नये साल का रोचक इतिहास
लाल बिहारी लाल नव वर्ष उत्सव मनाने की परंपरा 4000 वर्ष पहले बेबीलोन(मध्य ईराक) से शुरु हुई थी जो 21 मार्च को मनाया जाता था, पर रोम के शासक जुलियस सीजर ने ईसा से 45 ई. पूर्व जूलियन कैलेंडर की स्थापना विश्व में पहली बार की तब ईसा पूर्व इसके 1 साल पहले का वर्ष…
खिल उठे मानवता
श्रीमती कविता मल्होत्रा वसुदेव कुटुंब आज अपनी ही नाफ़रमानियों के कारण ख़तरे में है।कितनी अज़ीज़ रही होगी परम पिता को उसके अँश की हर एक प्रजाति जिसे उन्होंने एक उद्देश्य पूर्ण यात्रा के लिए धरती पर भेजा। प्रकृति समूची मानव जाति को निस्वार्थ सेवा का संदेश देती है लेकिन मानव औद्योगिक शिक्षा प्राप्त करके प्राकृतिक…
डोनाल्ड ट्रंप बोले- भारत जैसे देश के साथ काम करना अच्छी बात, बुरी नहीं
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि भारत, रूस और चीन जैसे देशों के साथ काम करना अच्छी बात है ना कि बुरी। वह रूस के साथ संबंध सुधारने की अपनी इच्छा को लेकर हो रही आलोचना पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग के साथ व्हाइट हाउस…
करोना का भूचाल
करोना का भूचाल करोना ने मचा दिया देश में भूचाल, अनदेखे साये ने कर दिया बवाल। देश विदेश में कर दिया अफरा तफरी का हाल, त्योहारों के उत्सव में कर दिया आतंक। जनता भय से व्याकुल हैं, सरकार हैं विवश, पुलिस चिकित्सक सभी मिलकर लड़ रहे जंग। इस समस्या का एक मात्र अब यही हैं…
भारतीय शिक्षण मंडल, काशीप्रांत और वाणिज्य संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला ‘शोध आनंदशाला’ : ‘फन्डामेंटल आफ सोशल साइंसेज रिसर्च’ का आयोजन।
कई विषयों के शोधार्थियों को मिला मार्गदर्शन वाराणसी, स्थानीय संवाददाता, 23 जुलाई “जिज्ञासा ही शोध का मूल है। यह जिज्ञासा किसी सैद्धांतिक प्रश्न से उत्पन्न हो सकती है तो कभी कल्पनाशक्ति एवं व्यावहारिक जीवन की समस्याओं से पैदा हो सकती है। शोध पूर्वज्ञान की सीमाओं को रेखांकित करते हुए अनुत्तरित प्रश्नों का उत्तर देने का…
उजालो की चमक में ,चमचमाना जानते हैं सब
उजालो की चमक में ,चमचमाना जानते हैं सब , अंधेरो में चमकता है, उसी को जुगनू कहते हैं ! सुगम हो मार्ग, तो फिर हौसलो की बात क्या करना , विषमताओ में जीदारी, पथिक की तोला करते हैं ! गगन भर चांदनी हो तो, भला तारो की क्या कीमत , अमावस रात में, तारों को…
महाराणा प्रताप: स्वाभिमान का प्रतीक और स्वतंत्रता का अमर सेनानी
महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि भारतीय आत्मगौरव के प्रतीक थे। जब सारे राजपूत मुग़ल दरबार में झुक गए, तब प्रताप ने जंगल में रहना स्वीकार किया लेकिन दासता को नहीं। हल्दीघाटी की मिट्टी आज भी उनके पराक्रम की गवाह है। उनका जीवन सिखाता है कि स्वतंत्रता सुविधाओं से नहीं, संकल्प और त्याग से…
शांति तभी कायम होगी जब लोगों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा होगी: सीजेआई
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन. वी. रमना ने शनिवार को कहा कि शांति तभी कायम होगी, जब लोगों की गरिमा और अधिकारों को मान्यता दी जाएगी और उनकी रक्षा की जाएगी। सीजेआई ने श्रीनगर में एक नए उच्च न्यायालय भवन परिसर की आधारशिला रखने के बाद यह टिप्पणी की। उन्होंने इस बात पर जोर…
हिन्दी दिवस एक दिन पर हिन्दी की बात हर दिन
हिन्दी भारत की मातृभाषा हैं।यह सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषाओ में से एक हैं।एक ऐसी भाषा जिसे हम जैसे लिखते हैं वैसे ही बोलते भी हैं।हिन्दी शब्द का वास्तविक अर्थ “सिन्धु नदी की भूमि” हैं।1918 ईस्वी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु अपने विचार रखे…
