Latest Updates

दुष्ट दमन सदा हितकारी !

कानून और न्ययालय की देश में क्या जरूरत , जब त्वरित न्याय मौजूद है तो , ये सवाल सबके जहन में आएगा  !मेरा निजी मत है कि विकास दूबे का एनकाउंटर सही है क्योंकि वो खूंखार था और हत्यारा था किन्तु मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसो की गाड़ियां क्यो नही पलटती, भादेठी कांड वाले…

Read More

‘जब भी देश को जरूरत पड़ी तो उत्तराखंड के वीरों ने दिया वीरता का परिचय’ : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

वेटरन्स डे यानी पूर्व-सैनिक दिवस के मौके पर शनिवार (14 जनवरी) को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह देहरादून पहुंचे. यहां उन्होंने शौर्य स्थल युद्ध स्मारक से भारतीय सेना को संबोधित किया. उन्होंने कहा, “जब भी इस देश को जरूरत पड़ी है, उत्तराखंड के वीरों ने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए…

Read More

नये साल का रोचक इतिहास : लाल बिहारी लाल

नव वर्ष उत्सव  मनाने की परंपरा 4000 वर्ष पहले बेबीलोन(मध्य ईराक) से शुरु हुई थी जो 21 मार्च को मनाया जाता था, पर रोम के शासक जुलियस सीजर ने ईसा से 45 ई. पूर्व जूलियन कैलेंडर की स्थापना विश्व में पहली बार की तब ईसा पूर्व इसके 1 साल पहले का वर्ष यानी  46वें ईसा…

Read More

हिंदी जन के मन और मनोरंजन की सशक्त भाषा बनी है

(14 सितंबर हिंदी दिवस पर विशेष) हिंदी दिवस पर कुछ लोग कुंठा के चलते कहें या फिर इसे मनोविज्ञान का खेल कहें कि चीजों को नकारात्मक रूप से प्रस्तुत करने या फिर विरोध करने पर वे लोगों का ध्यानाकर्षित करने में कामयाब हो जाते हैं। खैर जो भी हो ये उनकी सोच है। सितंबर माह…

Read More

महान लेखिका प्रतिमा वर्मा जी का निधन

बनारस की सुविख्यात लेखिका प्रतिमा वर्मा जी का 82 वर्ष की आयु मे साउथ अफ्रिका मे निधन,उनका जन्म स्वतन्त्रता सेनानी, पत्रकार एवम राजनय परिवार मे हुआ था lप्रतिमा जी की लिखीएक सुबह और, धूप धूप साया साया, बंधे पावों का सफर, उसका आकाश, गलियारे, इत्यादि पुस्तकें काफी प्रसिद्ध रहीं l इसके अतिरिक्त प्रतिमा जी की…

Read More

ख़बर से बेख़बर

ग़मों का मारा बेचारा मासूम-सा ये जो दिल है। अरमानों की इसने फिर से सजाई महफ़िल है।। कुहासा-सा  जिंदगी  में आजकल  बहुत है। दूर बादलों में गा रहा कोई प्यारी-सी ग़ज़ल है।। डर  था  जब  समंदर  की लहरों से  इतना। फिर क्यूँ, बना लिया साहिल सहारे घर है।। पाँवों के  छाले  भी  अब  तो पूछते…

Read More

बदनसीब किसान की व्यथा

डॉक्टर सुधीर सिंह बदनसीब किसान की व्यथा की कहानी सुनें,‘कोरोना’से ज्यादा ही जिसमें पीड़ा व भय है.लॉकडाउन में रहने से कोरोना नहीं सटता है,तैयार फसल की बर्बादी बिना छुए देता दर्द है. बेमौसमआँधी-तूफान,बारिश वओलावृष्टि ने,किसान के भविष्य को खाली कर चल दिया.खेत के मेढ़ पर पड़े हुए मजबूर किसान को,जार-बेजार रोने के लिए अकेला  छोड़…

Read More

विश्व से कोरोना को निर्मूल करना है

कोरोना से सदा रहना है सावधान,सबके पास है इसका सरल निदान.स्वच्छ पानी से हाथ साफ कीजिए,चेहरे से यथासंभव हाथ दूर रखिए.खांसी-जुकाम का उपचार कीजिए,उसमें  कभी  लापरवाही न बरतिए.अपना परिवेश साफ-सुथरा रखिए,आसपास गंदगी  फैलने  न दीजिए.भूखा न रहिए; ताजा खाना खाइए,ठंढे खाद्य-पदार्थ से परहेज कीजिए.भीड़ वाली जगह से  दूरी पर रहिए,स्वजन-परिजन से हाथ न मिलाइए.कोरोनाआपसे डरकर…

Read More

अलविदा “अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर” — असरानी को भावभीनी श्रद्धांजलि

गोवर्धन असरानी, जिन्हें हम सब प्यार से असरानी कहते थे, भारतीय सिनेमा के सबसे प्रिय हास्य अभिनेता थे। उनके अभिनय में विनम्रता, सादगी और अद्भुत हास्य का संगम था। शोले के “अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर” से लेकर गोलमाल, बावर्ची और चुपके चुपके तक, उन्होंने हर किरदार में जीवन की सच्चाई दिखायी। युवा हों या…

Read More

दिल के ज़ख़्म…..

ज़ख़्म अल्फ़ाज़ों के थेदवा करते भी कैसेख्वाबो आंखों ने देखे थेमुक़्क़मल होते भी कैसे सब ख़त्म हो रहा थामेरी आँखों के सामनेतदबीर कुछ होती तोफ़ना होते भी कैसे फ़ासले न होते तोज़ुदा होते भी कैसेमल्लिका ए दिल थीदग़ा देते भी कैसे तड़प दिल कीअब रुकती नही हैबिते हुये पलों कीकहानी बनेगी कैसे…. आरिफ़ असासदिल्ली

Read More