जाने कहां गये वो दिन
यह बताते हुए अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है कि आपके अपने राष्ट्रीय पाक्षिक समाचार पत्र् ‘उत्कर्ष मेल’ इस अंक (1–15 नवम्बर) के साथ दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है । प्रभु कृपा और आपका प्यार है । सम्पादकीय लिखते समय सर्वप्रथम उन दो विभूतियों को मैंने भी नमन किया और भावों से…
