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खुदीराम बोस

(03 दिसंबर, 1889 से 11 अगस्त, 1908) प्रारंभिक जीवन :- खुदीराम बोस का जन्म 03 दिसंबर, 1889 ई. को बंगाल में मिदनापुर ज़िले के हबीबपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री त्रैलोक्य नाथ बोस और माता का नाम श्रीमती लक्ष्मीप्रिय देवी था। बालक खुदीराम के सिर से माता-पिता का साया बहुत जल्दी…

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..पिता….. (कविता-11)

करता है जिसकी खातिर दिन-रात पिता मेहनत। ढोता सिर पर बोझा, देता है मिटा सेहत। आदर्श ,संस्कार ,व्यवहार सिखाता। सच्चाई की हमेशा ही राह दिखाता। तुम समय के साथ बदल जाओगे कभी, लेकिन कभी पिता की बदलती नहीं फितरत,,,,,,, जन्म से ही पाल पोश, जवान कर दिया। शिक्षा हुनर देकर गुणवान कर दिया। पूछा नहीं…

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जनता से जो वादे किये थे उन्हें पूरा नहीं किया : मनमोहन

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 14 दिसम्बर को रामलीला मैदान पर कांग्रेस की ‘भारत बचाओ रैली’ को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह साल पहले देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया है। उन्होंने आगे यह भी कहा…

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बजट

बजट के माध्यम से बढेगी गरीबों,मजदूरों, किसानो और महिलाओ की शक्ति सभी क्षेत्रों में योजनाओं से होगी वृद्धि राष्ट्र की बढेगी आर्थिक समृद्धि । अमीरो की हाय-हाय गरीबों का सौभाग्य अतिरिक्त टैक्स चार प्रतिशत गरीबों के लिए लाएगा अनेक वित्तीय उपहार। टेक्स स्लैब में बदलाव नहीं पाँच लाख आमदनी वालो को टैक्स देने का अधिकार…

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की सभी महिलाओं को बहुत बहुत शुभकामनाएँ : सीमा शर्मा

हम महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज़ स्वयं उठानी है न कि मध्य संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है माँ अर्थात वार्ता के रूप में नारी की धरती पर अपने सबसे पवित्रतम रूप में है न कि नारी को ईश्वर ने जन्मदात्री के रूप में उतारा है  नारी ही…

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सिविल सेवा कविता

हर कोई देखे सिविल का ख्वाब बड़ी शानो-शौकत बड़ा है नाम बेहद चुनौतीभरा इसका सफर बहुत कठिन है इसका एक्जाम। कैसे बने हम आईएएस पीसीएस कैसे बने हम अफसर अधिकारी हर अभ्यर्थी की यही है चिन्ता कैसे करें हम सिविल की तैयारी। माजिद हुसैन की पढ़ो भूगोल लक्ष्मीकान्त की राजव्यवस्था बिपिन चंद्रा का पढ़ो इतिहास…

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हे नारी

हे नारी!तू नारी है मत भूल सभी पर भारी है रब ने अलग बनाया तुझको फूलों सा महकाया तुझको तेरी माया तू जाने कोई समझ ना पाया तुझको तेरे कदमों पर दुनिया बलिहारी है मत भूल सभी पर भारी है कहीं पे राधा कहीं पे बाधा कहीं पे थोड़ी कहीं पे ज्यादा कहीं पे ममता…

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होइए वहीं जो राम रचि राखा !

” राम ही जाने ,राम की लीला ” यह महज एक सोच ,एक भाव नहीं अपितु पूर्ण सत्यता है । “जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्ह तैसी”  का परम भाव भी जागृत हुआ, लोगो ने 5 अगस्त को अयोध्या में जो हलचल ,जो त्योहार देखा उसमें निश्चित ही उन्हे रामराज्य नजर आया होगा…

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राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन

(01 अगस्त, 1882 से 01 जुलाई, 1962) प्रारंभिक जीवन :- पुरुषोत्तम दास टंडन का जन्म 01 अगस्त, 1882 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा वहीं के सिटी एंग्लो वर्नाक्यूलर स्कूल में हुई। सन् 1894 में उन्होंने इसी स्कूल से मिडिल की परीक्षा उत्तीर्ण की। हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण…

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माननीय प्रधान मंत्री का राष्ट्र से आह्वान है

Doctor Sudhir Singh माननीय प्रधान मंत्री का राष्ट्र से आह्वान है,उसका अनुपालन ही उनके प्रति सम्मान है.आइए!इस अभियान को सफल बनाए हम,‘कोरोना’ वायरस का इसमें छिपा विनाश है.5 अप्रील,रविवार को ठीक नौ बजे रात्रि में;‘सामाजिक दूरी’ का मन से पालन करना है.आवास के अंदर नौ मिनट तक अंधेरा रख,घर के बाहर मोमबत्तीऔर दीया जलाना है.एक…

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