अजूबा प्रजातंत्र है,कुहरन भरी आजादी है
ठोकर खाने पर भी संभलता नहीं बेईमान, कुछ दौलत के लिए वह बेच देता है ईमान. बेइज्जती का उसको कुछ भी परवाह नहीं, धन-पद के पीछे-पीछे भागता है बेलगाम. समाज में ईमानदार आदमी का अभाव है, शुभ सलाह मानने को कोई नहीं तैयार है. गरीबी व बेरोजगारी समाज में बरकरार है. खुलेआमअट्टहास यहां करता व्यभिचार…
