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रिश्ता

जिंदगी की राह कुछ ऐसी ही होती जब बेटी का विवाह हो नजदीक पिता की आँखे डबडबाई  रहती मानों आँसुओं का बाँध टूट रहा हो बचपन से पाला पोसा  वो अब घर छोड़ कर जाना होता है  r ये नियम तो है ही किंतु त्यौहार और घर का सूनापन भर जाता आँसू बेटी के न…

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राफेल की नींबू – मिर्ची

अपने देश के भीमकाय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह  जी ने  राफेल को छोटा सा नीबू क्या चढ़ाया  बाकी कांग्रेसियो को बड़ी सी मिर्ची लग गयी । अजीब बात है कुछ ना मिले तो नीबू मिर्ची को ही राष्ट्रीय मुद्दा बना दो और फिर अंधविश्वास – अंधविश्वास करके पूरे भारतीय संस्कृति का सत्यानाश कर दो । कब…

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उम्मीदों का वृक्ष

उम्मीदों की चादर में कई सपने दफ्न हो गए। जिन वृक्षो से की थी छाया की उम्मीदे,वो छाया पतझड़ आने पर खुद ही कहीं गायब हो गयी।। जीवन के गुजरते पलो में अक्सर ऐसा हुआ। शुखे मुरझाये वृक्षो से भी कई बार ठंडी हवाओं का अनुभव हुआ , शायद गिर रहे थे जो पत्ते उन्होंने…

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भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार बन गया शिष्टाचार भुखमरी-गरीबी का गरम बाजार सरकारी योजनाओं का व्यापार लालफीताशाही का अत्याचार जनतंत्र बन गया आज मजाक, संसद में जा बैठे चोर हजार कुर्सी की खींचतान में नेताओं ने प्यारे भारत की अवाम दी मार हे! सुभाष,भगत, बिस्मिल, असफाक कब होगा भारत भू पर सच्चा उजियार फैला साम्राज्य पाश्चात्य संस्कृति का भारतीय…

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लाल बिहारी लाल का 46वां जन्मोत्सव सेवा सोसायटी ने धूमधाम से मनाया

सरस्वती एजूकेशन वेलफेयर अवेयरनेस (सेवा)सोसायटी ने लाल बिहारी लाल का 46वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया सोनू गुप्ता नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत संस्था सरस्वती एजूकेशन वेलफेयर अवेयरनेस (सेवा) सोसायटी ने लाल कला मंच के सचिव पर्यावरण प्रेमी एवं दिल्ली रत्न लाल  बिहारी लाल का जन्मोत्सव मीठापुर चौक पर धूमधाम से वरिष्ठ समाजसेवी लोक नाथ…

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भीतर दीप जगाना होगा (सम्पादकीय)

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) आप सभी को सपरिवार दीपावली, गोवर्धन, भैयादूज, छठपर्व की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं । दिवाली, दीपों का पर्व है, अन्धकार को मात देती रौशनी के दीपों को प्रज्ज्वलित कर हम अपने आस–पास के रौशनी से जगमगा देते हैं । बम–पटाखों– फुलझड़ियों के मा/यम से अपनी प्रसन्नता और आनन्द को व्यक्त…

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दीपावली की शुभकामनाएँ”

कविता मल्होत्रा (संरक्षक उत्कर्ष मेल) बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी का त्योहार समूचे भारतवर्ष में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। लेकिन सदियों से रावण वध की रस्में पूरी करता ये समाज आज तक रामराज्य लौटा लाने में सफल नहीं हो पाया। हम सभी जानते हैं कि एक हृदय से दूसरे हृदय तक…

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मगर….

खफा हो गए मुझसे मेरे ही शब्द बहुत सोचा मगर कुछ लिख पाया नहीं। एक नगमा था जो गाती थी कभी मैं आज बहुत सोचा मगर याद कुछ आया नहीं। ये जो बदली थी न ये कल भी थी बरसी बहुत टूटकर मगर मेरे मन को भिगाया नहीं। ये जो राह गुजर रही है आना…

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गोइन्का पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

कमला गोइन्का फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्री श्यामसुन्दर गोइन्का ने एक प्रेस विज्ञप्ति द्वारा बताया है कि दक्षिण भारत के हिन्दी साहित्यकारों के लिए निम्न पुरस्कारों की प्रविष्टियां मंगाई गयी हैं। जो हिन्दी भाषी साहित्यकार अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में पिछले 10 वर्षों या अधिक अवधि से हिन्दी साहित्य की सेवा व सृजन कर रहे हैं…

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बूढ़ा-बुजुर्ग जब वृद्धाश्रम में बस जाता है

सिर पर बोझ जब भीअसह्य हो जाता है, आदमी तुरंत  उसे उतार कर रख देता है. इस भरी  दुनिया में  सिर्फ माता-पिता ही, संतान की जिम्मेवारी जीवन भर ढोता है. फूल समान लगता है सबों का बोझ उसे, माँ-बाप  मुस्कुराकर उसे उठाता रहता है. खुद के बुढ़ापा का बोझ  भूल  जाता वह, गदहे की तरह…

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