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नारी है इस जग की मूल… (कविता-3)

नारी है इस जग की मूल रे नर! दे न इनको शूल…..      त्याग, समर्पण, सेवा धर्म      करती यह तन्मय हो कर्म      रखती हरदम सबका मान      घर, आंगन की इनसे शान      झोंक न खुद आँखो में धूल      रे नर! दे न इनको शूल…. दिव्य गुणों से यह परिपूर्ण करती विपदाओं…

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विडम्बना

नहीं सुनना था वो सुनते रहे हैं। हम अपना सर सदा धुनते रहे हैं।। जो पिस्सू की तरह खूँ चूसते हैं। उन्हें ही आजतक चुनते रहे हैं।। मकां बन जाए, रोटी भी मिलेगी। जन्म से बात यह, सुनते रहे हैं।। हमारे जीते जी पूरे न होंगे। हम ऐसे ख़्वाब क्यों बुनते रहे हैं।। हमें तो…

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Russia Ukraine War LIVE: रूस ने युद्ध के 14वें दिन तेज किए हमले, यूक्रेन के कीव में हवाई हमले का अलर्ट जारी

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का आज 14वां दिन है। रूस के हमले के बाद लाखों लोगों ने यूक्रेन छोड़ दिया है। जिसके बाद कई पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध भी लगाए हैं। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रासी ने जानकारी दी है कि चेर्नोबिल परमाणु…

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“साइंस फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग” पुस्तक का लोकार्पण

विज्ञानं भवन नई दिल्ली में इंडियन ब्रेव हार्ट्स संस्था द्वारा आयोजित सम्मान लोकार्पण समारोह में टेक्निकल प्रोफेशनल एजुकेशन इन इंडिया के डायरेक्टर डॉ प्रभाकर राव गोविन्द राव चावरे द्वारा लिखित एवं श्री रामानुज सिंह ‘सुन्दरम’ द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘साइंस फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग’ का लोकार्पण धर्माचार्य श्री सुधांशु महाराज जी, एम पी श्री मति सुनीता दुग्गल,…

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“हिंदी ज्ञान ‘अ’ से ‘ज्ञ’ तक”

मैं वाणी भारती, मैं विश्व लेखनी भारतीय,वर्णों की गुथी माला की अनुपम पाठशाला हूँ। अलंकारों से सुसज्जित, आनंदित सुभाष हूँ।इंदु रश्मि पूनम, ईख की मिठास हूँ।उर मेरे हरि निवास, ऊर्जस्विता प्रभास हूँ।ऋद्धि सिद्धि का वास, एकाग्रता विश्वास हूँ।ऐश्वर्यता से भरी, ओजस्विता सुहास हूँ।और लेखनी अनुपम सी, अंतरिक्ष आकाश हूँ। कवयित्री हूँ महान, खगोल का सम्पूर्ण…

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शिक्षा वही जो राष्ट्र का गौरव बढ़ाए

शिक्षा ही तो इंसान को संस्कार दे चरित्रवान बना जीवन के पथ पर आगे बढ़ने को प्रेरित करती है। शिक्षा राष्ट्र निर्माण का आधार है,तो शिक्षक ही कर्णधार।शिक्षक ऐसा चाहिये,जैसे हो माटी कुम्हार,ठोक ठोक कर घट गढ़े, करा दे बेड़ा पार। बच्चे की पहली गुरु माँ पिता दिखाये स्कूल की  राह!शिक्षक उसे इन्सान बनाये,कमियों को…

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जीवन के वृक्ष  को जीवन्त रखना है,

जीवन के वृक्ष  को जीवन्त रखना है, प्रेम के पानी से उसे  सींचते रहना है। उसको सुखाता  है नकारात्मक सोच, शुभ सोच  से सदा हराभरा रखना है। अहंकार की ऊष्मा विष के समान है, जो जीवन को  विषाक्त  कर  देता है। जो  सीख लिया है दंभ को दुत्कारना, मजेदार जीवन का वह मजा लेता है।…

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“दुकानदारी”

सज्जन सिंह शहर में कोई    बड़ा नाम तो नहीं था लेकिन विश्वास का नाम था। उनकी एक छोटी सी दुकान हुआ करती थी। खूब चलती थी। कोई सामान शहर की बड़ी से बड़ी दुकान पर नहीं मिलता तो सज्जन सिंह की दुकान पर मिल जाता। यही वजह थी कि सारा शहर उन्हे जनता था। सज्जन…

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मैं क्या बोलूं

मैं क्या बोलूं दिल है व्याकुल, बच्चों की देख‌कर विकल दशा। ताला है लगा जुबां पर जैसे, लगभग दो सौ बच्चों को खोया है। मां की आंखों के बहते सागर में मेरे शब्द कहीं बह जाते हैं। खाई गहरी निर्धन व धनिक मध्य, मन जार जार कर रोता है । कुछ के पानी तक आते…

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” रास्तों से मंज़िल तक”

ज़िन्दगी के दामन में फूल ही फूल नहीं हैं, कांटे भी हैं। यह मालूम तो था लेकिन जाना आज ही है। ख़्वाब देखना आसान है। किन्तु उस ख़्वाब को हकीकत बनाकर ज़मीन पर उतरना मुश्किल है। मैंने हिम्मत करके यह काम अपने हाथों में ले लिया। हर कीमत पर उसे पूरा करने की चेष्टा मेरे…

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