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भुट्टा खरीदते मंत्री जी

                                                                                                   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव मंत्री जी ने सोचा था कि उनकी वाह-वाह होगी कि ‘‘देखो इतने बड़े मंत्री जी सड़क के किनारे खड़े होकर भुट्टा खा रहे हैं संभवतः इसके लिए ही उन्होने अपना वीडियो बनवाया और वायरल भी कर दिया । पर दुर्भाग्य देखो की इसमें मंत्रीजी विलेन ही बन गए । फगगन सिंह कुलस्ते…

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काव्य हिन्दुस्तान अंतरराष्ट्रीय साहित्य समूह का 150 घंटे का ऑनलाइन कार्यक्रम संपन्न

रेखा शर्मा स्नेहा के संयोजन में कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के गीतकार डॉ देवेंद्र तोमर ने की। काव्य हिंदुस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर फेसबुक समूह द्वारा आयोजित प्रथम वार्षिक उत्सव हेतु भव्य काव्य सम्मेलन आयोजित किया गया जो दिनाँक-12_62022 जून से दिनाँक-17_6’2022 तक लगातार 24 घंटा रात दिन कार्यक्रम जिसमे 300 कवियों ने काव्य पाठ कर कार्यक्रम…

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अभिव्यक्ति और भावनाओं को तलाशने का शक्तिशाली माध्यम है ‘कला’

( विश्व कला दिवस पर विशेष) कला हमेशा से ही अभिव्यक्ति और भावनाओं को तलाशने का एक शक्तिशाली माध्यम रहा है।दुनियाभर में आज यानी 15 अप्रैल को वर्ल्ड आर्ट डे (विश्व कला दिवस) मनाया जा रहा है। कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस दिन को हर साल 15 अप्रैल को मनाया जाता…

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महात्मा गांधी और भारत की साझा राष्ट्रीय चेतना का विचार : मनजीत सिंह

महात्मा गांधी मूलतः एक जननेता थे—ऐसे नेता, जिन्होंने लोकतांत्रिक और क्रांतिकारी राजनीति को अमल में उतारकर दिखाया। उनका राजनीतिक जीवन किसी एक विचारधारा या सीमित दायरे में क़ैद नहीं था, बल्कि उसमें समग्रता, परस्पर-संबद्धता और रणनीतिक सूझ-बूझ साफ़ दिखाई देती है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उनके लिए केवल एक राजनीतिक संस्था नहीं, बल्कि क़ौम और वतन…

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वारिष्ट साहित्यकार श्रीमती सविता चड्ढा की कलम से (अनुभव-4)

हम एक ही कार्यालय में काम करते थे । मैं प्रबंधक के रूप में कार्य कर रही थी और मेरी ड्यूटी थी 10:15 पर मुझे उपस्थिति  रजिस्टर चीफ के कमरे में चपरासी के हाथों भिजवाना होता था । मेरे आगे रजिस्टर होता और मैं अपनी उस मित्र की प्रतीक्षा करती रहती एक 2 मिनट  तक…

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बेरोजगारी का शोर बनाम समाधान – राजेंद्र परदेसी

आज शिक्षा और बेरोजगारी की बहुत बात की जाती है। नेताओं से लेकर चाय की दुकान तक यही चर्चा है। पर क्या कभी हमने सोचा है कि समस्या की जड़ कहाँ है? क्या कोई भी सरकार, चाहे वह किसी भी राज्य या देश की हो, विद्यालयों और विश्वविद्यालयों से निकलने वाले हर विद्यार्थी को सरकारी…

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ये लाल टोपी वाले तेरा नाम तो बता !

राजनीतिक सफरनामा   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव अब उत्तर प्रदेश की राजनीति ‘टोपियों’’ पर जाकर उलझ गई है । राजनीति को तो किसी न किसी बिन्दु पर जाकर उलझना ही था सो वह टोपी पर उलझ गई । वैसे तो राजनीति को उलझने के लिए विकास नाम की चादर मिली हुई है पर यह चादर फट चुकी…

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भावों को उकेरती हूँ मैं कवयित्री हूँ

युवा कवयित्री सरिता त्रिपाठी जी के फेसबुक पटल पर मैं कवयित्री हूँ शीर्षक पर आधारित काव्य गोष्ठी के चार एपिसोड का आयोजन सफल हुआ। जिसमे दिए हुए शीर्षक पर सभी प्रतिभाग करने वाली कवयित्रियों ने स्वरचित रचनाओं का अपनी वाणी में लाजबाब प्रस्तुति देकर सभी दर्शको का मन मोह लिया। एक ही शीर्षक पर जब…

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जन भागिदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव है

-लाल बिहारी लालनई दिल्ली । जब इस श्रृष्टि का निर्माण हुआ तो इसे संचालित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों का एक सामंजस्य स्थापित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों के बीच एक परस्पर संबंध का रुप प्रकृति ने दिया जो कलान्तर मे पर्यावरण कहलाया। जीवों के दैनिक जीवन को संचालित करने के लिए उष्मा…

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नजरिया

हां मन उदास होता है यह देखकर कि आपको बाहरी रूप में देखकर आपके अंदर के इंसान को बाहर आने के पहले ही मार दिया जाता है। जिनकी सोच जिनकी धारणा बन जाती है वह स्वयं नहीं जानते ना ही कोशिश करते हैं समझने की उनको वही सही लगता है जो दिखाई देता है। अनेकों…

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