सर्वोत्तम योग
प्रकृति की निराली छटा में गुँजित हैं वेद पुराण निस्वार्थता रस्म जिसकी है परस्पर प्रेम पहचान कितना खूबसूरत है न ईश्वर का बख़्शा हुआ ये मानव जीवन, जिसकी नस नस में वात्सल्य पोषित होता है, किंतु इस अमृत का विष में रूपाँतरण क्यूँ, कब और कैसे हो गया ये गँभीर चिंतन का विषय है।धरती, आकाश,…
