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हिंदी हास्य नाटक : अंगूर तो मीठे थे, का होगा मंचन

पंचानन पाठक हास्य नाटक समारोह में भव्य कल्चरल सोसाइटी पंजीकृत प्रस्तुत हिंदी हास्य नाटक : अंगूर तो मीठे थे लेखक प्रेम भारती,निदेशक संजय अमन पोपली,दिनांक 5 सितंबर,21,शाम 7 बजे अक्षरा प्रेक्षागृह, आरएमएल हॉस्पिटल के साथ,नई दिल्ली। कहानी बच्चूसिंह चौरसिया व सपना पति पत्नी हैं। इनके सामने घर में मुरालीलाल वह नीलम रहते हैं। मुरारीलाल को…

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रोटी से बड़ी हो गई गैस – शहर छोड़ते मजदूरों की मजबूरी

– महेन्द्र तिवारी भारत में प्रवासी मजदूरों का संकट एक बार फिर सामने खड़ा है, और इस बार इसकी जड़ में केवल आर्थिक मंदी या रोजगार की कमी नहीं, बल्कि एक गहरा ऊर्जा संकट है, जिसने शहरों की चमक के पीछे छिपी कमजोरियों को उजागर कर दिया है। हाल के दिनों में देश के कई…

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पावन शिक्षक दिवस पर समर्पित चंद शब्द-पुष्प:

कृष्णजैसा सारथी जब अर्जुन को मिला, युद्धभूमि में तब गीता का उद्घोष हुआ. तब एकआज्ञाकारी शिष्य सा था कुंतीपुत्र, गुरु के रूप में देवकीनंदनको आना पड़ा. अन्याय,अत्याचार और भयंकर भ्रष्टाचार; जब भी समाज में निर्बाधबढ़ने लगता है. गिरिधारी सा गुरु और पार्थ साविद्यार्थी, काल के कोख सेतबतुरंतपैदा होता है. बिगड़ती हुई व्यवस्था को पटरी परलाना,…

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अडानी के चक्कर में रणभूमि बनती संसद   

सभी को महाशिपरात्रि पर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाएं । शिवजी विषपान करते है वे अपने गले मे विषधारी नाग को लपेटे दिखाई देते हैं, वे सारी वस्तुएं जिन्हें आमतौर पर हम वर्जित मानते हैं, वे उनके पास होती हैं । हमने सदियों से उनके इस स्वरूप् को ही देखा है । उनका यह रूप हमें विचार…

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दिल्ली के नगरनिगम की नूराकुश्ती 

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव दिल्ली की नगर निगम का दंगल सभी की निगाहों से होकर गुजरा ‘‘ओह अच्छा ! तो हमें पार्षद बनकर ऐसे दंगल करना पड़ता है’’ । वैसे तो अब उम्मीद नहीं हैं कि किसी को ज्यादा आश्चर्य हुआ होगा, क्योंकि पिछले कुछ दशकों संे हम ऐसा होता हुआ विधानसभा से लेकर कुछ-कुछ संसद में…

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(व्यंग्य) मेरी भाषा मेरा देश अभियान की अनसुनी कवर स्टोरी..!

आजकल  भाषा की जंग मची है तो सोचा मै भी बहती गंगा में हाथ धो लूं क्योंकि मेरी भाषा वैसे भी ओवैसी टाईप की है । भारत में जी 20 सम्मेलन और भारत बनाम इंडिया के बीच महासंघर्ष जारी है और इस लड़ाई में सबको एक पक्ष की तरफ से जरूर लड़ना ही होगा ।…

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क्या होगा चीन का अगला कदम?

पिछले कुछ दिनो से चीन और भारत के बीच जिस तरह की स्थिति बनी हुई है उसे देख कर ऐसा लगता है कि मामला काफी संवेदनशील है और कभी भी कुछ भी हो सकता है। जिस तरीके से चीन अपनी आक्रमक्ता भारत को दिखा रहा है और दुनिया को ये दिखाने की कोशिश कर रहा…

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पत्तों की ताली

अमरैया की छांव तले  नन्हे नन्हे ,पांव चले । हरी-भरी, डाली में झूमे बचपन जिसकी ,गोद पले । मीठे फल और ठंडी छांव बरगद वाला, मेरा गांव । लट देखो ,धरती को चूमे मस्ती में वो सर- सर झूमे  । ज्यो  मतवाली नाव चले  अमरैया  की छांव तले।  नन्हे नन्हे पांव चले।  फल हैं जैसे,…

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“एक थी शान्ता”काव्य-कृति का विमोचन

भारतीय साहित्य-कला परिषद् नयी दिल्ली के तत्वावधान में ‘अभी तक क्राइम टाइम’ सप्ताहिक समाचार पत्र, शाहदरा, दिल्ली के  कार्यालय  में 20 अगस्त 2024  को यशस्वी सम्पादक राजेन्द्र गुप्त की अध्यक्षता में हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.राहुल  की सद्यः प्रकाशित पुस्तक”एक थी शान्ता”(खण्ड-काव्य) का विमोचन सम्पन्न हुआ।माननीय अध्यक्ष ने अपने उद्बोदन में कहा कि,रामायण की कथा-श्रृंखला…

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व्यंग्य –  मनुवाद के खिलाफ खड़े निठल्ले ..!

भारत में विचारधारा के खींचतान में आजकल कई समाज लहालोट है । जब भी कोई सफल व्यक्ति कही सफलता पाए नजर आता है तो उसे ये निठल्ले जातिवादी समाज वाले अपनी जाति में खीच कर उसकी सफलता को चीड़ फाड़ देते है । अब बात करें ऐसे निठल्ले घिन्नरबाजों की तो अब मंडल बंडल जैसे…

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