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हर घर तिरंगा अभियान और देशभक्ति के मायने

नागरिकों के सुरक्षित और समृद्धशाली जीवन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है; उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और समृद्धि का होना। इसलिए क्या आपको हर घर तिरंगा फहराने के साथ-साथ हर घर रोजगार की आवश्यकता ज्यादा नहीं लग रही है ? आज  आजादी के 75 साल बाद भी देश के नौजवान बेरोजगारी के चलते आत्महत्या करने को…

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बाहर काल है

विपदा आई जग पर भारी,              विष हर ओर है घुल रहा।  तांडव फिर से मचा रही,          जग में सुरसा मुख खुल रहा।  कठिन समय यह जग पर भारी,              जब लॉक डाउन सफल बनेगा ।  संकल्प के अस्त्र से ही बंधु ,              देश – दुनिया करोना मुक्त बनेगा ।  लांघो न तुम लक्ष्मणरेखा,               घर अपने और…

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योग जीने का विज्ञान

योग नहीं साधारण नाम है, योग तो जीने का ज्ञान है। भौतिक अध्यात्मिक भाव, आत्मिक हो या मानसिक। योग एकता का संदेश है, चेतना को करता एक है। भावनाओं का संतुलन करे,  तालमेल बनाए मदद करे। बाहरी हो चाहे आंतरिक, दोनों तरह से पहुंचाता लाभ। मांसपेशियां और नसों को, कहता सद्भाव में कार्य करो।  दिमांग…

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 पति-पत्नी और उम्र का फ़ासला! (लेख)

-डॉ.अरुणा कपूर                         रिश्तेदारी में ही एक शादी समारोह में शरीक होना पड़ा….पता चला कि दूल्हा 50 साल का है और दुल्हन 22 साल की है।…शादी भी आपसी रजामंदी से ही हो रही है।…वाह! …..हमारे भारतीय समाज में जब विवाह को ले कर चर्चा-विचारणाएं…

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जन भागिदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव  है

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष (5 जून,) जन भागिदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव  है लाल बिहारी लाल नई दिल्ली । जब इस श्रृष्टि का  निर्माण हुआ तो इसे संचालित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों का एक सामंजस्य  स्थापित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों के बीच एक परस्पर संबंध का रुप प्रकृति ने…

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लघुकथा – 15 अगस्त और दादी माँ की आशाएं

          पंकज की दादी 15 अगस्त की सुबह जल्दी से ही तैयार हो गयी थी।जैसा कि उसे मालूम था कि 15 अगस्त पर सभी टीवी के समाचार चैनलों पर भारत देश के सैनिकों को दिखाया जाता है।हर बार की तरह वह भी अपने पोते पंकज की एक झलक पाने के लिए टीवी के सामने बैठ…

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ऋतुओं को निगलने लगा प्रदूषण: बदलता मौसम, घटता जीवन

डॉ विजय गर्ग भारत में सदियों से छह ऋतुओं (बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर) का अपना एक क्रम रहा है। हर ऋतु अपने विशिष्ट सौंदर्य, मौसम और जीवनशैली के साथ आती थी। लेकिन आज, बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण यह प्राकृतिक क्रम टूट रहा है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे प्रदूषण…

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मुखर राजनीति के महानायकों के लायक नहीं माहौल !

बिहार राजनीति में उठापटक ,बीते दस तारीख की देर रात्रि तब समाप्त हो गया जब बिहार विधानसभा चुनाव के सभी दो सौ तैतालिस सीटों के परिणाम जारी कर दिए गए । भाजपा, जदयू ,हम और वी आई पी की संयुक्त गठबंधन वाली एन डी ए ने एक सौ पच्चीस सीटों पर कब्ज़ा करके बिहार विधानसभा…

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स्वतंत्रता दिवस धिक्कार कर कहता है

डॉक्टर सुधीर सिंह आजाद भारत में आर्थिक आजादी नहीं, किंतु आजादी का ढिंढोरा लोग पीटते हैं। स्वतंत्रता दिवस  धिक्कार  कर कहता है, भारत में गुलाम सा  गरीब  क्यों रहते हैं? भ्रष्टाचार ने छीना है वंचितों की आजादी, गरीब कोऔर ज्यादा गरीब बना दिया है। भ्रष्टाचारियों  के रूतबा का कहना क्या? गोरखधंधेवाजों का  सम्मान बढ़ गया…

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ग्लानि

सानिया अपनी बेटी की पढ़ाई को लेकर बहुत ही सजग रहती। छोटी सी जान उसके पीछे पड़ी ही रहती सानिया। 12 वर्षीय अनिका सारे दिन किताबों में घिरी रहती। ट्यूशन में अगर टीचर छुट्टी कर लेती तो बबाल मचा देती सानिया। काम वाली बाई का भी एक-एक दिन का हिसाब गिन कर रखती क्योंकि सुघण…

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