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कैसे

कैसे गीत गजल कविता के छंदों का विस्तार करूं । भय से विस्फारित जब आंखें ,कैसे उनसे प्यार करूं ।। घायल मन , निर्बल है तन, चेतना शून्य कुंठित विचार । प्रलयंकारी बाढ़ -वेदना का कैसे प्रतिकार करूं ।। 1 जिसको खुद उपचार चाहिए वह प्रियजन की चिता जलाता। अंधकार है गहन सूझता नहीं किरण…

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भिखारी

भिखारी होनाआसान नहींरखना पड़ता है गिरवीअपना अहमअभिमानमान सम्मानको मिटाकर वाणी में रखनी पड़ती हैमिठास कुछ भी कहे लोगतब भी रखनी पड़ती हैदीनताशरीर में लानी पड़ती हैमालिनताआंखों में बेबसीलाचारी याकोई दैहिक अपंगता शरीर के साथ मनको भी अकर्मण्यबनाना पड़ता हैरखना पड़ता है भरोसाभाग्य पर कभी मिल जाता हैबहुत कुछकभी-कभीपड़ जाते हैं फाखेकभी हालात बना देते हैंदेते…

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कागा सब तन खाइयो (कहानी)

कई दिनों से भयंकर बीमारी के बावजूद भी नीलिमा का चेहरा बहुत सुंदर दिख रहा था। उसके पति राकेश और बेटे खुश थे कि शायद अब वह बच जाएगी। पिछले कुछ समय से फ़ेसबुक पर लिखने से उसके काफ़ी दोस्त बन गए थे और जिस अकेलेपन के कारण उसकी जान पर बन आई थी, आज…

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पत्रकारिता : चुनौती एवं भविष्य : विजय गर्ग

हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर यदि सामाजिक सरोकार रखने वाली निष्पक्ष पत्रकारिता तथा पीत पत्रकारिता के बारे में बात न हो,तो हिंदी पत्रकारिता दिवस की महत्वत्ता का आंकलन नही किया जा सकता। वर्तमान परिदृश्य में पीत पत्रकारिता की प्रबलता और स्वार्थसाधनी राजनीति निजी महत्वकांक्षा के चलते पत्रकारिता मिशन न रहकर व्यवसाय बन चुका है।…

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कानून के साथ लिंग संवेदीकरण महिलाओं के लिए अच्छा साबित हो सकता है

लैंगिक भेदभाव का मूल कारण भारतीय समाज में प्रचलित पितृसत्तात्मक मन है. हालांकि अब ये शहरीकरण और शिक्षा के साथ बदल रहा है, फिर भी एक के लिए लंबा रास्ता तय करना है. सामाजिक कंडीशनिंग और कठोर लिंग निर्माणों की घटनाओं के कारण असमान संतुलन बना हुआ है) —-प्रियंका सौरभ रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,…

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ग़ज़ल

इस नये साल पर दें तुम्हें क्या बधाइयाँ। हर सिम्त हैं चीखें-पुकार, ग़म- रुलाइयाँ। हम जायें किधर इधर कुंआ, उधर खाइयाँ गुमराह हो गयी हैं हमारी अगुआइयाँ। काबिज़ हैं ओहदों पर तंग़ज़हन ताक़तें, हथिया रहीं सम्मान सभी अब मक्कारियाँ। ईमानदारियों की पूछ- परख है कहाँ, मेहनत को भी हासिल नहीं हैं कामयाबियां। माँ,  बहन, बेटियों…

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बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन। आँखों में आकाश हो, पांवों तले जमीन।।

जीवन में सफल होने के लिए धैर्य रखना और अपने सपनों के लिए समर्पित रूप से कड़ी मेहनत करना महत्वपूर्ण है। जीवन में कुछ भी मुफ्त नहीं है, और इसलिए हमें जीवन में बड़ी चीजें हासिल करने के लिए अपने सभी प्रयास करने और अपनी सीमाओं को चरम तक पहुंचाने की जरूरत है। इसके अलावा,…

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जनहित में जो अब जरूरी हो गया है

डॉक्टर सुधीर सिंह जनहित में जोअब जरूरी हो गया है आदमी का आचरण ही बदल गया है, खून का रिश्ता भी  पराया हो गया है। जिनको लोग कल अपना समझते थे, वही छिपकर  आघात  करने लगा है। घर-बाहर जालसाजों  का  जमावड़ा, ईमानदारी  का  मजाक उड़ा  रहा है। चरित्रवान  पर  व्यंग्य-वाण छोड़ कर, खुलेआम उनको  घायल …

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ब्रिक्स की ‘गूंज’ वाशिंगटन से इस्लामाबाद तक खलबली

अजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार,लखनऊ ( उ. प्र.)नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच पर जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ कैमरे के सामने आए, तो वाशिंगटन से लेकर पश्चिमी राजधानियों तक भू-राजनीतिक हलचल तेज होना लाजिमी था।…

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“राखी”

        राखी नाम की एक दुबली-पतली बीमार -सी ,साँवले रंग की एक लड़की,उम्र यही तेरह- चौदह की साल रही होगी । वह आठवीं कक्षा में पढ़ती थी । राखी कक्षा में बिलकुल पीछे बैठती थी। वह हमेशा चुपचाप बैठी रहती शायद इसी लिए उसकी कोई  सहेली भी नहीं बनी थी । हाँ अगर शिक्षिका कक्षा…

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