Latest Updates

कार्तिक माह में अहोई, प्रबोधिनी, अमावस्या एवं छठ का है  विशेष महत्व  : पंकज सीबी मिश्रा , राजनीतिक विशलेषक / पत्रकार जौनपुर यूपी

दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते।। कार्तिक माह में अहोई, प्रबोधिनी, अमावस्या एवं छठ का है  विशेष महत्व  पंकज सीबी मिश्रा , राजनीतिक विशलेषक / पत्रकार जौनपुर यूपी ध्वज, धनाढ्य, धर्म सम्मत और धार्मिक होना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है सनातन का अपितु मानवता का पालन करना ही…

Read More

राष्ट्र, समाज और संघ: शताब्दी की नयी दृष्टि

संघ की शताब्दी यात्रा का उद्देश्य केवल संगठन विस्तार नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों में संतुलन, संस्कार और एकता लाना है। डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत अखंड है और हिन्दू राष्ट्र की भावना जीवन और संस्कृति में निहित है। संघ का कार्य निःस्वार्थ सेवा, शिक्षा में संस्कार और सामाजिक उत्थान पर केंद्रित…

Read More

सिद्ध बहुत तन की गुफा  (दोहे)

साधे तो सधता सभी, योग बड़ा विज्ञान | मन की इच्छा पूर्ण हो, आ जाये संज्ञान || मन की आंखें खोल तो, देख जगह संसार | वरना सब कुछ सो रहा, जो तेरा अधिकार || सांसों में है भेद सब, सब सांसों का सार | भार समर्पित भाव यह, जीवन का आधार || योग चेतन…

Read More

Social Media Ban for Children: Australia’s Save Childhood Movement-An Example for the World

Social Media Ban for Children-A Save Childhood Movement,considered a protective shield for children in modern society amidst digital pollution, inappropriate content, violent videos, and harmful algorithms-Advocate Kishan Sanmukhdas Bhawnani,Gondia Maharashtra Gondia – While global politics is often dominated by military tensions, economic competition, strategic alliances,and geopolitical shifts, Australia has taken a bold step that has…

Read More

गुरूकुल

श्रीमती कविता मल्होत्रा दोस्तों मित्रता दिवस की रस्म हम यूँ निभा लेते हैं निस्वार्थ प्रेम बनकर निस्वार्थता को मित्र बना लेते हैं अपने घरौंदों की जड़ें दिमाग़ में न बनाकर दिलों में बनाई जाएँ तो हर एक घर ही मंदिर हो जाए !! दिलों को अपनी ख्वाहिशों की सियासत नहीं बल्कि जीवन के परम उद्देश्य…

Read More

पिता (कविता-9)

जीवन के अनुभवों की खान पिता धूप पिता , छांव पिता मां है धरती तो आसमां पिता सर उठा कर गर्व से चल पाऊ जिस से पाया है वो ज्ञान पिता कैसे धन्यवाद करू पिता का मेरे जीवन का अभिमान पिता शत शत नमन मंगला का कर लो स्वीकार पिता मन में भाव छुपाएं लाखों…

Read More

नोबेल विजेता अभिजीत ने डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्देशन भी किया है

नई दिल्ली: भारतवंशी-एमआईटी प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी, उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो और हार्वर्ड के प्रोफेसर माइकल क्रेमर को ‘व्यावहारिक रूप से गरीबी से लड़ने की हमारी क्षमता में प्रभावशाली तरीके से सुधार’ के लिए अर्थशास्त्र के क्षेत्र में 2019 के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीचएडी की उपाधि हासिल की और…

Read More

छाया है पिता

बरगद की घनी छाया है पिता छाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोई आँसू छिपाता अन्तर में अपने। तोड़ता पत्थर दोपहर में भी वो चाहता पूरे हों अपनों के सपने। बरगद की घनी छाया है पिता छाँव में उसके भूलता हर दर्द। भगवान का परम आशीर्वाद है पिता जीवन की इक…

Read More

स्त्री विमर्श और महिलायें

स्त्री विमर्श एक ऐसा मुद्दा है जो आज हिंदी साहित्य में अपनी एक अलग अहमियत रखने के साथ साथ सामाजिक स्थितियों और मान्यताओं को भी बखूबी प्रभावित कर रहा है। आज स्त्री और  पुरुष दोनों ही साहित्यकारों द्वारा स्त्री विमर्श को उकेरने वाले इनके लेख या इनकी कहानियां समाज में विचारों के मंथन के लिए…

Read More

हाहाकार का जिम्मा कौन लेगा ? ? ?

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) फरवरी 2021 आते आते भारत में कोरोना की पहली लहर मानो शांत सी हो चली थी और लगने लगा था कि अब जल्द ही ऐसा भी समय आएगा जब देशवासी खुली हवा में बंधन मुक्त होकर श्वांस लेंगे और फिर वही मिलने–जुलने का माहौल बनेगा और समारोह–जलसे आदि में भाग…

Read More