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ग्यारह को किसकी होगी पौह–बारह

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक) सभी देशवासियों को बसंत पंचमी की बधाई एवं इस अवसर पर माँ सरस्वती से विशेष विनती है कि अज्ञानता को दूर कर ज्ञान का प्रकाश चहुँ ओर कर दें जिससे सबको सच्ची बात भली प्रकार समझ में आ जाए । यहाँ थोड़ा मैं भी नासमझ सा हो गया हूं कि यदि…

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महाराष्ट्र में सियासी नौटंकी का पटाक्षेप

राजनीति के द्वंद्व मे फँसी शिवसेना को मंगलवार को जब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली तब जाकर उद्धव ने राहत की सांस ली । संजय राउत ने तो शरद पवार को राजनीति का चाणक्य तक कह डाला  । वैसे बता दे कि बीते  शनिवार २३ तारीख को सुबह अचानक तब झटका लगा जब सुबह सवेरे…

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स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग -प्रियंका सौरभ

मनुस्मृति या भारतीय धर्मग्रंथों को मौलिक रूप में और उसके सही भाव को समझकर पढ़ना चाहिए। विद्वानों को भी सही और मौलिक बातों को सामने लाना चाहिए। तभी लोगों की धारणा बदलेगी। दाराशिकोह उपनिषद पढ़कर भारतीय धर्मग्रंथों का भक्त बन गया था। इतिहास में उसका नाम उदार बादशाह के नाम से दर्ज है। फ्रेंच विद्वान…

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हिन्दी फैल रही दुनिया में

हिन्दी हिन्दुस्तान की ही, रही नहीं अब भाषा फैल रही है दुनिया में, बन जन-जन की आशा हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही…….. आजादी में फर्ज निभाया, बनके जैसे फौजी दसों दिशा के लोग बने थे, अजब मनमौजी बनी देश की भाषा यह, दुनिया की अभिलाषा हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही…….. दुनिया में हिन्दी बिना अब,…

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सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण’

आप सभी को महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं । सभी मंदिरों में बड़ी–बड़ी कतारें हैं जो भगवान के प्रति उनकी श्रद्धा और विश्वास का संकेत देती हैं । आज भले ही ज्योतिष के दृष्टिकोण से कोई महासंयोग बन रहा हो, उस विषय में न जाकर, जो अच्छा संयोग मुझे प्रतीत हो रहा…

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जीएसटी अनुपालन व्यवस्था अभी भी सरल नहीं : सीएजी

नई दिल्ली: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के अनुसार, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के दो वर्ष बाद भी सरकार एक सरल कर अनुपालन व्यवस्था नहीं दे पाई है और गैर-दखलकारी ई-कर प्रणाली दूर की कौड़ी बना हुआ है। सीएजी ने संसद में पेश की गई एक रपट में कहा है,…

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जीवन का सार

गृहस्थी का दायित्व, कब अवसान देता है, गाड़ी-सा जीवन जिम्मेदारियों की सड़क पर, सरपट दौड़ता है, अहर्निश अविराम। स्व मनोरथ श्रम-भट्ठी में झोंकता है, स्वजनों के काम्यदान के लिए। तब प्रमोद-सरिता अविरल बहती है, परिजनों को भिगोती है अपने सुखदायी मेघपुष्प से। कर्तव्यों की वृत्ति अंततः जीर्ण बना देती है, पराश्रित बना देती है। बस…

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दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी

आज एकल परिवार और महिलाओं की नौकरी पर जाने से दांपत्य सुख के साथ-साथ पारिवारिक सुख जो होना चाहिए वह नहीं है। बच्चे किसी और पर आश्रित होने के कारण टीवी मोबाइल में घुसे रहते हैं। कामकाजी पति-पत्नी के मामलों में यह बात सामने आ रही है कि दोनों ऑफिस के बाद घर में मोबाइल…

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जीवन की रक्षा के लिए भी विकास के समांतर धरती को बचाने का संकल्प लेना होगा

विजय गर्ग सभ्यता की शुरुआत से ही प्रकृति और मनुष्य के बीच बहुत गहरा संबंध रहा है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, लेकिन आज ऐसा लगता है कि इंसान को प्रकृति की उतनी रह गई है। इसमें दोराय नहीं कि पर्यावरण परवाह नहीं रह सिमटता नजर आ पर संतुलन को बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन…

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प्रधान मंत्री जी की ललाट पर चिंता की रेखाएं

Doctor Sudhir Singh प्रधानमंत्री जी की ललाट पर चिंता की रेखाएं,130करोड़ जनता की परेशानी बयां करती हैं,दूरदर्शी राष्ट्रनायक  चुनौतियों से घबराता नहीं,खतरों से खेल लेने की उनकीआदत हो गई है. दुनिया के लिए ‘कोरोना’आज गंभीर खतरा है,धर्म-जातिऔर सरहद से उसका नहीं वास्ता है.जाल में वह फंसाता हैअमीर-गरीब सबको ही,असावधान इंसान का ही वह शिकार करता…

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