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हम गरीबी उन्मूलन के लिए प्रयासरत हैं : राष्ट्रपति

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने  राष्ट्रपति भवन में आयोजित केंद्रीय विश्वविद्यालयों के सम्मलेन में कहा कि भारत ने निरंतर विकास के लिए स्वयं को तैयार किया है। “हम गरीबी उन्मूलन के लिए प्रयासरत हैं और मध्यम आय वर्ग वाला देश बनना चाहते हैं।” देशभर के 46 विश्वविद्यालयों से आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए…

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भारतीय साहित्य पर्यावरणीय चेतना से ओत-प्रोत है – अजिम्स मुहम्मद भारतीय साहित्य में पर्यावरण विमर्श पर कोडुंगल्लूर में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

पर्यावरण प्रदूषण या पर्यावरण में मानव के हस्तक्षेपों के कारण आजकल जो प्राकृतिक विपत्तियाँ दुनिया भर में हो रही हैं, इनसे हम सब वाकिफ़ हैं ।  पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का समय बीतता जा रहा है । युवा वर्ग इस गंभीर समस्या के प्रति सचेत नज़र आते हैं ।  भारत इस विषय में गहराई…

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चीत्कार

निः शब्द हो जाती है अंतरात्मा भी उस पल  ख्वाबों को अपने सामने जब तिनका तिनका बिखरते देखती है । लेकिन खुद का एक यकीं हूं मै  जरूरत नहीं मुझे बेपरवाही की खुद में सुरूर हूं खुद का गुरूर हूं अपनी ही ढाल हूं हां मै कमाल हूं । दुश्वारियों से बिखरती नहीं फर्ज़ से…

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नेता जी की जय-जयकार

पुष्प रहे खूब पाँव पखार नेता जी की जय-जयकार ……..       तुम हो श्रेष्ठ,सकल गुणवान       सेवा, श्रम, अर्पण पहचान       त्याग, तपश्चर्या की मूरत       और कहाँ कोई है सूरत       अद्भुत,अपरम्पार कहानी       मिलती कहीं न एक निशानी       करूँ नमन मैं बारम्बार       नेता जी की जय-जयकार… …… विविध रूप धर करते…

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खुद से खुद के सँवाद की लिपि को गढ़ा जाए

नववर्ष की ढेरों शुभकामनाओं के साथ एक नया प्रण लिखें समूची मानवता के उत्थान हेतु बिताया हर एक क्षण लिखें —- समय का महाकुँभ अपनी गति से निर्बाध चलता रहता है और हर साल अपने साथ अनेक खट्टी मीठी सँवेदनाएँ और  जीवन रूपी महासागर में आए मानसिक प्रदूषण की लहरों का कुछ कचरा भी अपने…

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मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ गर्व करूँ, या खुद से ही डर जाऊँ मैं। डर के साये में मैं जीती, क्या खुद ही मर जाऊँ मैं।। बेटी हो जाए  घर में, उसे बोझ समझ के पाला है। खुशियाँ जब आती घर में, हो जाए एक लाला है।। क्या किस्मत पाई नारी,बचपन से ही हीन हुई। देख के…

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ना दिख मजबूर

रूह की गर्त पर एक नकाब लपेटे हूँ। टूटे सपनो में अब भी आश समेटे हूँ।। दुखों  की  कड़कड़ाती   धूप  बहुत  है। खुशी की सर्द हवा की उम्मीद समेटे हूँ।। क्यूँ हुआ तू किनारे , सोचता है क्यूँ भला। देख पीपल के नीचे रखे भगवान का नजारा, टूट जाये अगर भगवान की मूरत का कोना,…

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नही है कोई रक्षक तेरा ऐ भारत की नारी

नही है कोई रक्षक तेरा ऐ भारत की नारी। करनी होगी तुझ को खुद ही अब अपनी रखवारि। वन कालका या बन चंडी कौइ भी रूप अपना। हाथों मे हथिआर लेकर, तू दैत्य संहार कर डाल। कोई नही आयेगा आगे,कभी तुझ को बचाने। पर आ जायेगें कैई राक्षस ,तुमको जिन्दा जलाने । बंद कर दे…

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ऐसे सुधरेगा वहशी समाज

सुबह जैसे ही टी वी खोलते ही लोगों ने हैदराबाद के चारों बलात्कारियों के एन्काउन्टर में मारे जाने का समाचार सुना,तो पूरे देश में खुशी व उल्लास का वातावरण छा गया। ऐसे वीभत्स कांड के इतनी जल्दी पटाक्षेप ने जन मानस में आशा का संचार कर दिया। 16 दिसम्बर को निर्भया कांड को सात साल…

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टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी से पस्त जनता !

पहले आम जनमानस को सस्ते काल दर और सस्ती इंटरनेट सेवाओं की लत लगाई फिर धीरे- धीरे दरो को महंगा करते गए और आज हालात ये हो गए है कि आम जनता खुद को ठगा महसूस कर रही । विगत दो साल से जिस तरह टेलीकॉम कम्पनियों ने जनता को लूटा है वो आक्रोश पैदा…

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