गजल : देवेन्द्र पाठक महरूम
पुरखों के गांव खेत बाग वन उजाड़कर फैलाओ न बदबू गड़े मुर्दे उखाड़कर अमरौती तो खाकर नहीं आये हो तुम यहां जाओगे तुम भी आखिरी कपड़ा उतारकर हम हैं तबाह अपने भी हैं तुमसे परेशां हालात रख दिया जो बेतरह बिगाड़कर कैसी हमारी जिंदगी गांवों में आज भी दो दिन हमारे साथ देखना गुजारकर चुप…
“माँ तुझे सलाम “
सीमा गुप्ता (मशहूर शायरा एवं समाजसेवी) लबो पर उसके कभी बद्दुआ नहीं होती बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती “ देश के मशहूर शायर मुनव्वर राना जी का ये शेर माँ शब्द के आस्तित्व को पूरी तरह से सार्थक करता है. माँ जो इस धरती पर खुद भगवन का ही स्वरुप है…
अक्षय तृतीया: समृद्धि, पुण्य और शुभारंभ का पर्व
अक्षय तृतीया, जिसे ‘आखा तीज’ भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पावन पर्व है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है—जो कभी क्षय (नाश) न हो। यही कारण है कि यह दिन शुभ कार्यों, दान-पुण्य, निवेश और नए आरंभ के लिए…
हिन्दी दिवस (गीत)
बाज उठी होठों पर, आज मेरी हिन्दी। ममता के ऑचल में, माथे की बिन्दी। गाती है गली गली ,सावनी सुहानी। फागुनी हवा में ,रंग घोल रही पानी। सरमाते अगहन की, मुस्कान मंदी। बाज उठी———— छायी मायुसी में ,रंग भर देती है। रूठे हुए नैनों में,ठंढ भर देती है। बहके हुए मन में,प्यार की कालिंदी।…
रोजगार संकट :भारत के आईटी क्षेत्र में छंटनी की लहर
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव से भारत के सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में गहरे संरचनात्मक परिवर्तन, पर क्या तैयार है देश का श्रमबल? भारत के आईटी क्षेत्र में हाल की छँटनियाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वचालन के दौर की अनिवार्य वास्तविकता हैं। यह केवल रोजगार संकट नहीं, बल्कि कौशल और तकनीक के पुनर्संतुलन की प्रक्रिया है। सरकार,…
“परदे में रहने दो, परदा न हटाओ……।” – मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (सम्पादकीय)
बात फिल्मों की करें या उसमें प्रस्तुत संगीत-गीत की वे सब भी हमारे ही बीच से हमारे लिए सृजित होते हैं। फिर एकाएक गीत बनता है- “परदे में रहने दो, परदा न उठाओ परदा जो उठ गया तो भेद खुल जायेगा।” बात आजकल राजनीति की जोर-शोर से हो रही है। पिक्चर साफ हो चुकी है…
सिक्सटी प्लस,पाओ यश
बचपन,यौवन,प्रौढ़ावस्था, बुढ़ापा ये तो प्रत्येक के जीवन की अमिट कहानी है।राजा हो या रंक,धनी हो या धनहीन,उद्योगपति हो या मज़दूर सब को हीइस चक्र से ही गुजरना हीगुजरना है।गौतम बुद्ध ने तो बूढ़े व्यक्ति को देखकर व्यथित हो वैराग्य ले कर राजपाट को ही त्याग दिया था। इन्सान अपनीजवानी के पैंतीस-चालीसवर्ष धनोपार्जन व बच्चों के पालनपोषण…
The Person is Constantly Becoming Lonely in Private life : Vijay Garg
That report from the World Health Organization shocked that every sixth human being in the world is alone. Crores of people in the world are living a life of absolute silence by being content with broken relationships and dialogue. In the right way, these silence within a human being has been millions of lives. Ironically,…
मैं भी एक इंसान हूँ, बस पुरुष हूँ
माँ,कभी एक पल को ठहरकर सोचना,तेरा बेटा भी एक इंसान है…हाँ, वो बेटा जिसे तूने बचपन में गिरने से पहले पकड़ लिया था,पर अब जब वो टूट रहा है… तो कोई नहीं देखता। आजकल ज़माना बदल गया है,अब हर पुरुष या तो अपराधी है या अपराधी घोषित कर दिया गया है।समाज में एक ऐसा तबका…
