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फिर हंगामे की भेंट चढ़ गया ससंद का सत्र : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
राजनीतिक सफरनामाएक बार फिर बाबरी मस्जिद का भूत बाहर निकल आया है । संभवतः हुमायुं कबीर ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए बाबरी मस्जिद के नाम से एक नई मस्जिद बनाने के लिए नींव रख दी है । विगत छै महिनों से इसको लेकर चर्चा चल रही थी…….उसने भी इस पूरी प्रक्रिया को लेकर…
व्यंग्य : साहेब ! इतना लादीए, जामे कुटुंब समाए…!
पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी यूजीसी पर मचे घमासान के बीच अब सोशल मिडिया पर लोग पूछ रहे कि आरक्षण की कोई सीमा है भी या जन्म जन्मांतर के लिए लागू हों चुका है ? भारत के जिस जातिवाद पर सुप्रीमकोर्ट ने भी चिंता जताई है उसकी जड़ ही आरक्षण…
विश्व में लड़कियों की स्थिति और शिक्षा का महत्व
मनजीत सिंह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, हरियाणा आज की दुनिया प्रगति, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की खूब चर्चा करती है। लेकिन जब हम जमीनी हकीकत देखते हैं, तो लाखों लड़कियाँ आज भी अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं। कई लड़कियों के लिए बचपन आज भी डर, हिंसा, गरीबी और बेबसी से भरा है। उन्हें उचित शिक्षा, व्यक्तिगत…
एप्सटिन फ़ाइल्स : शर्म, सन्नाटा और हमारी सामूहिक विफलता
सत्ता-संरक्षित अपराधों के सामने समाज, मीडिया और न्याय की सामूहिक परीक्षा) — डॉ. सत्यवान सौरभ इतिहास के कुछ क्षण ऐसे होते हैं जब सभ्यता अपने ही आईने में झाँकने से डरने लगती है। आज हम ठीक उसी मोड़ पर खड़े हैं। जिन कांडों का खुलासा हो रहा है—जिनके वीडियो, दस्तावेज़ और गवाह सार्वजनिक हो चुके…
AWWA (आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन) सम्मान समारोह
AWWA संस्था ने सदैव ही सेना परिवार एवं उन पर आश्रित महिलाओं के सम्मान सुरक्षा का ध्यान रखा है एवं प्रतिभा शाली महिलाओं का सम्मान AWWA की विशेष पहल रही है एवं सेना से जुड़ी महिलाओं के लिए एक मंच प्रदान करना जहां वे सशक्त बन सके यह संस्था पूरे सेना परिवार के लिए एक…
लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय है पाकिस्तान का 27वां संशोधन
– डॉ. प्रियंका सौरभ संवैधानिक संशोधन लोकतंत्र की आत्मा होते हैं, जो समय के साथ बदलती चुनौतियों का सामना करने के लिए ढांचे को लचीला बनाते हैं। लेकिन जब ये संशोधन सत्ता के संतुलन को बिगाड़ने का हथियार बन जाते हैं, तो वे लोकतंत्र को ही खोखला करने लगते हैं। पाकिस्तान की संसद द्वारा नवंबर…
एपस्टीन फाइल्स: लोकतंत्र का आईना या सत्ता का कवर-अप?
– डॉ. सत्यवान सौरभ अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक की जा रही एपस्टीन फाइल्स केवल एक आपराधिक कांड का खुलासा नहीं हैं, बल्कि वे आधुनिक लोकतंत्रों की पारदर्शिता, जवाबदेही और सत्ता-संरचना पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। जेफरी एपस्टीन—एक ऐसा नाम, जो वित्तीय वैभव, राजनीतिक पहुँच और यौन शोषण के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्याय बन…
विमान हादसों में नेताओं की असमय विदाई: संयोग, चयन-पूर्वाग्रह या व्यवस्था की गहरी कमजोरी? — डॉ. सत्यवान सौरभ
भारत की राजनीतिक यात्रा बार-बार आकाशी हादसों की भेंट चढ़ती रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती विमान दुर्घटना ने एक बार फिर पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। पांच लोगों की मौत के साथ राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हुआ, जिसकी भरपाई केवल संवेदनाओं से संभव नहीं। यह पहला मामला नहीं…
यूजीसी के कानून के खिलाफ एकजुटता
राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तवएक ओर बड़ी दुर्घटना ने एक राजनीतिक की जान ले ली । हम जितने यांत्रिक होते जा रहे हैं उतना ही हमारा जीवन असुरक्षित होता जा रहा है । हमने ऐसे ही हादसे में सीडीएस विपिन रावत को भी खोया था और पूर्व मुख्यमंत्री रेड्डी को भी । हादसा अब हमें…
महात्मा गांधी और भारत की साझा राष्ट्रीय चेतना का विचार : मनजीत सिंह
महात्मा गांधी मूलतः एक जननेता थे—ऐसे नेता, जिन्होंने लोकतांत्रिक और क्रांतिकारी राजनीति को अमल में उतारकर दिखाया। उनका राजनीतिक जीवन किसी एक विचारधारा या सीमित दायरे में क़ैद नहीं था, बल्कि उसमें समग्रता, परस्पर-संबद्धता और रणनीतिक सूझ-बूझ साफ़ दिखाई देती है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उनके लिए केवल एक राजनीतिक संस्था नहीं, बल्कि क़ौम और वतन…
