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पुराने हांडी में नया चावल पका रहें धनाढ्य नेता .!

बहुत पुराने वक्त से हम सुनते आ रहे हैं कि जनतंत्र, जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा शासन होता है। जनतंत्र में जनता होती थी, सरकार होती थी, चुनाव होते थे, नीतियां होती थी, संसद और विधायकाऐं होती थीं, जिनमें जनता द्वारा सरकार को चुना जाता था। सरकार जनता के कल्याण के…

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अप्रेल फूल बनाया…… !

अब अप्रेल फूल कोई नहीं बनाता । पहले तो एक दिन निर्धारित कर दिया गया था कि केवल इसी दिन किसी को भी कोई भी अप्रेल फूल बना सकता है । इसी कारण से ही एक अप्रेल को लोग सतर्क हो जाते थे और कोषिष करते थे कि वे अप्रेल फूल न बन पाएं ।…

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चिन्तन शिविर से  उपजे सवाल

राजनीतिक सफरनामा                                                                                                    कुशलेन्द्र श्रीवास्तव मई की तपती दुपहरी और राजस्थान की मरू भूमि पर कांग्रेस का चिन्तन शिविर आयोजित किया । कांग्रेस को वैसे भी चिन्ता और चिन्तन दोनों की आवश्यकता तो है । उनके अपने ही सदस्यों ने चिन्ता व्यक्त की और हाईकमान ने चिन्तन शिविर लगा दिया ‘‘आओ हम मिलकर चिन्तन करें’’…

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कमी अपनी परवरिश में

मालती ने आज पूरा घर फिर सर पर उठा रखा था। ससुर जी के खत्म हो जाने के पश्चात यह अब आम बात हो गई थी। मालती की सास दयावती खून का घूंट भरकर रह जाती। मालती अपनी छोटी बहन को पढ़ाई करने के लिए अपने साथ रहना चाहती थी लेकिन घर पर जगह उपलब्ध…

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यूजीसी के कानून के खिलाफ एकजुटता

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तवएक ओर बड़ी दुर्घटना ने एक राजनीतिक की जान ले ली । हम जितने यांत्रिक होते जा रहे हैं उतना ही हमारा जीवन असुरक्षित होता जा रहा है । हमने ऐसे ही हादसे में सीडीएस विपिन रावत को भी खोया था और पूर्व मुख्यमंत्री रेड्डी को भी । हादसा अब हमें…

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नमन तुम्हें मेरा शत बार नमन

हे भारत के रत्न तुम्हे मेरा शत बार  नमन मौन हो गयी चारो दिशाएँ, शान्त हो गयी सभी हवाये , उदय हुआ गहन उदासी ले सूर्य भी पर निस्तेज सा जैसे कही कुछ खो गया कोई बहुत अपना बस यही खो गया   मौन हो चले सभी सुबह के कलरव बस छाई एक निस्तब्धता एक…

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अधिकारों की अहवेलना कितना जायज !

______ आपने चुनावों के वक्त  देखा होगा कि बातों और वादों  का मश्रफ क्या होता है !  चुनाव आने से पहले और चुनाव बीत जाने के छ माह बाद दो आपसी आभासी मित्र  फेसबुक पर वैचारिक मतभेद प्रकट करते दिख जाते है ,यहां तक कि गाली गलौज भी कर लेते है और तो और आपसी…

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टनल में फंसे मजदूरों को जातिवाद का फायदा क्यों नहीं मिला  …!

उत्तरकाशी  टनल में फंसे मजदूरों के जगह अगर यहीं 41 वीआईपी लोग एलीट क्लास  अथवा पिछड़े और दलित नेता टाईप के होते और वे ऐसे ही कहीं फंस जाते तो सदन के दलित नेता और मीडिया क्या करता ? पूरा देश सर पर उठा लेता।  बोलने का मतलब है सरकार से सवाल करना  मीडिया ने…

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विधाता की सुंदर रचना

तुम आज इस तरह खामोश हो, युँ उदासी का लिबास चेहरे पर क्यों डाले जाती हो भावनाओं को आहत मत होने दो उन्हें सुलगाओ नया लक्ष्य दो विकट परिस्थितियाँ बहुत आएँगी पग -पग पर पांव डगमगाऐगे तुम मत ठहरना ध्येय अटल साधे रखना माना की तुम स्त्री हो, क्यों तुम्हारा स्त्री होना कभी -कभी समाज…

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संपादक मनमोहन शर्मा ‘शरण’ होंगे सम्मानित

हिन्दी की विश्व-प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था साहित्य-मंडल श्रीनाथद्वारा, राजस्थान के त्रिदवसीय (14 -16 सितम्बर 2022) राष्ट्रीय आयोजन में “उत्कर्ष मेल” (पाक्षिक पत्र) के सम्पादक श्री मनमोहन शर्मा ‘शरण’ को “सम्पादक रत्न” सम्मान  प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। शर्मा जी उत्कर्ष मेल पाक्षिक पत्र का सम्पादन 12 वर्षों से नयी दिल्ली से नियमित  रूप…

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