कविता और कहानी
उत्तराखण्ड के पहाड़ अब दरक रहे है़
उत्तराखण्ड के पहाड़ अब दरक रहे है़ टूट कर धीरे धीरे खिसक कर सरक रहे है़ ! टूट कर चूर हो रहा है़ अब उत्तराखण्ड का सीना मुश्किल होता जा रहा है़ अब पहाडो मे जीना ! जगह जगह उत्तराखण्ड मे आपदाएँ मुँह पसारे है़ , पहाडो मे प्रसिध्द अलकनन्दा मंदाकिनी दो धारे है़ !…
जन मानस के हृदय में निस्वार्थ प्रेम उगा पाएँ राष्ट्र निर्माण में कुछ एैसा योगदान कर जाएँ
नवम माह नवीन सृजन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है,तो क्यूँ न इस वर्ष के नौंवे महीने में अपने अँदर के शैशव की मासूमियत को जागृत कर के निस्वार्थता को सृजित किया जाए,और एक मज़बूत राष्ट्र के निर्माण में अपना सहयोग देने के लिए सबसे पहले अपने ही अहम को दफ़ना कर खुद…
कविता- टेढ़ी लुगाई
का कयें बैना बनत ना कैवो अब तो मुश्किल है दुख सैवो बड़ी कुलच्छन बहुआ आयी रोज रोज ही लड़े लड़ाई एक दिन बा उठत भोर सै रोन लगी बा जोर जोर सै कैन लगी मैं मायके जैहों ई घर में एक दिन ना रैहों मैनें कई का बात बताओ कीने का कई हमें सुनाओ…
बुजुर्ग की झोली में खुशियां भर दीजिए
बुजुर्ग की झोली में खुशियां भर दीजिए बुजुर्ग की यादाश्त कमजोर हो जाती है, बेचारे से अक्सर गलतियां हो जाती हैं. बेवजह उन्हें उलहना सुनना पड़ता है, जिल्लत की जिंदगी ढोनी पड़ जाती है. दिल की बात कहें तो वे किससे कहें? कोई भी हमदर्द उनकेआसपास नहीं है इसलिएअकेले में वे चुपके से रो लेते…
ग़ज़ल : अभी तेरी कहानी में मेरा किरदार जिंदा है
भले में मर गया हूँ पर मेरा मेआर जिंदा है अभी तेरी कहानी में मेरा किरदार जिंदा है गिराओ खूब नफरत से भरे शोले मेरे घर पर हर इक शय की हिफाज़त को मेरा सरकार जिंदा है अभी भी श्याम जिंदा है अभी भी राम जिंदा है ज़मीं पे मेरे मालिक का हर इक अवतार…
बिना बुलाए क्रोध नहीं आता है
बिना बुलाए क्रोध नहीं आता है,निमंत्रण देने पर ही वहआता है.स्वागत की पूरी तैयारी देखकर,मन केआँगन में प्रवेश करता है.अंदर घुसते ही तांडव-नृत्य कर, अपनी हाजिरी दर्ज करवाता है.शिव-तांडव का सबको पता है,विध्वंस करने ही वह आता है.क्रोध कभी तांडव करे ही नहीं,इस हेतु संयम से काम लीजिए.क्रोध के उठते तीव्र उफान को,प्रेम के फुहारा से…
“जन्मे कृष्ण कन्हाई “
जन्मे कृष्ण कन्हाई आज मैया मन ही मन हर्षाय रहीं । बगियन में फूले कुसुम विविध, कोयलिया भी है गाय रही । वसुदेव देवकी व्याकुल है, भय कंस का उन्हे डराय रही। लै छाज में कान्हा को चले , गोकुल को राह है जाय रही। सुर नर मुनि मन में पुलकित, प्रभुदर्शन की बेला आय…
ठंडा प्रतिशोध (कहानी)
–डॉ. मनोज मोक्षेंद्र मुसहर टोला में अपना बसेरा बनाने से पहले धनीराम मिसिर को हालात ने गिरगिट की तरह रंग बदलना सिखा दिया था। बम्हरौली गांव के काइएं ब्राह्मणों को चकमा देकर वे सपरिवार जान बचाकर भाग तो निकले थे; पर, पूरी तरह ठन-ठन गोपाल थे। कुर्ते की ज़ेब में और बटुए में एक दमड़ी…
