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साईकिल

           इलाहाबाद का नैनी इलाका कभी बंजर जमीन था जहां उपज के नाम पर कुछ भी नहीं था लोग  सब्जी तथा फूलों का व्यवसाय करके अपना घर चलाते थे।उन‌ खाली जमीनों पर करीब सत्तर के दशक में कुछ पूंजीपतियों की नजर पड़ी और उन्होंने उसे खरीदकर उनपर अपनी-अपनी फैक्ट्रियां बनानी चालू कर दीं। इससे दो फायदा…

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जन भागिदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव है

-लाल बिहारी लालनई दिल्ली । जब इस श्रृष्टि का निर्माण हुआ तो इसे संचालित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों का एक सामंजस्य स्थापित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों के बीच एक परस्पर संबंध का रुप प्रकृति ने दिया जो कलान्तर मे पर्यावरण कहलाया। जीवों के दैनिक जीवन को संचालित करने के लिए उष्मा…

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सरकारी दफ्तरों में हिन्दी का प्रयोग बढ़ाना जरुरी है- –लाल बिहारी लाल

आज भारत में हिन्दी बोलने,लिखने तथा व्यवहारिक प्रयोग करने वालों की संख्या लगभग 70 प्रतिशत है फिर भी आज दुख इस बात का है कि सरकारी दफ्तरों में और न्यायालयों में अंग्रैजी का बोलबाला है । खुशी की बात ये है कि इलाहाबाद न्यायालय के कुछ जज हिदी में केस की सुनवाई के लिए तैयार…

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“रत्नव” त्रिदिवसीय नाट्य महोत्सव का आयोजन

23 नवंबर 2024 को हिन्दी रंगमंच की अग्रणी संस्था ‘रत्नव'(रमा थिएटर नाट्य विद्या) का तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव दिल्ली के ‘श्री राम सेंटर’ में  पूरी भव्यता से आरंभ हुआ। महोत्सव का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता और देश में एसिड -अटैक  की शिकार लड़कियों के लिए वर्षों से…

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‘चालीस रुपये’

            “सीमा आज स्कू्ल नहीं गयी ?”      “नहीं चाची ,आज काम करते देर हो गयी।”      सीमा ने कुछ सकुचाते हुए बंगालिन चाची को जवाब दिया ।         बंगालिन चाची सारे बच्चों के लिए उनका यही नाम था। वे एक लम्बी सांँवली-सी महिला थीं लेकिन उनका चेहरा अनायास आकर्षित करता हुआ था। धर्म से…

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भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार हमारे देश में इस तरह सर्वव्यापी बन गया है कि बिना भ्रष्टाचार के हम कोई भी भी सरकारी काम कर सकते है | जहां कहीं भी सरकारी काम होता है | वहां भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है | हमारे देश में भ्रष्टाचार बहुत ही खतरनाक समस्या है | भ्रष्टाचार बहुत सी समस्याएं उत्पन्न करता…

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ग़ज़ल

इस नये साल पर दें तुम्हें क्या बधाइयाँ। हर सिम्त हैं चीखें-पुकार, ग़म- रुलाइयाँ। हम जायें किधर इधर कुंआ, उधर खाइयाँ गुमराह हो गयी हैं हमारी अगुआइयाँ। काबिज़ हैं ओहदों पर तंग़ज़हन ताक़तें, हथिया रहीं सम्मान सभी अब मक्कारियाँ। ईमानदारियों की पूछ- परख है कहाँ, मेहनत को भी हासिल नहीं हैं कामयाबियां। माँ,  बहन, बेटियों…

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जरूरी है (गजल)

शंकाओं का शमन जरूरी है। आतंकों का दमन जरूरी है। आगे बढ़कर करें इसे संभव। दुनिया भर में अमन जरूरी है। श्रम से सींचें सभी इसे मिलकर। अपना सुरभित चमन जरूरी है। दुष्टों को तो सबक सिखाना है। पूज्यों के प्रति नमन जरूरी है। कलियुग ने तो किए बहुत करतब। सतयुग का आगमन जरूरी है।

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दिल्ली में दिलचस्प चुनावी शोरगुल !

कयासों का दौर खत्म हुआ । दिल्ली विधानसभा चुनावों की घोषणा हो गई साथ ही साथ अब सत्ता का असली चरित्र भी जनता के सामने आना शुरू होगा । केजरीवाल के लिए अब सफर आसान नहीं है क्योंकि पिछली बार केजरीवाल जनलोकपाल मुद्दे को ढाल बनाकर चुनावी समर में कूदे थे किन्तु उन्होंने चुनाव जीतते…

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सम्पादकीय : अहम को त्यागकर ही एकता संभव है

            31 अक्टूबर सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है । महान स्वतंत्रता  सेनानी भारत के पहले उप–प्रधानमंत्री एवं पहले गृहमंत्री सरदार पटेल जी की अनेक अन्य विशेषताओं में से जो सबसे प्रमुख रही कि उन्होंने भारतीय रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने में अहम…

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