नारी (कविता-2)
माना एक नारी की जिंदगी उसकी कब होती है पर उसे भी अधिकार है अपने मन से जिंदगी जीने का खिलखिलाने का गुनगुनाने का, पर ये अधिकार उसे स्वयं लेना होगा देना सीखा है लेना भी सीखना होगा कर्तव्य के साथ सचेत होकर आगे बढ़ कर अपना अधिकार लेना होगा, इससे नहीं बदलेगा उसका बेटी/…
योग जीने का विज्ञान
योग नहीं साधारण नाम है, योग तो जीने का ज्ञान है। भौतिक अध्यात्मिक भाव, आत्मिक हो या मानसिक। योग एकता का संदेश है, चेतना को करता एक है। भावनाओं का संतुलन करे, तालमेल बनाए मदद करे। बाहरी हो चाहे आंतरिक, दोनों तरह से पहुंचाता लाभ। मांसपेशियां और नसों को, कहता सद्भाव में कार्य करो। दिमांग…
क्या रुस लगायेगा चीन की आक्रामकता पर लगाम
कोरोना वायरस के कारण विश्व वयापार में जो खलबली मची है उसे कोई नकार नही सकता। वुहान शहर से निकला ये वायरस चीन के लिए सरदर्द बन चुका हैं। पूरा विश्व चीन को इसका जिम्मेदार ठहरा रहा है और महाशक्ति अमेरिका चीन को घेरने का हर संभव प्रयास कर रहा है। जहां विश्व के ज्यादातर…
जाटव चेतना समिति द्वारा चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन
जाटव चेतना समिति (रजि), करोल बाग, दिल्ली द्वारा स्कूली विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन श्री गुरु तेग बहादुर खालसा स्कूल, देव नगर, करोल बाग, नई दिल्ली में किया गया । इस प्रतियोगिता में लगभग 55 विद्यार्थियों ने भाग लिया । प्रतियोगिता का आरंभ प्रातः 10.30 बजे हुआ और दोपहर बाद विजेताओं को मुख्य…
देशभक्ति बन रही भयंकर बीमारी, महंगाई के आगे नेतागिरी भारी …!
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी हमारे ऊपर जो विदेशी कर्ज बढ़ रहा है उसके लिए हमें विदेशी मुद्राओं को एक वर्ष तक संयमित खर्च करने की आवश्यकता है, इसके लिए अब जागने के बाद जब सोना ना खरीदने और पेट्रोल डीजल बचाकर अर्थात ज्यादा उपयोग ना करने का आह्वान हमारे देश…
सूखे आंगन की दीवारी : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
(राजनीतिक सफरनामा ) दीपमाला से कांक्रीट के आंगन सज चुके हैं और सीमेन्ट की मोटी-पतली दीवालों पर भी लाइटिंग जगमगा रही है । अब यही तो प्रदर्शित करती है कि दीपावली का त्यौहार आ चुका है । ऊंची-ऊची बिल्डिंगों पर रोशनी जगमग हो रही है, उनके परिवार के मुस्कुराते हुए चेहरों पर और पा लेने…
कृष्णा शर्मा जी की 2 रचना एवं परिचय
तकदीर की लकीरें” कौन आज आया तकदीर का, दरवाजा खटखटाने बता दे मुझे। कैसी है ये दस्तक जिंदगी में, कोई तो बता दे मुझे। तकदीर की लकीरें अजीब है, कौन पढ़ें आज इनको यहाँ। लकीरों में उलझी तक़दीर मेरी, कोई तो बता दे मुझे। कौन है जो मेरी तकदीर के, दरवाजे पर आज है खड़ा।…
अभिव्यक्ति संस्था के कार्यक्रम “होली की बहार, काव्य की बौछार” में रचनाकारों ने खेली काव्य-होली
दिनांक १४ मार्च २०२१ का दिन अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्थाके लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा क्योंकि “अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था” की ओर से, होली के उपलक्ष में, “होली की बहार, काव्य की बौछार” कार्यक्रम का भव्य आयोजन, रोहिणी (दिल्ली) में कार्यक्रम आपकीं दोस्त Madhu Madhubala Labana जी के निवास स्थान पर सफ़लतापूर्वक सम्पन्न हुआ। अभिव्यक्ति मंच विगत छः…
जीवन क्रिकेट खेल
अनिश्चितता मूल में जीवन क्रिकेट खेल फाइनल उनके बीच में जो करते थे ट्रेल जो करते थे ट्रेल, लीग टेबल में नीचे अब वो सब से आगे, और सब उनके पीछे ‘यश’ मत होय निराश तू , व्यर्थ लगा कर होड़ जीवन लंबी रेस है, बस तू केवल दौड़ और जिन्होंने लीग तक, किया विश्वकप…
