बाल कविता – शरारती चिम्पू
एक मदारी का बंदर था चिम्पू, रोज उछल कूद बहुत मचाता। अपनी शैतानी पर खूब इठलाता, एक रोज चिम्पू हो गया आजाद। मदारी को छोड़ जंगल जा पहुचा, मोबाइल मदारी का है उसके पास। सब जंगल के जानवरों को दिखाता, अपना रोब उन पर खूब जमाता। सबका दिल मोबाइल पर आया, जंगल का राजा आया…
