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उजालो की चमक में ,चमचमाना जानते हैं सब

उजालो की चमक में ,चमचमाना जानते हैं सब , अंधेरो में चमकता है, उसी को जुगनू कहते हैं ! सुगम हो मार्ग, तो फिर हौसलो की बात क्या करना , विषमताओ में जीदारी, पथिक की तोला करते हैं ! गगन भर चांदनी हो तो, भला तारो की क्या कीमत , अमावस रात में, तारों को…

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बदरपुर डायरेक्ट्री 2022 का कंस्टीट्यूशन क्लब में लोकार्पित

सोनू गुप्ता  नई दिल्ली । युवा कवि,लेखक,गीतकार,पत्रकार एंव साहित्य टी.वी. के संपादक  लाल बिहारी लाल के संपादन में बदरपुर डायरेक्ट्री 2022 का  लोकार्पण कंस्टीट्यूशनल क्लब ,नई दिल्ली में  भाजपा दिल्ली प्रदेश के उपाध्यक्ष श्री  के.एम. कर्मा, दिल्ली पुलिस से सेवा निवृत अधिकारी श्री पदम सिंह  पंवार, भारत सरकार के अराजपत्रित कर्मचारी यूनियन के संस्थापक श्री…

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ब्यूटी पार्लर का कमाल (व्यंग्य)

मुझे कविताएं लिखने का बड़ा शौक था। कविताएं लिखने से ज्यादा सुनाने का शौक था। कविताएं सुनाने से ज्यादा कवि सम्मेलन में जाने का शौक था। कवि सम्मेलन में जाने से ज्यादा तालियां बजवाने का शौक था। और सबसे बड़ी बात भले ही हम साठ बसंत देख चुके थे पर तीस का दिखने का शौक…

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💐 जिन्दगी-अनबूझ पहेली 💐

जिन्दगी इतनी सरल तो कभी भी नहीं थी,कठिनया ऋजु भी रही।लोगों के लिये तो यह ऐसी पहेली जिसको सब ने अपने अपने ढंग से हल करना चाहा,पर वो बिना हल हुएफिसलती रही,मचलती रही।जिन्दगी के अर्थ कोजिसने भी सिर्फ अर्थ में ही ढूंढना चाहा,उसकी जिन्दगी अर्थहीन हो कररह गई।जिन्दगी के अर्थ का वास्तविक मज़ा तोसन्तुष्टि में…

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दीवाल पर टांग लिया नया कैलेण्डर

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक अलसाई सुबह के साथ नए कैलेण्डर के नए पन्ने पर अंकित नए वर्ष के उदित होते सूरज ने आंगन में अपनी रोशनी बिखेर दी है । ‘‘यह हमारा नव वर्ष नहीं है’’ के स्लोगन के बीच भी सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की भरमार है । हर साल 31 दिसम्बर…

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मासूमियत से मशरूफियत

इस दुनिया में मासूमियत से जब हम- मशरूफियत की और बढ़ते हैं लगता है हर रिश्ते के मायने बदल जाते हैं पहले ज़रा सी चोट लगने पर भी रोते थे अब दिल पे ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराते हैं यारो संग उठना बैठना और खाना पीना , जश्न में हंसना नाचना और गाना बजाना अब…

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पहचान : शशि महाजन

आज मेरा पहला उपन्यास छप कर आया है , इसे मैंने पापा को समर्पित किया है , जो हूँ आज उन्हीं की वजह से हूँ। यूँ तो कुछ साल पहले तक मैं उनसे नफरत करता था , उन्हें पापा भी नहीं कहता था , कोशिश करता था कि उनसे बात ही न करनी पड़े ,…

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खुदीराम बोस

(03 दिसंबर, 1889 से 11 अगस्त, 1908) प्रारंभिक जीवन :- खुदीराम बोस का जन्म 03 दिसंबर, 1889 ई. को बंगाल में मिदनापुर ज़िले के हबीबपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री त्रैलोक्य नाथ बोस और माता का नाम श्रीमती लक्ष्मीप्रिय देवी था। बालक खुदीराम के सिर से माता-पिता का साया बहुत जल्दी…

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राखी के दोहे

धागा यद्यपि सूत का,पर दृढ़ औ’ मजबूत । बहिन-सहोदर नेह का,बन जाता जो दूत ।। पर्वों का यह पर्व है,जिसमें रक्षा,नेह । अंतर्मन उल्लास में,होती पुलकित देह ।। धागा बस इक माध्यम,पलता है विश्वास । जिसमें रहती निष्कपट,मीठी-सी इक आस ।। बचपन की यादें लिये,बिखरे मंगल गान । सम्बंधों में है सजा,संस्कार का मान ।।…

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साहित्यकार सविता चड्ढा को मिलेगा  ‘प्रज्ञान विश्वम सम्मान’

मैसूर साहित्य महोत्सव साहित्यकार सविता चड्ढा को मिलेगा  प्रज्ञान विश्वम सम्मान नई दिल्ली -अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति का तीन दिवसीय अठारहवां राष्ट्रीय अधिवेशन आगामी 19/ 20/21 जून को कर्नाटक के ऐतिहासिक नगर  मैसूर के “रॉयल इन” सभागार में आयोजित किया जा रहा है। वैश्विक चिंतक कवि प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव की अध्यक्षता…

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