रहे सदा, सुना/पढ़ा सब लोगों…

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रावण से राम तक

दशहरे पर दो बातों पर ध्यान देते हैं:पहली, दशमलव प्रणाली में मूलभूत संख्याएँ दस ही हैं – शून्य से लेकर नौ तक। इतने ही महापंडित ज्ञानी रावण के मुख भी हैं। बाकी सारी संख्याएँ इन्हीं दस संख्याओं से बनी हैं। संख्याएँ जहाँ तक जा सकती हैं वहां तक रावण के मुख मिलकर जा सकते हैं।…

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साझा काव्य संकलन ‘संगम स्वर’ का हुआ भव्य लोकार्पण

दिनांक 23-9-2019 को राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जी की जयंती के अवसर पर गोरखपुर उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित संगम सांस्कृतिक साहित्यिक एव्ं समाजिक संस्था द्वारा 253वीं नियमित मासिक काव्य गोष्ठी होटल शिवम् गेस्ट हाऊस में सफलता पूर्वक सम्मपन हुई। साथ ही साथ “संगम स्वर” ( यह पुस्तक संगम संस्था के स्मृति शेष व सक्रिय…

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उसका बचपन

(सुमन नागर) सुबह उठते ही उसका काम शुरू होता है प्यार और दुलार से उसका दूर तक वास्ता नहीं होता है। होता है वो रोज ट्रैफिक सिग्नल्स पर हाथ में कभी पोछा कभी बेचने का कुछ सामान होता है। क्या कभी सोचा है क्यों उसका बचपन ऐसे सड़को पर बीत रहा है? क्यों नहीं वो…

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**काफल * एक सत्य कथा * Myrica Esculenta

प्रस्तावना========ये बात एक सच्ची घटना पर आधरित एक सच्चा लेख है़ ! जिसको की मैने जब सुना तो इस घटना को लिखे बिना नहीं रह पाया ! वेसे तो यहाँ कई घटनाए कहानियो का रूप ले चुकी है़ ! मानकों द्वारा ये भी नहीं की कभी इस घटना को मुद्रित नहीं किया गया होगा !…

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