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रजिस्टर्ड पोस्ट का अंत : भरोसे की वह मुहर अब नहीं रहेगी

विजय गर्ग डाकिए की साइकिल की घंटी, थैले से झाँकते पत्रों की उत्सुक प्रतीक्षा, और रजिस्टर्ड डाक की पावती पर हस्ताक्षर का रोमांच – ये पल भारतीयों के दिलों में एक युग की तरह अमर हैं। लेकिन अब यह युग समाप्त होने जा रहा है। भारतीय डाक विभाग ने 1 सितंबर, 2025 से अपनी 50…

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सिसकती भारत माँ

तकनीकी व विज्ञानं अग्रसर करते भारत को नव वर्ष २०२३ की शुभ कामनायें (गंगा मैया के मेलेपन का निवारण करते शहीद का जो असमय ही छोड़ गया) सिसकती होगी भIरत माँ भी अपने शहीद ऐकला चलो भारतीय अन्वेषक पर जिसने अपना सारा जीवन त्याग दिया निस्वार्थ रूप तपस्वी बन उसकी सेवा कर खायी थी कसम…

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भूण हत्या

मैं कौन हूं माँ? क्यों मारती है मुझे ? एक आवाज नहीं चौंका दिया सारा जहां ताका जो इधर उधर ना पाया कोई निशा मैं सहमी सिमटी अपने अंतर्मन से हुई मुखातिब आवाज मेरे मन की थी  हां मेरे भीतर की ही थी  तो कौन बोल रहा है भीतर से  यह चित्कार किसकी है?  मैंने…

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रामचरित मानस का जलाया जाना : आशा सहाय

एक ऐसी घटना  जिसकी भारतीय जनमानस ने कभी कल्पना तक नहीं की होगी,उसे घटित कर वर्तमान राजनीति के तथाकथित नेताओं ने देश की विभाजनकारी शक्तियों  को बल प्रदान करने के लिए भारतभूमि की मूल सांस्कृतिक मानवतावादी विचारधारा पर आघातपहुँचाने की कुचेष्टा के द्वारा सनातन संस्कृति के प्रति सनातन विश्वास को ही चोट पहुचायी है।  यह…

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पूजा का शंख : अजय कुमार पाण्डेय

पूजा का शंख             आज दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा की थाली सजाते हुए सविता ने शंख निकाला तो कुछ देर के लिए उसे हाथ में लेकर ठिठकी रह गई। इस शंख में उसे दो मासूम सी आंखें अपनी ओर ताकती दिखाई दीं। इन आंखों में एक करुणा थी, एक अपनापन था, एक शिकायत…

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नींद से जागो

आज फिर रोज की तरह विवश हो गयी हूं ,समाज में हो रही अपराधिक घटनाओं के बारे में सोचने पर! क्या करूं मन का आक्रोश किस से सांझा करूं, क्योंकि यहां सभी धृतराष्ट्र हैं और जो नहीं है वह धृतराष्ट्र बने रहने को विवश हैं ,क्योंकि सत्य बोलने का हश्र हम सभी देख रहे है!यह…

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तेरी रचना का ही अंत हो न

(कविता मल्होत्रा) कैसी विडँबना है, हर कोई अपनी-अपनी स्वार्थ सिद्धि की चाहत लिए अपना स्वतंत्र आकाश चाहता था और आज अधिकांश लोगों को दो गज ज़मीन भी नसीब नहीं हो रही। अभिव्यक्ति की आज़ादी वाले देश में तमाम सीमाएँ लाँघने वाली समूची अवाम का अपनी भाषा पर ही अधिकार नहीं रहा, जो निशब्द होकर कोष्ठकों…

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दीप जलाना

दीप पर्व पर, एक काम यह करना सब हर हाल में। उनके नाम भी दीप जलाना जो बुझे कोरोनाकाल में।। स्वस्थ सुरक्षित रहे सभी जन, इसके हित बस काम किये। सभी चिकित्सक जुटे रहे बस नाममात्र आराम किये। और चिकित्सा करते करते जो जीवन हो गये बलिदान। दीपक उनके निमित्त जलाकर दे हम सब उनको…

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जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ

ऋतुएँ तो आती जाती रहेंगी नए-नए रंग दिखाती रहेंगी आ.डॉ सरोजिनी प्रीतम जी हंसिकाओं से हंसाती रहेंगीं एक ऐसी हास्य परी जो अपने सान्निध्य में आने वाले हर उम्र के व्यक्ति को मुस्कुराहटों का अनमोल तोहफ़ा निःशुल्क उपलब्ध करवातीं हैं।हर घटना पर अपने चुटीले अँदाज़ से व्यंग्यात्मक हंसिकाएं रचकर समूची मानव जाति की मानसिकता को…

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इतिहास बदलते बदलते भूगोल बदल डाला,

इतिहास बदलते बदलते भूगोल बदल डाला, मोदी व शाह की जोड़ी ने माहौल बदल डाला। कुछ सिरफिरे आज भी हैं गद्दारी पे आमादा, साहस भरे कदम ने उन्हें बेनकाब कर डाला। आज देश की जीत हुयी है, राष्ट्रवादी विचारों नें काश्मीर फ़तह किया है, ये भारत मां की विजय हुयी है, आजादी के बाद से…

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