गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’
(26 अक्टूबर, 1890 से 25 मार्च, 1931) प्रारंभिक जीवन :- गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’ का जन्म 26 अक्टूबर, 1890 को इलाहाबाद के अतरसुइया मुहल्ले में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम जयनारायण था जो हथगाँव, (फतेहपुर, उत्तर प्रदेश) के निवासी थे। उनके पिता एक गरीब और धार्मिक प्रवित्ति पर अपने उसूलों के…
साहित्य वो कला है जो आत्मा से परमात्मा को मिलाती है तीरथ सिंह रावत
साहित्य कला भारतीय संस्कृति को समर्पित उत्तराखंड की जिया साहित्य कुटुंब संस्था की ओर से राष्ट्रवादी कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि देव भूमि मैं देश के अलग-अलग हिस्सों से कलम कारों को बुलाकर साहित्य और सम्मान समारोह आयोजित करना एक बड़ी बात है और देव भूमि की…
कर ऊर्ध्व चेतना जाग्रत मन
ब्रह्माण्ड रूपिणी भाव और चेतना स्वरूपिणी असुरत्व नाशिणी है अनादिकाल से संकल्पित तू दानव प्रकृति को मुक्ति दे देवत्व भाव से अग जग भर मन को प्रकाश ते भर दे माँ। था घनान्धकार था रुका काल गति बाधित थी सरिताएँ नही प्रवाहित थी संचरित नही वायु थी कहीं जीवत्व नहीं पोषित था कहीं अंधकार नष्ट…
“कलयुगी राम”
जलाया जाता है हर वर्ष, पुतला रावण का। मगर क्या रावण जलता है? नहीं, हम भूल करते हैं। आज रावण नहीं, राम मरते हैं। रावण तो सर्वव्यापी हो गया है। भ्रष्टाचार, लूटपाट, डकैती और बलात्कार, क्या ये रावण के नाती नहीं हैं ? याद रखो, रावण कभी नहीं मरता है। हंसी बनाता है हमारी, कागज़…
तुझसे इश्क इजहार करेंगे
मिलन प्रिये जब तुमसे होगा, दिल की हम तुम बात करेंगे। नयनों से हम नयन मिलाकर, तुझसे इश्क इजहार करेंगे।। इक दूजे का हाथ थाम हम, अपनी दिल की बात करेंगे। अपने दिलों के तरंग मिला, तुझसे इश्क इजहार करेंगे।। बाहों में बाहें डाले हम, प्रेम मिलन की बात करेंगे। इक दूजे को ले बाहों …
आसमान पर उड़ें, पर जमीन से जुड़ें : मनमोहन शर्मा ‘शरण’
सर्वप्रथम आप सभी को दशहरा पावन पर्व की बहुत बहुत बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं । प्रत्येक वर्ष अपने पर्व–त्यौहारों को श्रद्धापूर्वक हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं । अच्छी बात है किन्तु ज्यादा जरूरी यह है हमारे लिए कि पर्वों–त्यौहारों को मनाएँ पर उसके महत्त्व–महिमा को समझने का प्रयास करें और अपनी जीवन शैली में आत्मसात…
प्रोफेसर डॉ श्रीमति अलका अरोड़ा जी ने अपने सुदृढ संचालन द्वारा सजाई हृदयांगन की भजन-कीर्तन शाम
डॉक्टर विधु भूषण त्रिवेदी जी ने अपने हृदय से अशीष अमृत वर्षा द्वारा ‘हृदयागंन भजन संध्या’ सजाकर हृदयांगन परिवार के मन का कौना कौना पावन किया प्रोफेसर डॉ श्रीमति अलका अरोड़ा जी ने अपने सुदृढ संचालन द्वारा सजाई हृदयांगन की भजन-कीर्तन शाम देशभर के विभिन्न आईआईटी संस्थानों में दाखिले लेने के सन्दर्भ में आयोजित की…
कंजके (कन्या भोज)पर कविता
चलों चलों आज फिर से गुलजार करतें हैं बचपनवो छोले पूड़ी हलवेकी महक ताजाकर कंजक(कन्या) बनगुल्लक भरते हैं फिरपुरानी यादों से …हर पर्व अपनी महक और स्वाद लिए आता है,रह रह कर बचपन की याद दिलाता है,क्या वो दिन थे औरक्या थे जलवे,आहा! वो छोले,पूड़ी और हलवे!चलों आज फिर सेगुलजार करतें हैं बचपनमाँ अंबा की…
राष्ट्रीयता के स्तम्भ है पण्डित दीनदयाल उपाध्याय !
जातिवाद से ऊपर उठकर पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अंत्योदय उत्थान का जो प्रयास प्रारम्भ किया आज वो सबके लिए अनुकरणीय है । उत्तर प्रदेश में जहां एक तरफ जातिवाद चरम पर है वहीं दूसरी तरफ पढ़े लिखे वर्ग का प्रतिनिधित्व भी बढ़ा है किन्तु दुखद है कि आज भी कुछ लोग जातिवाद के नाम…
