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समस्त भारत आनन्दित, हर्षित एवं गर्वित है क्योंकि मेरे राम आ रहे हैं।

अयोध्या नगरी इतिहास रचने के बहुत करीब है। जिस दिन का सभी सनातनियों को अरसों से इंतजार था, वो दिन बसआने ही वाला है। अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर में अब प्रभु विराजमान होकर अपने भक्तों को दर्शन देने वाले हैं।दुनिया की जटिल से जटिल समस्याओं के मूल में यदि गहराई से झांकेंगे,…

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अभिव्यक्ति और भावनाओं को तलाशने का शक्तिशाली माध्यम है ‘कला’

( विश्व कला दिवस पर विशेष) कला हमेशा से ही अभिव्यक्ति और भावनाओं को तलाशने का एक शक्तिशाली माध्यम रहा है।दुनियाभर में आज यानी 15 अप्रैल को वर्ल्ड आर्ट डे (विश्व कला दिवस) मनाया जा रहा है। कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस दिन को हर साल 15 अप्रैल को मनाया जाता…

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(कविता) विचार धारा

अपनी विचार धारादूसरों पर थोपते -थोपतेमर जाता है आदमी!आखिर !मरने के लिए आये हैतो मर जाते हैं,छोड़कर अपनी विचार धारावो !विचार धारासुलगती रहती है समाज मेंअंधी होकरक्योंकि ढोने वालेएक्का दुक्कापैदा होते रहते हैंयुगों युगों सेऔर मृत तस्वीर परचढाते रहते हैं फूलउस विचार धारा को जिंदा रखने के लिए।लेकिन दूसरे विचार धारा को नहीं मानतेचाहे उत्तम…

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राष्ट्रभाषा  हिंदी के आगे आज भी नतमस्तक है समाज ..!

हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा की सार्थकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकतर  कालजई रचनाएं हिंदी भाषा में ही उद्धृत है । हिंदी हमारी राजभाषा है अर्थात राज्य के कामकाज में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है। अंग्रेजों से स्वतंत्र होने के बाद भारत ने 14 सितंबर 1953…

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आत्महत्या कोई विकल्प नहीं

नीट की परीक्षा उत्तीर्ण ना कर पाने के कारण स्वाति बहुत उदास हो गई थी। कुछ नंबर की ही कमी रह गई वरना पेपर निकल जाता। यह उसका तीसरा प्रयास था उसे पूरी उम्मीद थी कि इस बार क्वालीफाई कर लेगी। ऊपर से समाचारों में नीट की पारदर्शिता पर उठे सवालों से उसका मन और…

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मित्रता दिवस पर सखी को समर्पित कविता

मंजू लता हे ! सखी फ़िर कब मिलेंगेयाद आती हैं तुम्हारीखोजती हैं आंखे तुम्हारी चंचलतातुम्हारे कोमल अधरों की मुस्कुराहट हे ! सखी फ़िर कब मिलेंगेखोजती हैं मेरी आंखे तुम्हारा भोलापनमेरा रूठना तुम्हारा मनानासाथ ही डेरी मिल्क गिफ्ट करना हे ! सखी फ़िर कब मिलेंगेयाद आती हैं क्लास की बातेएक दूसरे में खोकर खाली पीरियड मेंबाते…

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माया मिली ना राम, बन गए आंदोलनजीवी !

खद्दर डाल कर ,दरी बिछाकर बिसलेरी का जल पीने वाले देश के परजीवियों को प्रधानमंत्री जी ने आंदोलन जीवी कह दिया । अखिलेश यादव भी खुद को रोक नहीं पाए और खुद को लपेटे में लेकर भाजपा को चन्दा जीवी कह दिया । आप के भगवंत मान ने तो टूल्ल होकर रक्तजीवी कह दिया और…

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क़लम से कलाम के दफ़्तर तक

कविता मल्होत्रा (वरिष्ठ समाजसेवी एवं स्तंभकार -उत्कर्ष मेल) क़लम से कलाम के दफ़्तर तक पहुँचना हर किसी के बस की बात नहीं है।जिस क़लम की बुनियाद में सँस्कृति के बीज फलित होते हैं और मानवतावादी फ़सल का अँकुरण होता है, उस क़लम को ही साहित्यिक समाज में उच्चकोटि  का सम्मान मिलता है। मानव मूल्यों को…

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डिजिटल इंडिया में सबसे बड़ा झोल

ऑनलाइन ठगों से सावधान एक तरफ डिजिटल इंडिया की बात कहकर तथा ऑनलाइन ट्रांजेक्सन को बढ़ावा देने की बात कही जाती है कि कैशलेस ट्रांजेक्शन होंगी तभी डिजिटल इंडिया बनेगा, व्यापार करना, लेनदेन करना सुगम हो जाएगा । ठीक है, सच भी है, आजकल ऑनलाइन ट्रांजेक्सन को और अधिक बढ़ावा देने के लिए बाजार में…

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“गर्मी की छुट्टियों का अनोखा उपहार”

लक्ष्मी कानोडिया सूरज तप रहा था, स्कूल की घंटियाँ शांत हो चुकी थीं, और बच्चों की गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो गई थीं। पर इस बार, राघव, सिया, कबीर, और जोया ने तय किया कि वे अपनी छुट्टियाँ केवल खेल-कूद और मस्ती में नहीं बिताएँगे, बल्कि कुछ ऐसा करेंगे जिससे समाज को भी फायदा हो।…

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