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तूफान में धराशायी विपक्ष

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक बहुत बड़ मंत्र मिल गया है राजनीतिक दलों को चुनाव जीतने के लिए ‘‘लाड़ली बहिना’’  । पिछले साल मध्यप्रदेश के चुनावों में इस मंत्र को सिद्ध किया गया, परिणाम बेहतर आए तो अब हर एक चुनावी राज्यों में इस का प्रयोग किया जाने लगा ‘‘आओ बहिना तुम हमे वोट…

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माँ के शुभ नौ रूप

नव संवत्सर आ गया, लेकर नवउत्कर्ष ।मंगलमय हो शुभ सदा, भारतीय नववर्ष ।। फसलें सुख समृद्धि का, गातीं मधुरिम गान ।भरे अन्न भण्डार अब, प्रमुदित हुये किसान ।। ऋतु पावन मंगलमयी, सुखद चैत्र शुभ मास ।कोयल गाती गीत मधु, जन-जन में उल्लास ।। नव दुर्गा नव रात्र शुभ, माँ के शुभ नौरूप ।करते जग कल्याण…

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10वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बहाने

वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्यों द्वारा 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय  योग दिवस’ को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। 21 जून उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन भी होता है। योग कोई सरल प्रक्रिया नहीं है और ना ही प्रदर्शन की वस्तु है। योग मनुष्य को स्वस्थ जीवन के साथ मोक्ष के…

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बरसी एैसे प्रभु कृपा,दिलों से दिल की बात मिली उमड़ा सावन हिंदी भवन में स्नेह की सौग़ात मिली

इसे प्रभु कृपा नहीं तो और क्या कहा जाए, जब विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अभिन्न रचनाकारों ने, अपने लेखन से अनुराधा प्रकाशन को साहित्यिक समृद्धि देकर, इस काबिल बनाया कि एक साथ 15 पुस्तकों का लोकार्पण सँभव हो पाया। 21 जुलाई 2019 का दिन अनुराधा प्रकाशन के लिए एक ऐतिहासिक दिन बन कर आया, जिसमें…

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अन्तर्द्वन्द्व—(कहानी) : आशा सहाय

सन्नाटा है चारो तरफ।मैं चीख रही हूँ।लगता है, दूर दूर तक मेरी चीख की आवाज पहुँच गयी होगी।पर, नहीं – कहींकोई आवाज नहीं।एक गहरे सन्नाटे की ध्वनिसे भरा पड़ा है सबकुछ।सन्नाटे की एक विचित्र सी गूँज मस्तिष्क को बौखलाहट से भर रही है।और अधिक जोर से चीखने का मन हो  रहा है।पर,चीख जैसे मेरे अन्दर…

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पंचम सिंह पुराणिया (पांचाल) की 2 रचना एवं परिचय

हाय ! बुढ़ापाजरा जोर की गति से, सब अंग हाल बेहाल ।शिथिल हुआ तन फिर भी, मन की चंचल चाल । ।इंद्रिया सभी थकित हो गई, रहती ममद की चाह ।लाठी लेकर बाहर जावे, तब ही चल पावें राह । बधिर यंत्र कानों में हैं, ऐनक नयनन मॉंहि ।नकली बत्तीसी है मुंह में, असली दन्तावली…

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बैसाख़ी के फिर मेले हों

श्रीमती कविता मल्होत्रा इतिहास गवाह है कि जहाँ रूह सहमत होती है वहीं रब की रहमत होती है।किसी भी तरह की अनहोनी का अंदेशा सबसे पहले अपनी ही रूह को होता है।ये और बात है कि मानव की चेतना अपने ही चैतन्य के इशारे को नज़रअंदाज़ कर देती है।यूँ तो मानव की पहुँच चाँद तक…

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प्रकृति का रंग

Dr Rajni Yadav         प्रकृति का ये रंग लाजवाब था  इंसान घरो में कैद और बेजुबान आज़ाद था हवाएँ यू महकने लगी  कोयले पेड़ो पर चहकने लगी नदिया इतनी साफ थी  जमीन को आसमान से मिलने की आस थी जो डर अब तक मुर्गियों,मछलियों और बेजुबानो कीआंख में था उसकी झलक इंसानो में साफ़ थी यू…

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नियति ने सर्वोत्तम कृति से कैसा अजब खेल खेला है समूची प्रकृति उठान पर और मानव भयातुर अकेला है

(Smt Kavita Malhotra)विकास के नाम पर समूचा विश्व जिस गति से आगे बढ़ रहा था, आज उसकी रफ़्तार थम सी गई है। न तो कोई कारण ही किसी की पकड़  में आ रहा है न ही अब तक कोई निवारण हाथ आया है।कारण जो भी हो एक बात तो तय है कि समूचे विश्व से…

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दक्षिण में उग रहा भाजपा का सूर्य……

पंकज कुमार मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी पिछले सत्तर सालों में उत्तर और दक्षिण भारत की जो खाई खोदी गई थी उसका विरोध था। ये विरोध सनातन का था, भाजपा की हिंदुत्ववादी विचारधारा का था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी सेंट्रल चेन्नई, साउथ चेन्नई सहित 10 लोकसभा सीटों में दूसरे नम्बर…

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