नही है कोई रक्षक तेरा ऐ भारत की नारी
नही है कोई रक्षक तेरा ऐ भारत की नारी। करनी होगी तुझ को खुद ही अब अपनी रखवारि। वन कालका या बन चंडी कौइ भी रूप अपना। हाथों मे हथिआर लेकर, तू दैत्य संहार कर डाल। कोई नही आयेगा आगे,कभी तुझ को बचाने। पर आ जायेगें कैई राक्षस ,तुमको जिन्दा जलाने । बंद कर दे…
