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उथल-पुथल से भरपूर रहा पखवाड़ा

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव यह पखवाड़ा बहुतउथल-पुथल वाला रहा । चुनाव भी निपटे और बहुत सारे बड़े कहे जाने वाले नेता भी निपट गए । वे चुनाव जीतकर निपट गए और बुछ चुनाव हार कर निपट गए । पर सबसे पहले तो भारत के लोकतंत्र के मंदिर में अनायास घुसने वाले तथाकथितों की कहानी…

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SAY NO TO SUICIDE (सम्पादकीय )

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) वर्ष 2020 पूरी दुनिया को रास नहीं आ रहा । स्वास्थ्य, आर्थिक, प्राकृतिक आपदाओं के साथ–साथ जब हमारे बीच में से होनहार व्यक्तित्व तथा युवाओं का आदर्श कहे जाने वाले प्रतिभावान नायक सुशान्त सिंह राजपूत का मुंबई में अपने निवास पर ही आत्महत्या कर लेने की खबर का आना, एक…

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तलाक है या है ये बिदाई

हरफ – हरफ हिसाब लगाकर सब ले गई थी तुम अपना| ये मेरा हुआ, ये तुम्हारा बनता है इतना। फिर भी छोड़ गई देखो सामान कितना| इतना कि हर पल, हर कदम अपने ही घर में ठोकर खाकर गिरता हूँ में| यूंकि तुम याद न आओ इसलिए आँखें मूँदें फिरता हूँ मैं। सिंगार के निशां…

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“धर्म ताकत या सियासत ?”

हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि चुनाव की सरगर्मी के साथ साथ धर्म के नाम पर सियासत तेज हो जाती है। सर्वधर्म समभाव का पालन करने वाले इस देश की आत्मा को हिंदू मुसलमान के नाम पर बांटने की कोशिशें रुकने का नाम नहीं लेती हैं। देश कोरोना से लड़ रहा है, कितने…

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नारी है इस जग की मूल… (कविता-3)

नारी है इस जग की मूल रे नर! दे न इनको शूल…..      त्याग, समर्पण, सेवा धर्म      करती यह तन्मय हो कर्म      रखती हरदम सबका मान      घर, आंगन की इनसे शान      झोंक न खुद आँखो में धूल      रे नर! दे न इनको शूल…. दिव्य गुणों से यह परिपूर्ण करती विपदाओं…

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राष्ट्रभाषा  हिंदी के आगे आज भी नतमस्तक है समाज ..!

हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा की सार्थकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकतर  कालजई रचनाएं हिंदी भाषा में ही उद्धृत है । हिंदी हमारी राजभाषा है अर्थात राज्य के कामकाज में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है। अंग्रेजों से स्वतंत्र होने के बाद भारत ने 14 सितंबर 1953…

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अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस : गीतकार -अनिल भारद्वाज एडवोकेट

हिमालय के भाल पर सूरज सी जो दमके,वही मेरी राष्ट्रभाषा हिंदी भाषा है। सूर तुलसी ने सजाई काव्य गहनों से,है बहुत सुंदर ये अपनी और बहनों से,अजंता की मूर्ति सा जिसको तराशा है,वही मेरी मातृभाषा हिंदी भाषा है। गीत सा श्रृंगार और संगीत सा स्वर है,भाव मन के जहां बसते हिंदी वह घर है,हिंद के…

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..पिता….. (कविता-11)

करता है जिसकी खातिर दिन-रात पिता मेहनत। ढोता सिर पर बोझा, देता है मिटा सेहत। आदर्श ,संस्कार ,व्यवहार सिखाता। सच्चाई की हमेशा ही राह दिखाता। तुम समय के साथ बदल जाओगे कभी, लेकिन कभी पिता की बदलती नहीं फितरत,,,,,,, जन्म से ही पाल पोश, जवान कर दिया। शिक्षा हुनर देकर गुणवान कर दिया। पूछा नहीं…

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प्रेम,love,attracfion : आशा सहाय 

मेरे घर के बरामदे मे कपड़े  सूखने के लिए टाँगीगई एक अलगनी पर एक अत्यंत छोटी सी चिरैया ने पंखों का एक छोटा सा घोंसला बना लिया अथवा यों कहूँ कि लटका लिया है।सफेद छोटे छोटे पंखों का एक आकर्षक घोंसला।आश्चर्य होता है कि कहाँ से उसने इतने छोटे छोटे पंख ढूँढे होंगे।मै चिकित्सीय कारणों…

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बंकिमचंद्र के जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन

भारतीय स्वतंत्रता काल में क्रांतिकारियों का प्रेरणास्रोत -‘वंदे मातरम्’- जो 1937 में भारत का राष्ट्रगीत बन गया, जिसके रचयिता बंग्ला भाषा के प्रख्यात उपन्यासकार एवं कवि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के जन्मदिन पर “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” (साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था) के तत्वावधान में संस्था के अध्यक्ष श्री देवेंद्र नाथ शुक्ल एवं महासचिव डॉ. मुन्ना लाल प्रसाद के संचालन…

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