बाज़ी तेरे इश्क़ की
कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार, उत्कर्ष मेल) जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम, ये खेल अधूरा छूटे न प्रेम का बंधन,जन्म का बँधन,हाथ कोई भी छूटे न ✍️ मानसून की दस्तक मौसमी हवाओं के आगमन का पैग़ाम तो लाई है लेकिन अब के बरस सावन की बूँदें मिट्टी को वो खुश्बू नहीं दे पाईं जिनसे हर…
