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महकता गुलाब

तुम्हारे कांटे भी तुमको बचा न पाएंगे, इतना मत महको लोग तोड़ के ले जाएंगे। प्यारी सूरत पै तुम्हारी न रहम खाएंगे, तुम्हारे अश्क किसी को नजर न आएंगे, तुम्हारा सीना छेद गूंथ लेंगे माला में, तुम्हारे घाव जरा भी नहीं सहलाएंगे। तुम्हारे दर्दे दिल को देव पर चढ़ायेंगे। इतना मत महको लोग तोड़ के…

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ब्राह्मण महापंचायत में श्रीचौरासिया ब्राह्मण समाज की सक्रिय भागीदारी रहेगी

जयपुर 17 मार्च अखिल भारतवर्षीय श्रीचौरासिया ब्राह्मण महासभा की राजस्थान प्रदेश शाखा सभा के अध्यक्ष पंडित सत्यदेव शर्मा के नेतृत्व में श्रीचौरासिया ब्राह्मण समाज के सैंकडों की संख्या में सदस्यगण रविवार 19 मार्च को जयपुर में विद्याधर नगर स्टेडियम में आयोजित होनेवाली विशाल ब्राह्मण महापंचायत में भाग लेंगे। महामंत्री पं• रविशंकर शर्मा ने बताया कि…

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स्वच्छ भारत अभियान:

इस कैंपेन के तहत सरकार द्वारा विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नागरिको को अपना पूरा योगदान देने को कहा है ताकि भारत जल्द से जल्द एक स्वच्छ देश बन सके। इस कैंपेन के शुरुआत में खुद प्रधानमंत्री ने रोड साफ़ कर इस अभियान का आगाज़ किया था। स्वच्छ…

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तेरा क्या होगा कालिया…… ! – कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

‘‘तेरा क्या होगा कालिया’’ कोई कह नहीं रहा है पर कहता हुआ सा दिखाई दे रहा है । चुनाव चल रहे हैं और चुनाव में ‘‘बोल वचन’’ भी चल रहे हैं और बोल वचनों का अंत ऐसी ही सोच के साथ होता है । आदमी बोलते समय सब कुछ भूल जाता है जो मन में…

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खामोश

मै मंहगाई हूँतेरी कमर तोड़ने आई हूँकर ले तू लाख जतनलूट के रहूँगी तेरा अमनमेरा तुझसे रिश्ता पुराना हैतू मुझे बुलाये न बुलायेमुझे तो तेरे घर आना हैतेरी ज़िंदगी पे तो मेरा हक़सौफ़ीसदी मालिकाना हैमै डंके की चोट पे कहती हूँकोई क्या कर लेगा मेरामै अकेली नहीं हूँजमाखोरियों/कालाबाज़ारियों/सटोरियोंसे रिश्ता पुराना है मेरामै इनकी छत्र छाया…

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पीड़ा : वंदना भार्गव

सबने तुझको ठुकराई है । जब तू पास मेरे आई है ।। आजा तुझको गले लगा कर। पीड़ा आज पुरस्कृत  कर दू।। साथी पाने की चाहत में । घूम रही क्यों सबके पीछे।। तुझसे भाग रहा जग सारा ।  आ तुझमें आकर्षण भर दूं।। अरी तिरस्कत ओ दुखियारी । आजा मेरी राज दुलारी ।। तेरी…

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मधुबन ही मधुबन हो (श्रंगार गीत)

गूंथ लिया सारा बसंत अपने जूड़े में ,मौसम कहता है तुम फागुन ही फागुन हो। होटों से लिपट लिपट मखमली हंसी तेरी,दूधिया कपोलों का चुंबन ले जाती है।झील के किनारों को काजल से बांधकर,पनीली सी पलकों में सांझ उतर आती है। महावारी पैरों से मेहंदी रचे हाथों तक,छू छू कर कहे हवा चंदन ही चंदन…

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वाहनों की पार्किंग के संकट से जूझते शहर

यह ज़रूरी नहीं है कि अच्छा सार्वजनिक परिवहन यातायात की भीड़ को काफ़ी कम कर दे। भीड़भाड़ की स्थिति में सुधार करने के लिए, शहरों को निजी कारों के स्वामित्व और उपयोग के कार्यात्मक, मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक मूल्यों को लक्षित करने वाली गतिविधियों के साथ ही अपनी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को बेहतर बनाने के प्रयासों…

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नए वर्ष 2022 से आपकी कितनी उम्मीदें और क्यों ?

महामारी की चपेट में जूझ रहे पूरे विश्व को विगत दो वर्षो से दैनिक लाइफ स्टाइल में काफी उठा पटक देखने को मिली । वर्तमान परिवेश में नए आंग्ल वर्ष का आगमन सबके लिए कम उत्साहजनक,  अधिक  चिंताजनक और अतीत के डर से  ज्यादा सचेत  हो सकता है । हर वर्ष एक वर्ष जाता है,…

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अगस्त का मस्त महीना

अगस्त माह की बात निराली चहुं ओर छा जाती हरियाली लेकर आता ये रक्षाबंधन त्योहार हर्षित करता बहन-बेटी का प्यार घर की रौनक जब घर में आती आंगन कली- कली खिल जाती किलकारी से गुंजित होता आंगन जैसे उल्लसित हो उठे धरा गगन अगुवाई में बाजार हो जाते गुलजार जैसे सालों से हो बहनों का…

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